अपनी डफली अपना राग, कौन कहां खड़ा है और किसकी भागम भाग सत्ता के गलियारों में कौन सो रहा है कौन 

रहा है जाग?

 





महिलाओं के खिलाफ अपराध में यूपी नंबर वन राज्य
?


 

चौधरी शौकत अली चेची


यूपी सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाते आंकड़े ये बंया कर रहे हैं कि हाथरस में एक दलित बेटी के साथ जो जघन्य अपराध हुआ है और प्रशासन की लापरवाही की वजह से निर्दोष बेटी की हत्या हो गई। रीति रिवाज के अनुसार  शव का दाह संस्कार  नहीं किया गया। पुलिस प्रशासन ने शव को रात के अंधेरे में चोरो छिपे जला दिया। इतना सब होने पर भी हाथरस में 6 साल की बच्ची के साथ रेप हुआ और उसकी मौत हो गई। इसका विरोध क्यों नहीं होना चाहिए, बेटी बचाओ बेटी ,पढ़ाओ का नारा देने वाली सत्ता में बैठी सरकार हवाई बातें कर रही है। मृतक बेटी को और बेटी के परिवार वालों को न्याय तथा दोषियों को सख्त सजा देने की मांग क्यों नहीं करनी चाहिए? विपक्षी पार्टियां, सामाजिक संगठन मीडिया आदि का पीड़ित के साथ सहयोग करना दोषियों को सजा और निर्दोषों को न्याय दिलाने की मांग करना कानूनी हक है, जो भारत के संविधान ने सभी को दिया है। सच की आवाज को दबाना, शासन, प्रशासन और सरकार का तानाशाही रवैया ठीक नहीं है। किसान मसीहा स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पोते राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी व साथी कार्यकर्ताओं पर बगैर कसूर के पुलिस प्रशासन ने


लाठीचार्ज किया तथा मुकदमा दर्ज किया है। सरकार को समझना होगा कि जयंत चौधरी पर मुकदमा दर्ज नहीं किया बल्कि देश के किसानों पर मुकदमा दर्ज किया है। किसानों का अपमान किया है, मृतक बेटी और बेटी के परिवार का अपमान किया है। जयंत चौधरी किसान हमदर्द पार्टी के शांति प्रिय नेता हैं। सरकार को समझना चाहिए निर्भया केस जब हुआ था पूरे देश में विरोध धरना प्रदर्शन आंदोलन हुए थे। निर्भया बेटी के परिवार वालों से सभी विपक्षी नेताओं व मीडिया का मिलना जुलना बरकरार रहा। लेकिन किसी पर लाठी चार्ज मुकदमा नहीं लिखा गया। ऐसा प्रतीत होता है कि बीजेपी सरकार अंग्रेजी शासन चला रही है। हाथरस की बेटी को न्याय मिले और दोषियों को सख्त सजा मिले, आरएलडी सपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, आजाद समाज सभी पार्टियों के नेताओं ने हाथरस के विषय में मांग उठाई। इस मामले में लाठीचार्ज व मुकदमा दर्ज करने वाले पुलिस प्रशासन कर्मियों को बर्खास्त किया जाए। साथ ही दर्ज मुकदमा वापस लिए जाएं। इसके साथ ही यूपी सरकार को बर्खास्त किया जाए, झूठ की  पोटली को लेकर चलना विपक्षी पार्टियों की आवाज को दबाना, सहनशीलता, इंसानियत, मान मर्यादा और  भारतीय संस्कृति,संविधान  इन सब का  अपमान करने की श्रेणी मे क्यों नहीं होना चाहिए?  27 जून 2017 से अब तक योगी सरकार में क्राइम का ग्राफ तेजी से बढा है। आंकडों पर नजर डाली जाए तो अनुमानित लूट  25 प्रतिशत, बलात्कार 45 .94 प्रतिशत, हत्या 40. 85 प्रतिशत, दहेज हत्या 7.11 प्रतिशत, डकैती 14.95 प्रतिशत, फिरौती अपहरण 54.45 प्रतिशत, सांप्रदायिक दंगे  तनाव 417 प्रतिशत तक पहुंच रहे हैं। यही नहीं अगस्त 2020 में 11 से 12 रेप केस हर दिन दर्ज हुए। एनसीआरबी के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध में यूपी नंबर वन राज्य हुआ। इसके अलावा कितने ही मामले ऐसे होते हैं जो सामाजिक तौर पर या किसी डर से या अन्य कारणों से पुलिस प्रशासन में दर्ज नहीं किए जाते। इन आंकड़ों की सत्यता को गहराई से समझना जरूरी है योगी जी राम राज्य की दुहाई देते चले आ रहे हैं अगर इन आंकड़ों में सत्यता है तो वादे इरादे आश्चर्य में डाल रहे हैं, जो हम सबके लिए अच्छा संदेश संकेत नहीं है। अपनी डफली अपना राग, कौन कहां खड़ा है और किसकी भागम भाग सत्ता के गलियारों में कौन सो रहा है कौन रहा है जाग?

लेखकः- चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ( बलराज  ) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।