एसडीएम गौतमबुद्धनगर ने मामले की जांच किए जाने के आदेश तहसीलदार सदर गौतमबुद्धनगर और एसएचओ दनकौर को दिए

 





एसडीएम के आदेशः-क्या रास्ता बंद है? सार्वजनिक रास्ते के संबंध में आख्या दें?




विजन लाइव/दनकौर

दनकौर स्थित बाबा गुरू द्रोणाचार्य परिक्रमा मार्ग को चालू कराए जाने की गुहार एसडीएम सदर गौतमबुद्धनगर से लगाई गई है। एसडीएम सदर गौतमबुद्धनगर ने मामले की जांच किए जाने के आदेश तहसीलदार सदर गौतमबुद्धनगर और एसएचओ दनकौर को दिए गए हैं। तहसीलदार सदर गौतमबुद्धनगर ने राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को जांच कर आख्या देने के लिए आदेशित किया है। राधेश्याम पुत्र श्री इंद्रजीत निवासी तुलसी नगर, बाईपास रोड, स्नेहा गार्डन के पीछे, श्री बाबा गुरू द्रोणाचार्य परिक्रमा मार्ग दनकौर, निकट भूमिया बाबा मंदिर, दनकौर, तहसील व जिला गौतमबुद्धनगर ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) गौतमबुद्धनगर को लिखे पत्र में अवगत कराया है कि घर का रास्ता जेसीबी से खुदवा कर बंद कर दिया गया है। इस सार्वजनिक रास्ते पर किसी का व्यक्तिगत अधिकार नही है। पत्र में शिकायतकर्ता राधेश्याम ने अपर जिलाधिकारी को यह भी अवगत कराया है कि जब उसने रास्ते बंद किए जाने का विरोध किया तो दबंग लोगों ने न केवल गाली गलौंच की बल्कि जान से मारने तक की धमकियां दीं। जान माल के खतरे को देखते हुए तत्काल ही पुलिस को 112 पर भी सूचित कर दिया गया।, किंतु जब तक पुलिस मौके पर पहुंची तब तक रास्ता पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया था। तत्पश्चात प्रार्थी की ओर से उक्त रात्रि को ही डीएम गौतमबुद्धनगर और एडीएम गौतमबुद्धनगर को दूरभाष पर पूरे मामले से अवगत करा दिया गया था। किंतु अभी तक न तो मामले में कोई ठोस कार्यवाही की गई है और न ही रास्ते को खुलवाया गया है। पत्र मेंं शिकायतकर्ता राधेश्याम ने अपर जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर से मांग की है कि आम रास्ते को खुलवा कर बंद करने वाले आरोपी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कराने की कृपा करें। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) गौतमबुद्धनगर के निर्देश पर एसडीएम सदर गौतमबुद्धनगर ने इस पत्र का संज्ञान लिया है। एसडीएम सदर गौतमबुद्धनगर ने तहसीलदार सदर और एसएचओ दनकौर को आदेश दिए हैं कि क्या रास्ता बंद है? सार्वजनिक रास्ते के संबंध में आख्या दें। तहसीलदार सदर गौतमबुद्धनगर ने एसडीएम के आदेश पर राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को आदेशित किया है कि जांच कर मामले की आख्या दें। शिकायतकर्ता राधेश्याम ने आरोप लगाया है कि राजस्व निरीक्षक और लेखपाल जान बूझ कर मामले की जांच कर आख्या देने में देरी कर रहे हैं और जिससे ज्यादा दिक्कते पैदा हो रही है।