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चैत्र के नवरात्रि (व्रत), ईद उल फितर से पहले रमजान (व्रत), दुनिया में रहमत बरकत बरस रही है। अमन चयन तरक्की का पैगाम लेकर आए हैं

 

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चौधरी शौकत अली चेची


तरक्की के अनेकों संसाधन इंसान ने तैयार किए लेकिन नुकसान के रास्ते भी अनेकों शुरु किए समझते हैं आश्चर्यजनक बातों से लगभग 80% जनता जिम्मेदार।  हरित क्रांति के नाम पर देश में रासायनिक खेती की शुरूआत हुई और  हमारा पौष्टिक वर्धक शुद्ध भोजन विष युक्त कर दिया। स्वदेशी गाय का अमृत रूपी दूध छोड़कर जर्सी गाय का विषैला दूध पीना शुरु किया, भैंस बकरी भेड़ ऊंटनी का दूध लाभदायक नहीं समझा। भारतीयों ने दूध, दही, मक्खन, घी आदि छोड़कर शराब कबाब शबाब का इस्तेमाल शुरु कर दिए। हैंडपंप का पानी छोड़ बोतल का पानी इस्तेमाल, जमीन का वाटर लेवल वाला पानी छोड आरो फिल्टर पानी पर भरोसा, गन्ने का रस या नींबु पानी छोड़कर पेप्सी, कोका कोला कोल्ड्रिंग इस्तेमाल कर दिया, जिसमें 12 तरह के कैमिकल होते हैं और जो कैंसर, टीबी, हृदय घात आदि का कारण बनते हैं बगैर पत्ती गुड़ की चाय से अनेकों लाभ पत्ती वाली चाय से अनेकों रोग पैदा करती है, घानी का शुद्ध देशी तेल खाना छोड़, रिफाइंड आयल खाना शुरू किया, रिफाइंड ऑयल हृदय घात लीवर किडनी शुगर थायराइड आदि बीमारी का कारण बन रहा है। देश की युवा पीढी  नशे की लत बीडी, सिगरेट, गुटखा, गांजा, स्मैक इंजेक्शन आदि शुरू किया, जिससे से कैंसर जैसी आदि भयंकर बीमारी उत्पन्न होकर जागरूक देशवासियों की मानसिकता पर प्रश्नचिंह लगाकर सहनशीलता इंसानियत तरक्की सम्मानता मानवता संस्कृति समाज कानून सबको बैक फुट पर धकेल रहे है। लगभग 84 हजार नकली दवाओं का व्यापार  और नकली दवाओं के सेवन से लोग मर रहे हैं।! असली आयुर्वेद व देसी नुख्से को बिल्कुल भुला दिया। स्वदेशी भोजन 56 तरह के पकवान छोड़कर पीजा, बर्गर, जंक फूड खाना शुरू किया, जिससे अनेकों बीमारियों में इजाफा होता ही जा रहा है, घर से बाहर का खाना बना इस्तेमाल करता है,

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घर मैं बने सोचालय का इस्तेमाल कर बीमारी पैदा करता है, इंसान अपनी आधी कमाई को बीमारियों में बर्बाद कर रहा है। लोगों ने स्वस्थ दिनचर्या छोड़कर मनमानी दिनचर्या शुरू कर दी, रात भर जागना दिन में सोता है, सूर्य की रोशनी से दूर रहकर चौबीसों घंटे एसी की ठंडी हवा में रहना बदन से पसीना नहीं निकालना कपड़ों में विदेशी फैशन बदन और चेहरे को सुंदर रखने के लिए अनेक तरह के केमिकल का इस्तेमाल करना, भारतीय असल पहनावा अलन चलन आंचल समाप्त कर दिया।  एलुमिनियम के बर्तन, प्रेशर कुकर व घर में फ्रिज इस्तेमाल मिट्टी तांबा पीतल के बर्तन समाप्त कर दिए स्वस्थ रहने का विज्ञान छोड़कर शरीर के स्वास्थ्य सिद्धांतो के विपरीत कार्य हो रहा है। पुरातन भारतीय जीवन शैली को छोड़कर विदेशी जीवन शैली शुरू कर अपनी असल पहचान को भी मिटाया जा रहा है। युवा / युवतियां जीने की आजादी के नाम पर स्वेच्छाचारी बनकर आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए नासूर बनने का भी संदेश दे रहे। 

