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शबरी की भक्ति, राम-हनुमान मिलन और बाली वध की लीला ने मोहा मन, अशोक वाटिका में माता सीता से मिले बजरंगबली

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा में आयोजित श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव-2026 में आठवें दिन भगवान श्रीराम की वन यात्रा, माता शबरी की अनन्य भक्ति, प्रभु श्रीराम और हनुमान जी का मिलन, सुग्रीव से मित्रता, बाली वध तथा माता सीता की खोज से जुड़े अद्भुत प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। श्रद्धा, भक्ति और रोमांच से परिपूर्ण इन लीलाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान श्रीराम और माता सीता के जयकारों से पूरा रामलीला परिसर गूंज उठा।
परम श्रद्धेय गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन तथा संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी के मार्गदर्शन में आयोजित रामलीला में कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
माता शबरी की भक्ति ने दिया प्रेम और समर्पण का संदेश
संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी ने बताया कि माता सीता के हरण के बाद भगवान श्रीराम और भैया लक्ष्मण उनकी खोज में वन-वन भटकते हैं। इसी क्रम में दोनों भाई माता शबरी के आश्रम पहुंचते हैं। माता शबरी की अनन्य भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रसंग दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।
माता शबरी का चरित्र यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति में सामाजिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं होता, बल्कि भगवान के प्रति निर्मल प्रेम और अटूट विश्वास ही सर्वोपरि है। माता शबरी भगवान श्रीराम को किष्किंधा पर्वत की ओर जाने और सुग्रीव से सहायता प्राप्त करने का मार्ग बताती हैं। इसके बाद प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण किष्किंधा की ओर प्रस्थान करते हैं।
प्रभु श्रीराम और हनुमान जी का हुआ दिव्य मिलन
किष्किंधा के निकट पहुंचने पर हनुमान जी ब्राह्मण का वेश धारण कर दोनों भाइयों के पास आते हैं और उनके परिचय के बारे में जानने का प्रयास करते हैं। इसके बाद प्रभु श्रीराम और उनके अनन्य भक्त हनुमान जी का ऐतिहासिक मिलन होता है। यह प्रसंग भक्ति, विश्वास और प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण का अनुपम उदाहरण है।
हनुमान जी भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को सुग्रीव के पास ले जाते हैं। सुग्रीव अपने बड़े भाई बाली के अत्याचारों से पीड़ित होते हैं। भगवान श्रीराम सुग्रीव की सहायता करते हुए बाली का वध करते हैं और सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य प्राप्त होता है। इसके बाद सुग्रीव के नेतृत्व में वानर सेना माता सीता की खोज के लिए विभिन्न दिशाओं में प्रस्थान करती है।
जामवंत ने हनुमान जी को कराया उनकी शक्ति का स्मरण
माता सीता की खोज करते हुए हनुमान जी और वानर सेना दक्षिण दिशा में समुद्र तट तक पहुंचते हैं। विशाल समुद्र को पार करने की चुनौती के सामने जब सभी चिंतित होते हैं, तब जामवंत जी हनुमान जी को उनकी असीम शक्ति और सामर्थ्य का स्मरण कराते हैं।
जामवंत जी के प्रेरणादायी वचनों से उत्साहित होकर हनुमान जी लंका की ओर विशाल छलांग लगाते हैं। मार्ग में सुरसा उनकी परीक्षा लेती हैं। लंका में प्रवेश के समय हनुमान जी का लंकिनी से सामना होता है। इसके बाद वह माता सीता की खोज में लंका के विभिन्न स्थानों पर पहुंचते हैं।
अशोक वाटिका में माता सीता से मिले बजरंगबली
लंका में खोज के दौरान हनुमान जी को एक ऐसी कुटिया दिखाई देती है, जिस पर भगवान श्रीराम का नाम अंकित होता है। यह कुटिया विभीषण की होती है। विभीषण से माता सीता के अशोक वाटिका में होने की जानकारी मिलने पर हनुमान जी वहां पहुंचते हैं।
अशोक वाटिका में माता सीता को देखकर हनुमान जी भगवान श्रीराम की मुद्रिका उन्हें सौंपते हैं। मुद्रिका को पहचानकर माता सीता को प्रभु श्रीराम का संदेश प्राप्त होता है। यह भावुक प्रसंग दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। माता सीता और हनुमान जी के संवाद के माध्यम से कलाकारों ने विश्वास, आशा और प्रभु के प्रति अटूट निष्ठा का संदेश दिया।
जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा रामलीला परिसर
रामलीला के दौरान प्रस्तुत किए गए सभी प्रसंगों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों की भावपूर्ण अदाकारी और प्रभावशाली मंचन के बीच दर्शक श्रद्धा और उत्साह से झूम उठे। पूरे परिसर में जय श्रीराम और माता सीता के जयकारे गूंजते रहे।
रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, मर्यादा, त्याग, मित्रता, भक्ति और धर्म के आदर्शों से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।
आगामी लीलाओं में लंका दहन और राम-रावण युद्ध रहेंगे मुख्य आकर्षण
श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव के अंतर्गत आज 19 अक्टूबर को लंका दहन, सेतु निर्माण तथा रावण-अंगद संवाद का मंचन किया जाएगा। इसके बाद लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध तथा भगवान श्रीराम और कुंभकर्ण एवं रावण के बीच युद्ध से जुड़े रोमांचक प्रसंग दर्शकों के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे।
आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष का दशहरा महोत्सव और रामलीला मंचन क्षेत्रवासियों के लिए आनंददायक, यादगार और भावी पीढ़ियों को संस्कारित करने वाला आयोजन बन रहा है।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव-2026 में विभिन्न दिनों में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री जयप्रकाश छावड़ी, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र सिंह नागर, भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजवीर सिंह और न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही।
संस्था के पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक राजकुमार नागर, प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, धीरज शर्मा, बालकिशन सफीपुर, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, अध्यक्ष आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, सत्यवीर मुखिया, रोशनी सिंह, महेश कमांडो, चैन पाल प्रधान, जितेंद्र भाटी, सुभाष भाटी, मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी अतुल आनंद, उपाध्यक्ष फिरे प्रधान, पी.पी. शर्मा, श्याम सुंदर फौजी, यशपाल नागर, सचिव ज्योति सिंह, गीता शागर, राकेश भाटी, भगवत भाटी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, पवन भाटी, वीरपाल मावी और जय शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।


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