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राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ , गौतमबुद्धनगर के तत्वाधान में स्वामी दयानंद सरस्वती के 200 जन्मवर्ष के उपलक्ष्य में गोष्ठी संपन्न

Vision Live/Greater Noida 
राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ , गौतमबुद्धनगर के तत्वाधान में स्वामी दयानंद सरस्वती के 200 जन्मवर्ष के उपलक्ष्य में जी ऐन आईटी , ग्रेटर नोएडा में एक गोष्ठी का आयोजन किया। जिसमे वेदपाल ने मुख्य वक्ता के रूप में स्वामी जी के जीवन और कार्यों  पर व्याख्यान दिया।  महर्षि दयानंद जी के जन्म से लेकर जीवन के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला, बचपन से  उनके अंदर छुपी धर्म और पूजा पाठ के प्रति  जिज्ञासा जिसमे शिवरात्रि के उपलक्ष्य में चूहों द्वारा प्रसाद के जूठा करने पर शिव जी द्वारा कुछ भी न करने और अपने परिवार के सदस्यों के असमय मृत्यु से मन में वैराग्य के भावना जगाने पर शिव के असली स्वरूप जानने के प्रति मूलशंकर के काशी जाने की इच्छा के बारे में बताया , संपन्न परिवार में जन्म होने के बाद भी उन्होंने ब्रह्मचर्य की दीक्षा लेने के उपरांत परिवार द्वारा इसके विरोध को भी झेलना पड़ा, आगे चलकर उनको स्वामी दयानंद के नाम से जाना गया , उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत धार्मिक स्थानों का भ्रमण किया जिसमे उनका अनेकाएक साधु संतो का सानिध्य मिला , और अपने लंबी यात्रा में शिव के न मिलने पर निराशा होने पर चर्चा किया। भविष्य में उन्होंने गुरु बिरजानंद जी से शिक्षा दीक्षा लिया और गुरु के दक्षिण स्वरूप उनके पढ़ाए हुए ग्रंथो का सार बनाने की सहमति के बारे में बताया, आगे चलकर गो हत्या के विरोध में हस्ताक्षर अभियान , उनके द्वारा विभिन्न शष्टर्थ और समाज  को प्रयाग में वेदों के शैली में लौटने के लिए कहने के बारे में बताया, भविष्य में राजा कर्ण सिंह से उनके मुलाकात और उनके भय के तिरस्कार और वेदों पर अनेकाएक शष्टार्थ करने के विषय को बताया, भविष्य में स्वामी जी काशी प्रवास और पाखंड के विरोध में उनके अभियान के विरोध कई दिनो तक योजना बद्ध वाद विवाद में उनको हारा हुआ और बहुत सारे अघातो के बारे में प्रकाश डाला, फिर स्वामी जी द्वारा मिर्जापुर में वेद पाठशाला शुरू करने तथा विभिन्न जगहों पर स्त्रियों पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में स्त्री शिक्षा पर किए।  अभियानों तथा वेद और शिक्षा पर सबके अधिकार की बात उठाई और जन्म और जाति के आधार पर भेदभाव को गलत ठहराया। कई बार स्वामी जी द्वारा अपने योग बल को दर्शाने का भी वृतांत सामने आया है, आगे चलकर स्वामी जी सत्यार्थ प्रकाश नामक एक ग्रंथ लिखा जिसमे सनातन और अन्य धर्मों के विचारो पर उन्होंने रचनागत किया, फिर स्वामी जी ने सभी वेदों का भाष्य लिखा और 1875 में आर्य समाज की स्थापना किया , भविष्य में स्वामी जी के प्रयास से शुद्धि आन्दोलन का श्री गणेश हुआ जिसमे धर्मांतरित हिंदू अपने समाज ने वापस आ सकते थे, स्वामी जी ने सभी हिंदू समाज को एक पहचान आर्य बताने , अंग्रेजो के शासन के खिलाफ उनके विचार समाज की बुराइयों को खत्म करने के उनके दृढ़संकल्प की बाटो को बताया, वेदपाल जी ने स्वामी जी को पूरे जीवन में कई बार प्राणघातक प्रयासों और विष देने की घटनाओं के बारे में विस्तृत से बताया और जीवन के अंत होने पर उनके इच्छा के अनुसार  दाह संस्कार किया और सभी को इसके अधिकार होने का समर्थन किया , वेदपाल जी ने स्वामी जी के हिंदू सनातनी पाखंड के विरोध करने और उनके बहुत सारे प्रयास  के बारे में बताया, अंत में उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के किए गए  कर्मो को हम सभी को अपने जीवन में अपनाने की बात कही और अपने चरित्र बल को सनातन में सर्वोपरि होने पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में मान महेंद्र जी ने मूर्ति में भगवान है लेकिन मूर्ति भगवान नही ऐसे स्वामी जी के विचार बताकर ब्रह्म यज की चर्चा किया, और स्वामी जी द्वारा पूरे हिंदू समाज को आर्य यानी श्रेष्ठ होने की बात पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में समाज के सज्जन शक्ति जिसमे मातृ शक्ति की भी अच्छी संख्या में उपस्थिति के साथ जी एन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के चेयरमैन  विशन लाल गुप्ता , विभाग संघ चालक सुशील , जिला संघचालक  नौरंग  और संघ के जिले तथा नगर इकाइयों के कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।