विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष

श्रीमती गीता भाटी

------------------------इस आधुनिक युग में योग मनुष्य के जीवन का  आधार ही बन चुका है। जहां आज पूरी दुनिया कोरोना काल में एक विषम परिस्थिति का सामना कर रही है, दिन रात जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही है, उस मोड पर आज ये  साबित हो  गया है कि योग एक रामबाण स्तम्भ है और  इंसान के जीवन में आधार है, ये उसकी जिंदगी का। आज अगर इंसान को निरोग रहना है, बीमारियों से छुटकारा पाना है, तो योग को हमें अपनी और दूसरों की जिंदगी से हर हाल में जोड़ना होगा और निर्माण करना होगा एक स्वस्थ समाज का। यूं तो योग सदियों से चला आ रहा है परंतु हम उसे अपनी जीवन शैली में कितना प्रयोग कर रहे हैं? लागू कर रहे हैं यह सब एक सोचनीय पहलू हैं। आज के समय में योग करना हर परिवार के प्रत्येक सदस्य की ज़िम्मेदारी बन गई है। अगर हम नियमित रूप से इसका पालन करेंगे तो शायद बहुत हद तक अपने आप को सुरक्षित व स्वस्थ रख पाएंगे। हम जैसे प्रत्येक कार्य को अपनी दैनिक दिनचर्या में महत्त्वूर्णता देते हैं, उसे करना जरूरी मानते हैं ठीक उसी प्रकार से हमें अपने जीवन के हर दिन के दैनिक कार्यों में सबसे पहले और महत्वपूर्ण कर्त्तव्य के साथ योग को जीवन शैली में अपनाना होगा, अपने आप स्वंय को जागरूक करना होगा। हर इंसान को शुरआत अपने आप से करनी होगी, तभी दुनिया का हर इंसान निरोग और सुखमय जीवन प्रसन्नता के साथ व्यतीत कर पाएगा। योग पर ही हमारा जीवन टिका है एक योग ही हज़ारों बीमारियों का व निरोगी काया का मूलाधार है, तो आओ हम सब मिलकर संकल्प लें कि जब तक जीवन जीना है हमें प्रीतिदिन योग करना है।

         लेखकः-श्रीमती गीता भाटी प्रधानाध्यापिका बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश, जिला-गौतमबुद्धनगर से, राज्य पुरस्कार प्राप्त हैं।