दीप सिद्धू को इस करतूत की सजा कब मिलेगी पता नही? पुलिस दीप सिद्धू को अभी तक तलाश तक नही पाई

 




सच्चाई की आवाज उठाने वाला देशद्रोही व संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हो रहा है, क्या देश में अंग्रेजी शासन चल रहा है?

 


चौधरी शौकत अली चेची

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अन्नदाता भारत की पावन धरती पर सबसे बड़ा देशभक्त है। जय जवान, जय किसान, हिंदू- मुस्लिम- सिक्ख- ईसाई आपस में है भाई भाई। पूर्वजों के इन नारों को तार-तार कर समाज को बांटने वाली ताकतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 7 सालों में  करीब 1700 ऐसे कानून बनाए हैं जिनसे आम जनता का दूर दूर तक वास्ता नही है और न ही देश के नागरिकों का कोई भला होने वाला है। हां पूंजीपति मित्रों का जरूर भला हो रहा हैं। तीन कृषि बिल भी पूंजीपति मित्रांं को लाभ पहुंचाने के लिए लाए गए हैं। किसान चीख चीख कर कह रहा है कि ये तीन काले कानून नही चाहिए मगर सरकार गूंगी बहरी बनी हुई है। जागरूक किसान, बुद्धिजीवी और विपक्षी पार्टियों ने विरोध किया। दिल्ली बॉर्डर तक बड़ी मशक्कत के साथ पहुंच कर कृषि बिल की बारीकियों को बुद्धिजीवियों ने समझाया। भाजपा सरकार ने अपना प्रोपेगेंडा खूब चलाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 26 जनवरी ट्रैक्टर परेड शायद किसानों की बड़ी भूल थी, भाजपा के षड्यंत्र को समझ नहीं पाए। आखिर दीप सिद्धू पन्नू आदि के द्वारा अन्नदाता की पीठ में छुरा घोंप दिया। बताया जा रहा है कि दीप सिद्धू की भाजपा से गहरी जुगलबंदी रही है। सोशल मीडिया पर दीप सिद्धू के फोटो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ वायरल हो रहे हैं। इससे इस जुगलबंदी की पोल खुलती हुई साफ नजर आ रही है। ट्रैक्टर परेड की बात करें तो दिल्ली पुलिस, केंद्र के अधीन आती है। सहमति से रोडमैप तैयार किया गया। 90 प्रतिशत किसान कानून का पालन कर ट्रैक्टर परेड में शामिल थे। यह भी सत्य है कि इन किसानों में से 10 प्रतिशत ऐसे भी थे भाजपा मोहरा, किसान बनकर अपना काम कर रहे थे। आखिर हुआ भी यही और सच्चाई की आवाज उठाने वाले अन्नदाता को बदनाम कर दिया गया। लाल किला भारत की सिरमौर है और जहां परिंदा भी पर नही मार सकता। 26 जनवरी के दिन तो लाल किले की सुरक्षा इतना पुख्ता होती है कि बगैर पुलिस प्रशासन के कोई हिल तक नही सकता। फिर इस अभेद सुरक्षा के किले में किस प्रकार सेंध लग गई और जहां हर वर्ष 15 अगस्त को प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं कैसे यह उपद्रवी पहुंचे गए। सवाल खडा होता है कि दिल्ली के रास्तों की किसानों को जानकारी नहीं होती, तो फिर लगभग 730 बजे दीप सिद्धू हजारों लोगों के साथ कैसे पहुंचा। खास बात यह भी है कि निशान साहिब का झंडा एक समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सिर पर भी बांधा था, ये निशान साहिब का झंडा सिक्खों के धर्म से संबंधित है। दीप सिद्धू की इस करतूत की सजा कब मिलेगी पता नही? पुलिस दीप सिद्धू को अभी तक तलाश तक नही पाई हैं। वहीं आंदोनलरत किसानों पर उकसाने और भडकानें के आदि की धाराओं पर मुकदमें दर्ज किए गए हैं। 26 जनवरी-2021 के दिन हुई शर्मनाक घटना की आड में किसान नेताओं की गिरफ्तारी और आंदोलन को खत्म करने तथा कुचलने की नापाक कोशिशें की जा रही हैं। ऐसी किसी घटना को आंदोलन से जोड़ना ठीक नही है। दर्द उसी के होता है जिसे चोट लगती है। टिकैत के आंसू देश के किसानों को विपक्षी पार्टियों को दिखाई देंगे या नहीं अंदाजा लगाना मुश्किल है मगर सच्चाई यह है, अन्नदाता खून के आंसू रो रहा है। अन्नदाता सिर्फ खेत खलिहान को ही नही पालता है बल्कि परोपकारी, हिम्मतवाला, ईमानदार और खून पसीने की खाने और कमाने वाला है। किसान देश के सभी जीवो, इंसानों का पेट भर भोजन देता है साथ ही देश की लगभग 70 प्रतिशत आर्थिक व्यवस्था को अपने कंधों पर उठाए हुए है। एक माचिस भी बाजार में बिकती है तो किसान उस पर भी टैक्स सरकार को देता है। किसान अपने माल का गारंटी कानून मांग कर कौन सा गुनाह कर रहा है। धरने पर बैठे लगभग 175 किसान शहीद हो गए हैं।  टैक्टर परेड में कई नौजवान किसान शहीद हुए, जो लाठियां गोलियां खाईं।ं सच्चाई की आवाज उठाने वाला देशद्रोही व संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हो रहा है, क्या देश में अंग्रेजी शासन चल रहा है? किसानों की दुगनी आए करने का कोई फार्मूला किसी के पास नहीं है लेकिन किसानों का हक मिल जाए वह सभी सरकारों के पास है। नफरत की आंधियों ने पहाड़ों को उजाड़ दिय। अन्नदाताओं की सच्चाई का दर्द महसूस होकर किस-किस को प्रेरित करेगा हक मांगना जुर्म नहीं भाजपा सरकार में जुर्म की कोई कमी नहीं। जय हिंद, जय भारतवासी, नहीं है यह बात जरा सी, मूर्ख लोगों को किसानों के आंदोलन पर आ रही है हंसी।

लेखकः. चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ( बलराज) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।