चला गया जो दुनिया से वह नहीं लौट कर आया निजी स्वार्थ की भूल भुलिया में एक इंसान को अवतार बनाया,ए मूर्ख इंसान समझ ठोकर लगने के बाद भी ऊपर वाले को ही दोषी बताया

 



 

जय जवान जय किसान, तिरंगा हम सब की  शान दुनिया में हम सबका भारत देश महान


 

चौधरी शौकत अली चेची

देशवासियों को विचार तो अवश्य करना चाहिए कि देश की जनता किस रास्ते की तरफ जा रही है, सत्ता पक्ष, गोदी मीडिया, अंधभक्त यानी सब अपनी धुन में लीन हैं। बारीकी से समंदर में गोता अगर लगाया जाए तो अंधेरा ही अंधेरा नजर आता है। जाति धर्म द्वेष भावना की राजनीति अपने पूरे शबाब पर चल रही है। निजी स्वार्थ में लोकप्रियता और पावर सच्चाई में ठोकर मार कर इतिहास की भूली बिसरी घिनौनी दास्तां को बयान करती आगे बढ़ रही है। जीएसटी और कई प्रकार के टैक्स देश की जनता देती है, जिसके खर्चे से सरकार चलती हैं। सत्ता में बैठे लोग अपने मन माने तरीके से भ्रम फैलाकर जनता को बाध्य कर देते हैं और झूठ, गुमराह नफरत की पोटली बांध कर कानून के फायदे गिनाते हैं। साथ ही चंद लोगों को और खुद को लाभ पहुंचाते हैं। वोट देकर सत्ता में बैठाने वाली जनता को मूर्ख बना कर मन ही मन मुस्कुराते हैं। मीडिया व सरकार की विश्वसनीयता  देश विदेश में धूमिल होती जा रही है, लेकिन सोशल मीडिया सच्चाई उजागर कर सत्ता पक्ष व गोदी मीडिया के लिए सरदर्द बना हुआ है। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास अच्छे दिन सभी तो बर्बादी की तरफ जाते हुए नजर आ रहे हैं। हिंदू, मुसलमान और हिंदुस्तान पाकिस्तान अब अफगानिस्तान, पिछले 7 सालों से यह शब्द सुर्खियां बनते चला आ रहे हैं। चीन, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल बांग्लादेश मौके बेमौके गुर्रा जाते हैं मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब क्यों मुंहतोड जवाब देते हैं। चुनाव से पहले आदरणीय नरेंद्र मोदी खूब कहते फिरते थे कि 56 इंची सीना होना चाहिए अब आखिर कहां है 56 इंची सीना का वो जुमला? रोजगार की बात की जाए तो कोरोना से लॉकडाउन में ज्यादतार की नौकरी गई और जिनकी बची रही सैलरी आधी रह गई। शिक्षा, चिकित्सा, किराया भाड़ा में काफी महंगाई हो गई। इंसान की जरुरत की हर आवश्यक वस्तु काफी महंगी हो चुकी है। जायज हक की आवाज उठाना अपराध बन गया है अब। सरकारी संस्था संपत्ति लगातार प्राइवेट की जा रही है, संस्थाओं के नाम बदले जा रहे हैं। क्या यही है सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास नारा या फिर यह भी जुमला ही साबित हो गया है। न्याय के लिए इंसान सड़कों तथा सरकारी दफ्तरों सुविधा केंद्रों में चिल्ला रहे हैं या चक्कर काट रहे हैं। वहीं अपनी लोकप्रियता चमकाने के लिए चुनिंदा लोग डिबेट का हिस्सा बनकर एक दूसरे को बैक फुट पर धकेल ने की कोशिश कर रहे है।