अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरा देश पूछ रहा है कि क्या यही अच्छे दिन है?

 



 

पहले नोटबंदी, फिर जी.एस.टी. और कोराना ने दीवाला ही निकाल दिया। अब उपर से डीजल,पेट्रोल, रसोई गैस और बिजली बिल के दाम आसमान छू रहे हैं

 




चौधरी शौकत अली चेची


-------------------------------अर्थव्यवस्था डांवाडोल होने से नौकरियां जा रही हैं और वहीं लोगों के रोजगार ठप्प हो रहे हैं। मगर मंहगाई डायन खाए जात है। जिस मंहगाई डायन खाए जात है के जुमले को लेकर भाजपा की सरकार केंद्र में आई थी । अब भाजपा सरकार मंहगाई डायन खाए जात है के जुमलों के बीच घिरने लगी है। पहले नोटबंदी, फिर जी.एस.टी. और कोराना ने दीवाला ही निकाल दिया। अब उपर से डीजल,पेट्रोल, रसोई गैस और बिजली बिल के दाम आसमान छू रहे हैं। पेट्रोल प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी के बल्ले से शतक लागने के लिए खूब उछल कूद कर रहा है। बात यही तक नही थमती है कि अब तो ट्यूबेल में बिजली के बिल, रेल किराया, गुड्स किराया, पैसेंजर किराया आदि आसमान छू रहे हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरा देश पूछ रहा है कि क्या यही अच्छे दिन है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तो इन सब चीजों की ओर से मौन साधे हुए हैं। भाजपा जब विपक्ष में थी तो गैस सिलेंडर को सिर पर रखकर तथा प्याज मिर्च भिंडी लौकी आदि को गले का हार बना खूब लेकर आंदोलन किए थे। कांग्रेस ने किसी को देशद्रोही नहीं कहा लेकिन भाजपा की नाकामियों को उजागर करना अब देशद्रोही कहलाता है। भारत की बहुत सी आर्थिक समस्याओं में महंगाई की समस्या एक मुख्य है। वर्तमान समय में महंगाई की समस्या अत्यन्त विकराल रूप धारण कर चुकी है। एक दर से बढ़ने वाली महंगाई तो आम जनता किसी न किसी तरह से सह लेती है, लेकिन कुछ समय से खाद्यान्नों और कई उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्यों में भारी वृद्धि ने एक तरह से चित्त कर दिया है। वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि का क्रम इतना तीव्र है कि आप जब किसी वस्तु को दोबारा खरीदने जाते हैं, तो वस्तु का मूल्य पहले से अधिक हो चुका होता है।


कीमतों में वृद्धि एक दहशतकारी मोड़ ले रही है। कारण मनुष्य की समाज में उन्नत जीवन जीने की इच्छा एक दिवास्वप्न हो गई है। कालाधन, जमाखोरी, राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार, गरीबी, जनसंख्य अल्पविकास, राष्ट्रीयकृत उद्योगों में घाटा, सरकारी कुव्यवस्था, रुपये का अवमूल्यन, मुद्रास्फीति इत्यादि ऐसे कारक हें जो निरन्तर महंगाई को बढ़ाए जा रहे हैं। महंगाई के कारण असंतोष बढ़ रहा है हर वर्ग के लोग त्रस्त हैं । बढ़ती महंगाई अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को प्रभावित कर प्रत्येक वस्तु के मूल्य एवं किराए बढ़ रहे हैं। सरकार ने कृषि की घोर उपेक्षा की है, काले कानून लेकर अन्नदाता आंदोलित है। जब तक सरकार वर्तमान् पर कायम रहेगी, मुद्रस्फीति बढ़ेगी और आम आदमी का जीवन दूभर होता रहेगा। वृद्धि का सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। सरकारी नीतियों की विफलता ने मंहगाई में वृद्धि की है। जब तक इन सभी विसंगतिर्यो को दूर नहीं किया जा सकता तब तक महंगाई कम नहीं हो सकती। पेट्रोल 100 रुपये के पार पहुंचने पर राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा कि पेट्रोल पम्प पर गाड़ी में तेल डालते समय जब आपकी नज़र तेज़ी से बढ़ते मीटर पर पड़े, तब ये ज़रूर याद रखिएगा कि कच्चे तेल का दाम बढ़ा नहीं, बल्कि कम हुआ है।् देश में पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है। कुछ जगहों पर पेट्रोल और डीजल के दाम 100 रुपये लीटर के पार भी पहुंच गए हैं। वहीं तेल की बढ़ती कीमतों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में कहा है कि तेजी से बढ़ती महंगाई और घरेलू सामान एवं हर आवश्यक वस्तु की कीमत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने चुनौतियों को और अधिक गंभीर बना दिया है। दुख इस बात का है कि संकट के इस समय में भी भारत सरकार लोगों के कष्ट व पीड़ा दूर करने की बजाय उनकी तकलीफ बढ़ाकर मुनाफाखोरी कर रही है। ईंधन के दाम इस समय ऐतिहासिक रूप से अधिकतम ऊंचाई पर हैं,जो पूरी तरह अव्यवहारिक हैं।

लेखकः. चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ( बलराज) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।