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किसानों के साथ सरकारों एवं बिल्डरों द्वारा दमनकारी नीति अपनाई गई

चौधरी शौकत अली चेची 
ग्रेटर नोएडा गांव रामगढ़ में आठ गांवों के किसानों का  महीने से ज्यादा समय से लगातार संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर अंसल बिल्डर, सर्वोत्तम बिल्डर और बुलंदशहर प्राधिकरण से प्रभावित किसानों का धरना चल रहा है। सर्वोत्तम बिल्डर के खिलाफ रामगढ़ में धरनारत किसानों पर जानलेवा हमला हुआ लेकिन पुलिस ने उन किसानों पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया, जिनके ऊपर हमला हुआ। पुलिस पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने का आरोप है किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
किसानों का धरना देने का उद्देश्य  ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर वर्ष 2013 में किसानों और बुलंदशहर प्राधिकरण के बीच  समझौता हुआ था। उस समझौते के मुताबिक नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ग्रेटर नोएडा के किसानों को फायदा देना था, लेकिन बुलंदशहर प्राधिकरण के साथ सर्वोत्तम बिल्डर और अंसल बिल्डर ने किसानों के साथ धोखा किया नियमों के अनुसार उचित लाभ नहीं दिया जिसके कारण किसान रामगढ़ गांव की जमीन पर बैठकर 24 घंटे महीनो से धरना दे रहे हैं तथा अंसल बिल्डर के खिलाफ अब से लगभग 12 साल पहले भी धरना दिया  गया था। किसानों का आरोप है बिल्डर के लोगों ने किसानों के साथ मारपीट कर फर्जी मुकदमे दर्ज करा कर जेल भिजवा दिया इससे पुलिस प्रशासन की कार्यवाही पर  प्रसन्न चिन्ह लग रहा है ।
किसानों का  कहना है जब तक इंसाफ नहीं विरोध आंदोलन जारी रहेगा । इस मामले में पुलिस ने बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई न करके  पुलिस ने गलत तरीके से किसान वीर सिंह भाटी और राजू भाटी को गिरफ्तार कर  जेल भेज दिया।
 सवाल गंभीर है  बिल्डर और सरकार की मिलीभगत से किसानों की जायज मांगों को दबाया जा रहा है फर्जी मुकदमे दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है। बड़ा सवाल है क्यों  सरकार ऐसे बिल्डरों का लाइसेंस निरस्त नहीं करती  बिल्डरों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती। किसानो की आय दुगनी किसानों को खुशहाल बनाना किसानों के सभी जायज अधिकार एवं किसानों के बच्चों को रोजगार आदि बड़े-बड़े लुभाने वादे राजनीतिक पार्टियों द्वारा वोट लेने के लिए किए जाते हैं , लेकिन सत्ता में आने के बाद अन्नदाताओं को जायज मांगों  पर अपराधी मानते हैं। कहीं न कहीं किसान भी अंधभक्त होने  में लीन होकर जाति और धर्मवाद दारू की बोतल चंद रुपए मिठाई का डिब्बा सूट साड़ी झूठ और खोखले वादों पर अपने और बच्चों के भविष्य को दलदल में डाल देता है ।
नोएडा अथॉरिटी ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी यमुना प्राधिकरण लगातार किसानों का दमन कर रहा है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पर 3 महीने से ज्यादा किसानों ने 23 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना दिया लगभग 35 किसानों को धरने में शामिल  उन्हें जेल भेज दिया था। शाहदरा गांव में लगभग 3 महीने भूटानी बिल्डर एवं नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ सात सूत्रीय मांगों को लेकर धरना दिया यमुना प्राधिकरण के खिलाफ गांव सफीपुर के पास जीरो पॉइंट के नीचे महीना तक किसानों का धरना चला उसमें भी किसानों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए दनकौर सिलारपुर अंडरपास किसानों का महीना से ज्यादा धरना चला  वहां पर भी किसानों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर जेल भेजा गया। एनटीपीसी के खिलाफ किसानों का धरना कई महीने तक चला वहां पर भी किसानों के साथ पुलिस प्रशासन द्वारा मारपीट की गई और किसानों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए आदि मामले गौतम बुध नगर की पावन धरती पर किसानों के साथ सरकारों एवं बिल्डरों द्वारा दमनकारी नीति अपनाई गई।
 गांव घोड़ी बछेड़ा  एवं गांव भट्टा पारसोल प्रकरण इतिहास के पन्नों में दर्द हो गया 2013 मैं केंद्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून लागू कर किसानों के लिए लाभकारी कदम उठाए गए लेकिन वर्तमान सरकार दमनकारी नीति अपनाकर अन्नदाता को भी जाति धर्म में बांट रही है । किसानों के साथ जितने भी मुकदमे दर्ज किए गए उनमें शायद मुस्लिम कम्युनिटी का नहीं होगा तो किसके साथ में धोखा हो रहा है। यह गंभीर विषय है राजनीतिक लोगों द्वारा जय जवान जय किसान का फर्जी नारा दिया जाता है जबकि किसान देश की रीड है लेकिन देश में खून के आंसू रो रहा है देश आजाद होने के बाद  भी किसान दर-दर की ठोकर खा रहा है अच्छी उम्मीद के साथ वोट देकर सरकार बदलते हैं और सत्ता में बैठे लोग फर्जी नारा देते हैं की खुशहाल है किसान। लेकिन भारत देश महान मैं अपने हक अधिकार के लिए दर-दर की ठोकर खा रहा है। देश में लगभग 80% किसान बताए जाते हैं, इन सभी को अपने हक अधिकार के लिए जागना पड़ेगा। झूठ गुमराह नफरत को समझाना पड़ेगा मानवता किसे कहते हैं खोजना पड़ेगा। (जय हिंद) जय जवान जय किसान ।
लेखक:-चौधरी शौकत अली चेची राष्ट्रीय महासचिव
 भाकियू (बलराज) है।