केंद्र सरकार ने दबाव में कानून वापस लिया तो इंडियन किसान यूनियन बिल के समर्थन में आंदोलन शुरू कर देगीः चौधरी रामकुमार वालिया

 


इंडियन किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रामकुमार वालिया की वालिया नोएडा में बिल के समर्थन में पत्रकार वार्ता

 


विजन लाइव/गौतमबुद्धनगर

कृषि अध्यादेशांं को लेकर कई सप्ताह से सरकार के खिलाफ किसान ंसंगठन दिल्ली और  सीमा पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों की सरकार से कई दौर की बात हो चुकी है और वार्ता चल भी रही है। किसान संगठन कृषि अध्यादेशों की पूर्ण रूप से वापसी से कम पर तैयार नही दिखाई दे रहे हैं वहीं सरकार की ओर से इन कानूनों को वापस न लिए जाने के संकेत दिए गए हैं। सरकार किसानों से कह रही है कि हर शंका के लिए खुले मन से चर्चा के लिए तैयार हैं। इसी बीच अब कुछ संगठन इन कानूनों के समर्थन में भी आगे आ रहे हैं। इसी तरह इंडियन किसान यूनियन भी कृषि अध्यादेशों के समर्थन में खुल कर आगे आया है। इंडियन किसान यूनियन ने साफ किया है कि भारत के किसानों के जीवन में संपनता लाने वाला है, नया कृषि कानून। यदि केंद्र सरकार ने दबाव में कानून वापस लिया तो इंडियन किसान यूनियन बिल के समर्थन में आंदोलन शुरू कर देगी। इंडियन किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी रामकुमार वालिया ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नया कृषि कानून भारत के किसानों के जीवन में संपनता लाने वाला है। इसीलिए भारत के किसानों को आंदोलन का रास्ता छोड़कर अपने संदेह को सरकार से बात करके दूर करने चाहिए। श्री वालिया आज नोएडा में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने दबाव में कानून वापस लिया तो इंडीयन किसान यूनियन बिल के समर्थन में आंदोलन शुरू कर देगी। श्री वालिया ने कहा कि इसी मुद्दे पर देश के सभी किसानों के प्रतिनिधियों की एक सभा दिनांक 28 दिसंबर 2020 को समय 12 बजे दिन में पूसा भवन राजेन्द्र पैलेस नई दिल्ली में आहूत की गई है, जिसमे किसानों के सभी प्रतिनिधि भागेदारी कर अपना अपना पक्ष राखेंगे। इस बैठक में देश के कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर भी भागेदारी करेंगे। श्री वालिया ने किसानों के प्रतिनिधियों से इस बैठक में भागेदारी करने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि हमारा संगठन इंडियन किसान यूनियन, किसानों की लड़ाई लड़ने वाला एक संगठन है। इस संगठन के माध्यम से हम काफी समय से किसानों के उत्थान के कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि नए कृषि कानून से किसानों को अपनी फसलों को बेचने में जो दलाली तथा भुगतान लेने में कठिनाई आ रही थीं अब समाप्त हो चुकी हैं, वही उसकी फसलों का प्रचार प्रसार भी होगा। बड़ी बड़ी कंपनियों के साथ किसानों के संबंध स्थापित होंगे तथा उन्हें अपनी फसलों का अधिक से अधिक दाम भी मिल पाएगा। इन पूरे कानूनों को हमने तथा हमारे संगठन के विद्वान किसानों ने पढ़ा तथा उसका विश्लेषण किया है।