ं वही गोदी मीडिया सरकार का गुणगान करने में लगा हुआ है,पहले मीडिया का धर्म होता था कि विपक्ष की आवाज का सरकार के बीच जाकर बुलंद करना मगर अब गोदी मीडिया सरकार की आवाज कां जनता और विपक्ष के बीच बुलंद करने में कोई कसर बाकी नही छोड रहा है। जायज या नाजायज काम बगैर रिश्वत दिए नहीं होते है। काम का स्तर देखकर रिश्वत ली जाती है या दी जाती है। पुलिस में हर छोटी शिकायत करने पर गरीब मजदूर असहाय इंसान को पुलिस तुरंत एक्शन में आकर संगीन धारा में मुकदमे दर्ज कर जेल भेज देती है या मोटी रकम वसूल कर मामले को उलझा देती है। पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता है, रोड पर चलती गाड़ी या खड़ी का फोटो खींचकर चालान कर दिया जाता है जिस का जुर्माना अनजान इंसान को भरना ही पड़ता है वैसे यह तो बहुत पहले से चलता आ रहा है मगर अब इससे चंद लोग मालामाल होते जा रहे हैं। आम इंसान गरीबी और परेशानी की दलदल में फंसता ही जा रहा है। इंसान दर्द होने पर चिल्लाता है, आराम मिलने के बाद भूल भुलिया की वादियों में खो जाता है । वोट देते समय जाति धर्म विशेष का बनकर तथा छोटे से निजी स्वार्थ में अपनी बर्बादी खुद ही पैदा करता है और दोषी नेताओं को मानता है या ऊपर वाले को जबकि ऊपर वाले ने इंसान को सब कुछ दिया और संदेश दिया कर्म ही फल है हर समस्या का हल है। किसानों की बात की जाए तो पहले कहा गया कि किसानों की आय दुगनी हो जाएगी। लेकिन अब किसानों की लागत दुगनी व इनकम आधी रह गई है  पिछले लगभग 10 महीने से पूरे देश में किसान तीन कृषि बिलों के खिलाफ तथा अपने माल की कीमत और लागत बकाया का भुगतान हो की मांग पर अड़े हुए हैं। 700 से ज्यादा धरने में अन्नदाता शहीद हो गए लेकिन अन्नदाता को अपराधी मानकर गलत शब्दों से अपमानित किया जा रहा है। मुगल शासन में हाथियों से, अंग्रेजी शासन में घोड़ों से और अब भाजपा शासन में गाड़ियों से अन्नदाता किसानों को कुचला जा रहा है, संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जा रहे हैं या गोलियों से मारा जा रहा है।  हरियाणा और अब लखीमपुर खीरी की घटना इसका जीता जागता उदाहरण है। इतिहास तो सभी के लिखे जाते हैं। मगर जिनको अपने घर परिवार के बारे में जानकारी नहीं होती वह हजारों साल पुराने इतिहास की गाथा को सुनाते है।ं बहरहाल यह खेल निजी स्वार्थ पैसा और पावर के लिए होता है सत्ता तो आनी जानी है। पवित्र धर्म ग्रंथों के लेखों को मिटाया या झूठलाया नहीं जा सकता है। कानून व इतिहास में परिवर्तन अवश्य किया जा सकता है, मगर अच्छाई और बुराई पूरी तरह से नष्ट नहीं हो सकती कम या ज्यादा हो सकती है। इंसान किस रास्ते को चुनता है उस की मानसिकता और जिम्मेदारी होती है। ठोकर लगने पर भी नहीं समझने वाला इंसान बुद्धिमान नहीं हो सकता। कर्म के लिखे को मिटाया नहीं जा सकता। ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती। किसी भी इंसान की अच्छाई बुराई का जिक्र किसी ना किसी मोड़ पर होता रहता है। समझना यह भी होगा ऊपर वाले ने एक लाख 84 हजार योनियां बनाई और इंसान को सबसे श्रेष्ठ बनाया सब की भलाई के लिए, लेकिन इंसान पृथ्वी पर सबसे बड़ा अपराधी दिखाई देता है। चला गया जो दुनिया से वह नहीं लौट कर आया निजी स्वार्थ की भूल भुलिया में एक इंसान को अवतार बनाया,ए मूर्ख इंसान समझ ठोकर लगने के बाद भी ऊपर वाले को ही दोषी बताया। जय जवान जय किसान, तिरंगा हम सब की  शान दुनिया में हम सबका भारत देश महान।

लेखकः- चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन (बलराज) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं।