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बोड़ाकी MMT&H प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट में फिर सुनवाई 16 सितंबर को, 1,687 परिवारों के प्रभावित होने का किसानों का दावा


भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई सुनवाई; केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए मांगा गया समय
मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’ / ग्रेटर नोएडा
Vision Live News / Special Story 
बोड़ाकी में प्रस्तावित मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMT&H) प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है। परियोजना से प्रभावित किसानों की ओर से दाखिल याचिका पर 2 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की पीठ के समक्ष हुई।
सुनवाई के दौरान रेल मंत्रालय, भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है।
किसानों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर उठाए कई सवाल
बोड़ाकी निवासी किसान एवं अधिवक्ता बलराज भाटी तथा अन्य किसानों की ओर से दाखिल याचिका में MMT&H परियोजना के लिए की जा रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।
किसानों के अनुसार, परियोजना के लिए दादरी तहसील क्षेत्र के बोड़ाकी, पल्ला, पाली, कटेहरा, दादरी, तिलपता और रामगढ़ गांवों की कुल लगभग 47.38 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। किसानों का दावा है कि इस प्रक्रिया से लगभग 1,687 परिवारों के रिहायशी मकान भी प्रभावित हो रहे हैं।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपर जिलाधिकारी (भूमि अर्जन), गौतम बुद्ध नगर के स्तर से किए जाने की बात याचिकाकर्ताओं ने कही है।
20A के बाद 20E के प्रकाशन को लेकर किसानों की आपत्ति
किसानों का कहना है कि रेलवे अधिनियम, 1989 एवं संशोधन अधिनियम, 2008 की धारा 20A के तहत भूमि अधिग्रहण संबंधी गजट का प्रकाशन 28 जून 2025 को किया गया था। इसके बाद प्रभावित किसानों ने अधिग्रहण के विरुद्ध अपनी आपत्तियां दाखिल की थीं।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, लगभग 150 किसानों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिनकी सुनवाई अपर जिलाधिकारी (भूमि अर्जन), गौतम बुद्ध नगर के समक्ष 8 सितंबर 2025 को हुई। किसानों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया गया और न ही उन्हें निस्तारण आदेश उपलब्ध कराया गया। इसके बावजूद 23 जून 2026 को रेलवे अधिनियम की धारा 20E के तहत गजट प्रकाशित कर दिया गया।
किसानों का कहना है कि इसी कारण प्रभावित परिवारों में अपने मकानों और भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई।
SIA सर्वे को लेकर हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता आदर्श भूषण ने सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष किसानों की ओर से कई कानूनी बिंदु रखे।
किसानों की ओर से दलील दी गई कि परियोजना से सात गांवों के लगभग 1,687 परिवार प्रभावित हो रहे हैं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में Social Impact Assessment (SIA) सर्वे नहीं कराया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि रेलवे अधिनियम के तहत लागू पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन संबंधी प्रावधानों के अनुसार, निर्धारित संख्या से अधिक परिवारों के प्रभावित होने की स्थिति में सामाजिक प्रभाव आकलन की आवश्यकता बनती है।
इसके अलावा किसानों की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि R&R Administrator तथा R&R Commissioner की नियुक्ति निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप हुई है या नहीं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एसडीएम दादरी को बिना उचित अधिसूचना के R&R Administrator तथा R&R Commissioner की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार और रेलवे की ओर से याचिका की पोषणीयता पर सवाल
वहीं, सुनवाई के दौरान रेल मंत्रालय एवं उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने किसानों की याचिका की maintainability पर सवाल उठाते हुए कहा कि धारा 20A के गजट के प्रकाशन के एक माह के भीतर आपत्ति दाखिल नहीं की गई।
सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि रेलवे अधिनियम के तहत होने वाले भूमि अधिग्रहण में नए भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 तथा उससे संबंधित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्रावधानों और रेलवे की संबंधित नीति के अनुसार SIA सर्वे को इस मामले में अनिवार्य नहीं माना जाता।
हालांकि, इस मामले में सरकार और रेल मंत्रालय की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल किया जाना अभी बाकी है।
RTI के जरिए मांगी जानकारी, किसानों का दावा—नहीं मिला संतोषजनक जवाब
याचिकाकर्ता बलराज भाटी के अनुसार, उन्होंने RTI के माध्यम से जिला प्रशासन से किसानों की आपत्तियों के निस्तारण आदेश, रिहायशी मकानों की शिफ्टिंग से संबंधित नीति तथा R&R नीति से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां मांगी थीं।
किसानों का आरोप है कि उन्हें इन बिंदुओं पर कोई स्पष्ट लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रभावित ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी, गौतम बुद्ध नगर से भी कई बार मुलाकात कर अपनी आशंकाएं और समस्याएं बताने की बात कही गई है।
अब 16 सितंबर पर टिकी किसानों की नजर
बोड़ाकी MMT&H परियोजना को लेकर अब अगली महत्वपूर्ण तारीख 16 सितंबर 2026 बन गई है। इस दिन केंद्र सरकार, रेल मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की ओर से अदालत के समक्ष अपना जवाब रखने की उम्मीद है।
मामले का केंद्र अब केवल भूमि अधिग्रहण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि किसानों की आपत्तियों का निस्तारण, रिहायशी मकानों पर प्रभाव, R&R प्रक्रिया और SIA सर्वे की आवश्यकता जैसे कानूनी सवाल भी हाईकोर्ट के सामने हैं।
फिलहाल हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के लिए अगली तारीख निर्धारित कर दी है। 16 सितंबर की सुनवाई यह स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है कि किसानों द्वारा उठाए गए कानूनी सवालों पर अदालत का रुख क्या रहता है।
किसान पक्ष का कहना
किसान बलराज भाटी एडवोकेट का कहना है कि प्रभावित परिवारों को उनके घर, जमीन, पुनर्वास और भविष्य को लेकर स्पष्ट एवं कानूनी रूप से पारदर्शी जानकारी मिलनी चाहिए। किसानों ने इसी उद्देश्य से न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
नोट: इस रिपोर्ट में किसानों और उनके अधिवक्ता द्वारा अदालत में रखी गई दलीलों तथा सरकार/रेल मंत्रालय की ओर से सुनवाई के दौरान बताए गए पक्ष को संबंधित पक्षों के कथन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मामले में अंतिम न्यायिक निर्णय अभी लंबित है।




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