अनुअल कंपोजिट फीस को लेकर उच्च न्यायालय मे डाली गई जनहित याचिका पर 5 जुलाई को होनी थी, सुनवाई

 




विजन लाइव/गौतमबुद्धनगर

गौतमबुद्धनगर पेरेंट्स वेल्फेयर सोसाइटी  के संस्थापक की उच्च न्यायालय मे डाली गई जनहित याचिका पर सुनवाई 5 जुलाई को जस्टिस संजय यादव व जस्टिस प्रकाश पांड्या की बेंच द्वारा की जानी थी, परंतु समय अभाव के कारण सुनवाई नही हो सकी। यह जानकारी उन्हें देर रात उनके अधिवक्ता अर्चित मेहरोत्रा ने दी है।  गौतमबुद्धनगर पेरेंट्स वेल्फेयर सोसाइटी  के संस्थापक  मनोज कटारिया ने बताया कि ट्यूशन फीस, अनुअल चार्ज एवं अन्य मदों पर लिए जाने वाले शुल्क को एक साथ मिलाकर स्कूल फीस रेगुलेशन एक्ट के अनुसार अनुअल कंपोजिट फीस बना दी गई थी, जिससे अभिभावकों को अपने नुकसान के साथ.साथ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष जब अभिभावक स्कूल से शिक्षकों को वेतन देने के लिये सिर्फ ट्यूशन फीस  लगभग 70 प्रतिशत लेने की बात कहते थे, उस समय अधिकांश स्कूल यह कहकर उनकी बात अस्वीकार कर देते थे कि सरकार ने अनुअल कंपोजिट फीस बना दी है तो अब ट्यूशन फीस को अलग करके बताना मुश्किल है। अभिभावकों को इंकम.टैक्स रिटर्न में छूट के लिए ट्यूशन फीस की रसीद की आवश्यकता होती है जो अब कंपोजिट फीस के कारण मुश्किलें खड़ी हो रही थी तथा अभिभावकों को कंपोजिट फीस में यह तय करना मुश्किल हो रहा था कि किस मद में स्कूल उनसे कितनी फीस वसूल कर रहा है।