विकास पैदा हुआ है या नहीं, मोमबत्ती टॉर्च दीपक जलाने से भी नहीं दिखाई दे रहा है

 


भाजपा के 7 साल बेमिसाल कौन हुआ मालामाल? कौन हुआ बर्बाद? क्या देश 5 ट्रिलियन डॉलर बनने जा रहा है?

 


चुनाव सिर पर हैं तो जिन्ना, गन्ना, जालीदार टोपी, लाल टोपी, काली टोपी सुर्खियों में हैं, लेकिन भिन्न विचार देश की जनता लाचार भाजपा की ललकार 2022 में किसका होगा बेड़ा पार देखना समझना बाकी है

 




चौधरी शौकत अली चेची

भाजपा के 7 साल बेमिसाल कौन हुआ मालामाल? कौन हुआ बर्बाद? क्या देश 5 ट्रिलियन डॉलर बनने जा रहा है? विकास पैदा हुआ है या नहीं, मोमबत्ती टॉर्च दीपक जलाने से भी नहीं दिखाई दे रहा, देश नहीं मिटने दूंगा और देश नहीं झुकने दूंगा भाषणों कागजों में ही सिमट कर रह गया जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है? मोदी जी ने काफी सारे देशों की यात्राएँ करके, बड़े.बड़े विज्ञापन बड़ी बड़ी रैलियों से जनता के जमा टैक्स की रकम को खूब लुटाया। स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया सब के अच्छे दिन किसानों की आय दोगुनी, रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा मुहैया सबको कराना दूरबीन से भी नहीं दिख रहा है।  डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस, सीएनजी, पीएनजी, बिजली बिल, मोबाइल व टीवी रिचार्ज, किराया भाड़ा, हवाई यात्रा, खाद्य पदार्थ, आवश्यक वस्तुओं में बढ़ती महंगाई से उद्योगपतियों का विकास ही तो नजर आ रहा है।


नाकामियों को छुपाने के लिए 7 साल में 7 बार टीवी पर आकर घड़ियाली आंसू बहाए, ठोको नीति से हजारों घर परिवार उजड़ गए। कोरोनाकाल में पानी पर बहती लाशें, जानवर पंछी दुर्गति करते लाशों की, श्मशान में जलती चिता, चीख चीख कर कह रही थी, जिनके नहीं होते घर परिवार वह क्या जाने अत्याचार। किसी की कब अस्मत लूट जाए किसी की जान कब चली जाए किसी पर कानून का शिकंजा कब कस जाए? अंदाजा लगाना मुश्किल है। बहुसंख्यक ज्यादातर उच्च पदों पर हैं तो फिर भाजपा नजरों से हिंदू खतरे मैं क्यों दिखाई दे रहा है? देश में लगभग 98 प्रतिशत गैर मुस्लिम राजनीतिक पार्टियां हैं लगभग 135 करोड़ भारत की जनसंख्या बहुसंख्यक है जब कि लगभग 20 करोड  मुस्लिमों की जनसंख्या है। एक कम्युनिटी को टारगेट पर रखकर भाजपा सत्ता में आती है फिर भी हिंदू खतरे में है क्या जताना चाहते हैं। देश आजादी के बलिदान में मुस्लिमों ने मुख्य योगदान दिया। आजाद देश होने के बाद मुस्लिम जहां था, आज भी वहीं खड़ा है। अंध भक्तों को समझना चाहिए फकीर आदमी कौन है और थैला उठाकर कौन चल रहा है? बर्बाद कौन हो रहा है और सत्ता की कुर्सी किसकी खतरे में है? अर्थव्यवस्था की बात करें तो नए उद्योग लगे नहीं, पुराने बंद हो गए। लगभग 20 लाख करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास मोदी सरकार कर चुकी है, मुनाफा देने वाले सरकारी उपकरणों की कुर्की हो रही है या प्राइवेट में किया जा रहा है, नाम बदले जा रहे हैं। क्या विधायक और सांसदों को ठेके में देने की योजना बनाई जा रही है? अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल के दाम लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल है पेट्रोल लगभग 100 लीटर है, 2012 में क्रूड आयल रु140 बैरल था देश में पेट्रोल लगभग 70 लीटर था। डीजल पेट्रोल के बढ़े दाम से हर वस्तु के दाम बढ़ जाते हैं। फिल्म के गाने के अनुसार राम तेरी गंगा मैली हो गई पापियों के पाप धोते.धोते, कई सवाल खड़े करती है। संविधान में एससी एसटी, ओबीसी माईनॉरटी नाम दिया, लेकिन अब तो जाति धर्म की द्वेष भावना से देशवासियों को अलग.अलग बांटने की कोशिश की जा रही है। 35 श्रम कानूनों को खत्म कर दिया बाकी 9 बचे हैं। 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ढोल पीट कर लोगों को जुमला दे दिया, रोजगार के नाम से पेपर लीक हो जाते हैं। करीब 21000 करोड़ का ड्रग्स उद्योगपति

मित्र के एयरपोर्ट बंदरगाह पर अफगानिस्तान से आया हुआ पकड़ा गया
, खबर सुर्खियां नहीं बनी शाहरुख आर्यन की।  मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से धारा 370 और 35ं हटाया। लोगों को लगा था कि कश्मीर में शांति कायम हो जाएगी लेकिन अमन चैन तरक्की फेल हो गई। आतंकवादी गतिविधियां जोर पकड़ती जा रही है। मोदी सरकार के सारे वादे पूरे देश के साथ कश्मीर में भी जुमला साबित हो गए। सबसे ज्यादा कश्मीरी पंडितों का अपमान हो रहा है। 5 अगस्त 2019 से 31 अक्टूबर 2021 तक सरहद पार से छोटी बड़ी लगभग 500 आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें निर्दोष लोगों की जानें जा रही हैं तथा सेना के सैकड़ों जवान शहीद हो रहे हैं। किसानों की बात करें तो अगर किसान खेती छोड़ दे तो देश की हालत क्या होगी? विचार जरूर करना चाहिए वैसे भी 60 प्रतिशत किसान खेती छोड़ने पर मजबूर है, लेकिन दूसरा कोई कमाई का जरिया नहीं होने के अनुसार अन्नदाता देश की चिंता करता ही रहता है। डीजल, पेट्रोल, बिजली बिल, खाद, कीटनाशक, खरपतवार नाशक दवाई आदि में बेइंतहा वृद्धि होने के अनुसार किसान चारों तरफ से बर्बादी के दलदल में खड़ा है। किसान पशुओं से लगभग 35 प्रतिशत लाभ लेता था किसान और पशुओं में बहुत प्यार था लेकिन बीजेपी की नीति ने किसान और पशुओं को एक दूसरे का दुश्मन बना कर खड़ा कर दिया। सबसे ज्यादा किसानों व गायों की दुर्गति हो रही है। चुनाव सिर पर हैं तो जिन्ना, गन्ना, जालीदार टोपी, लाल टोपी, काली टोपी सुर्खियों में हैं, लेकिन भिन्न विचार देश की जनता लाचार भाजपा की ललकार 2022 में किसका होगा बेड़ा पार देखना समझना बाकी है।

लेखकः-चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन (बलराज) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं।