आओ हम सब मिलकर संकल्प लें  प्रकृति को बचाना है, जीवन खुशहाल बनाना हैं

 



श्रीमती गीता भाटी

---------------------जीवन में अगर पाना है उत्कर्ष रूप तो पर्यावण रक्षा के लिए करना होगा संघर्ष। आज के समय में पेड़ लगाओ से अधिक जोर देना होगा कि हर देश का हर नागरिक पौधा बचाए, सिर्फ एक पौधा लगाकर ही हमारी ज़िम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। तब तक उस पौधे को हम वृक्ष का रूप धारण न करा दें, एक सच्चा नागरिक वही असलियत में वृक्षरूपित कहलाता है। जब उसके द्वारा लगाया गया पौधा वृक्ष का रूप ले लेता है, जिस प्रकार एक मां का कर्त्तव्य सिर्फ संतान को जन्म देना तक ही समाप्त नहीं होता बल्कि पालन  पोषण कर उस बच्चे को पूरा जीवन रूप दिया जाता है। एक मां .बाप अपने बच्चे की पूरी ज़िम्मेदारी लगातार बहुत वर्षों तक निभाते हैं। कर्तव्यों का पालन करते हैं और उसे एक मानव रूप देते हैं,ठीक उसी प्रकार से जब भी हम कोई पौधा रोपित करें तो प्रण लें उस समय उस पौधे के साथ भी एक अभिभावक की तरह एक कर्तव्यनिष्ठ नागरिक की भूमिका आते हुए हम सब मिलकर हर पौधे को बचाएं और अपनी धरती मां को सुरक्षित करें। पर्यावण के साथ खिलवाड़ करके, प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर आज सांस लेना तक दूभर होता जा रहा है और इससे इंसान गर्त में जा चुका है, जीवन दुर्भर हो गया है। जहां ना पेड़,. पौधे हैं, न पक्षी हैं, ना हरियाली है वहां का हर एक जीवन एक बोझ के रूप में जिंदगी जी रहा है।  आवश्यकता है एक मज़बूत विचारधारणा की, कि चाहे वृक्षारोपण कम हो पर जितना हो वो एक पुरे कर्तव्यनिष्ठता के साथ उसका पालन  पोषण हो, अपने आस . पास खाली स्थानों पर, कूड़ा . करकट वाली जगह साफ करके वहां हम सभी को पौधे लगाने चाहिए उनकी सुरक्षा करनी चाहिए अगर हमें अपना जीवन निरोगी स्वस्थ और खुशहाल जीना है तो संघर्ष तो हमें पर्यावरण बचाने के लिए करना ही होगा। प्रत्येक इंसान को होश में आना है पर्यावरण  का सम्मान करना है। एक और ज़िम्मेदारी भी आज के समय में हम सभी की बनती है कि जो आस .पास कुछ लोग आज भी अनभिज्ञ हैं, जानकारी का अभाव है, सोशल मीडिया से दूर हैं आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण उनके पास किसी भी संदेशो से जुड़ने के साधन नहीं हैं ऐसे व्यक्तियों को हम जागरूक करें, पर्यावरण का महत्त्व, उपयोगिता, लाभों,सुरक्षा व पर्यावरण के प्रति उनके प्रति उनके कर्तव्यों के लिए जागरूक करें और अभियानों से जोड़ें।  पर्यावरण कितना आवश्यक है जीवन में, हमारी प्रकृति जो धरती . मां का श्रंगार है हमारी सुरक्षा का कवच है उसी प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते. करते इंसान खुद स्वयं उसकी चपेट में आ गया। शिकार खुद हुआ अपने ही द्वारा प्रकृति पर किए गए अत्याचारों से, हर जीवन प्रभावित हुआ कोरोनाकाल में, सांसे महंगी पड़ गई और जीवन चला गया, इंसान प्रकृति से वर्षों  से रहा दूर तो प्रकृति ने भी इंसान को ही इंसान से कर दिया एक दिन दूर, यही है मंजर प्रकृति का जो देखने को आज मिल रहा है और हर जीवन प्रभावित हो रहा है। अपनी सुख . सुविधाओं के लिए स्वयं इंसान ने प्रदूषण फैलाया है, धरती .मां का चीर . हरण किया है उसका रूप सामने आ गया है। आज भी अगर चेतना न आयी तो प्रकृति के प्रचण्ड प्रकोप को हर इंसान को सहना होगा, अभी भी समय है हम सब मिलकर प्रकृति प्रेमी बनें, जागरूकता फ़ैलाए,प्रेरणा .स्रोत बनें और अपने जीवन के हर दिन को पर्यावरण दिवस के रूप में मानें और प्रतिदिन अपनी कार्य प्रणाली में प्रकृति की सुरक्षा को भी  अहम् भूमिका दें, अपना जीवन व आने वाली पीढ़ियों का जीवन सुरक्षित तथा खुशहाल बनाएं। आओ हम सब मिलकर संकल्प लें  प्रकृति को बचाना है, जीवन खुशहाल बनाना हैं।

लेखिकाः-श्रीमती गीता भाटी प्रधानाध्यापिका बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश, जिला-गौतमबुद्धनगर से, राज्य पुरस्कार प्राप्त हैं।