साधना सिन्हा

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 वह दिन दूर नहीं जब हमारी 25 प्रतिशत आबादी कोरोना के चपेट में होगी। यह बात साफतौर पर नजर आ रही है कि शायद हम इससे बचने के उपाय पर अपना ध्यान नहीं दे रहे हैं। टेस्टिंग कम  होने से एवं देर से कोरोनावायरस का पता चलना भी इसके बढ़ते भयानक कदम को रोक नहीं पा रहा है। कुछ मौतें भी शायद इसी देरी के कारण हो जाती है। हमारा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का कमजोर होना एवं हेल्थ वर्कर्स पर अत्याधिक दबाव भी मौत को बढ़ावा देता है। हमारे इकोनामिक कंडीशन को देखते हुए यह जरूरी है कि हम अपने कार्यों को बंद नहीं कर सकते। अतः अब समय आ गया है कि वॉलिंटियर्स और सामाजिक संस्थाएं इसमें पूरा सहयोग करें। इससे बचने के उपायों का जोर शोर से प्रचार एवं प्रसार करें साथ ही लोगों के टेस्टिंग एवं अस्पतालों से भी समन्वय बनाने का काम करें, ताकि शुरुआती स्टेज में ही कोरोनावायरस की जानकारी हो, जिससे पेशेंट का इलाज शीघ्रातीशीघ्र हो सके। अस्पतालों में भी जो हेल्थ वर्कर्स एवं अन्य स्टाफ की कमी हो रही है, उसकी भी पूर्ति की जा सके। ऐसे बहुत से लोग हैं जो मानवता की सेवा के लिए स्वेच्छा से आगे आएंगे और इसे एक चैलेंज समझते हुए एवं अपना मानव धर्म समझते हूए इस पर विजय प्राप्त करेंगे। केंद्र सरकार, राज्य सरकारे एवं स्थानीय प्रशासन से मेरा निवेदन है कि ऐसे लोगों को मान्यता एवं मानदेय,आर्थिक मद्द प्रदान करें। साथ ही इंश्योरेंस की व्यवस्था भी उनके लिए करें। अगर आप भी मेरे  विचारों से  सहमत हैं तो कृपया इस पोस्ट को आगे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि इस तरह की आवाज उठकर ऊपर आए।

 लेखिकाः-समाज सेविका हैं और साथ ही महिला शक्ति सामाजिक समिति ग्रेटर नोएडा की अध्यक्ष भी हैं।