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 औलिया पैगंबर देवी देवता महापुरुष शूरवीर पवित्र धर्म ग्रंथों असल इतिहास तथा लेखों को नहीं जाना,  ना ही अपने बच्चों को उसका ज्ञान दिया, हमारे आदर्श सच्चे धर्म गुरु संत  महापुरुष नही है, बल्कि  संस्कारहीन स्वार्थी फ़िल्म अभिनेता राजनीतिक नेता TV  नाटक कलाकार हो गए। हमारे नुकसान के अनगिनत कारण हैं परंतु आज हम लोगों को सिर्फ कोरोना ही दिख रहा है या दिखाया जा रहा है। हमें समझना चाहिए लोग कैंसर, टीबी, हृदय घात, शुगर, किडनी फेल, हाई बीपी, लो बीपी, अस्थमा थायराइड, पीलिया, दिमागी टेंशन, ब्लड कैंसर आदि गंभीर बीमारियों से मर रहे हैं, घर परिवार उजड़ रहे हैं।  राम राम की जगह गुड मॉर्निंग हो गई, मम्मी पापा की जगह मॉम डैड हो गए, अपनापन के ख्वाब सपनों में ही रह गए,  मां बाप व कुनबा सगे संबंधी पड़ोसी पराए हो गए, ससुराल वाले और ससुराल वालों के रिश्तेदार सगे संबंधी अपने व प्यारे हो गए, जर जोरू जमीन के गंदे लालच से मां-बाप के अरमान आंसुओं में बह गए, क्यों डर और लालच में लगभग 70% मियां जी बीवी के गुलाम हो गए।

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 जीवन सफल बनाने के लिए एक दूसरे का सम्मान अपने बड़ों के अधिकार का पालन मां बाप की दुआएं अपने पूर्वजों की तरह अनुशासित और संयमित जीवन का पूर्ण आनंद लेने की सभी परंपराएं समाप्त सी होती जा रही है जो इन परंपराओं को बड़ों के आदर्शों को अपना कर चल रहा है वही सुखी जीवन जी रहा है।  जय जवान- जय किसान, जय हिंद, पूजा अर्चना, इबादत करने वाले करोड़ों  देश में नजर जरूर आते हैं, सच्चे सेवक, सच्चे भक्त अपना प्रचार नहीं करते है, मन से कौन कर रहा है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है ,ऊपर वाले को किसी ने नहीं देखा, लेकिन सच सब का हिसाब करने वाला मौजूद है, इंतजार और महसूस करने की जरूरत है। पुरानी कहावत है करनी का फल भोगना पड़ेगा, आज नहीं तो कल समझना पड़ेगा, लाल कुड़ी पर भी नहीं, छुपते सच्चाई अच्छाई तरक्की का रास्ता चलने वाले दूर से ही नजर आते हैं, बुराई की डोर पकड़ना आसान जरूर है, मगर बहुत जल्दी टूट भी जाती है, अच्छे लोगों की  कदर नहीं और बुरे लोगों को सबर नहीं, हजारों त्यौहार हर वर्ष हर्ष उल्लास के साथ मनाए जाते हैं, यह परंपराएं चलती रहेगी, चैत्र के नवरात्रि (व्रत), ईद उल फितर से पहले रमजान (व्रत), दुनिया में रहमत बरकत बरस रही है। अमन चयन तरक्की का पैगाम लेकर आए हैं, लेकिन इस पवित्र समय पर भी कुछ मूर्ख राक्षसी लोग अपनी लोकप्रियता और राजनीति तलाश रहे हैं,समझना तो सभी को पड़ेगा।

लेखकः. चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन( बलराज) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।