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दनकौर के ऐतिहासिक श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेले में गूंजे कुश्ती के जयकारे, भोली पहलवान जुनेदपुर ने जीती सबसे बड़ी कुश्ती


103 वें श्री कृष्णा जन्मोत्सव मेले में देशभर के नामचीन पहलवानों ने दिखाया दमखम, हजारों दर्शकों ने तालियों से बढ़ाया खिलाड़ियों का उत्साह
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर 
दनकौर की ऐतिहासिक धरती पर रविवार को उस समय कुश्ती के रोमांच और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब श्री द्रोण गौशाला समिति (रजि.) के तत्वावधान में आयोजित 103वें श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेले में विशाल कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। अखाड़े में उतरे नामचीन पहलवानों ने अपने शानदार दांव-पेच, ताकत और कुश्ती कौशल से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। मुकाबलों के दौरान अखाड़े के चारों ओर मौजूद हजारों दर्शक लगातार तालियां और जयकारे लगाकर पहलवानों का हौसला बढ़ाते रहे।
दंगल का शुभारंभ नगर पंचायत दनकौर के प्रतिनिधि दीपक सिंह ने फीता काटकर किया। इसके साथ ही अखाड़े में पहलवानों के बीच रोमांचक मुकाबलों का सिलसिला शुरू हुआ। अलग-अलग भार वर्ग और श्रेणियों में हुए मुकाबलों में पहलवानों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
भोली पहलवान जुनेदपुर ने मारी बाजी, सबसे बड़ी कुश्ती अपने नाम की
दंगल का सबसे बड़ा आकर्षण रही मुख्य एवं सबसे बड़ी इनामी कुश्ती, जिसमें भोली पहलवान, जुनेदपुर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। अखाड़े में भोली पहलवान के दांव-पेच और दमदार प्रदर्शन ने दर्शकों को खासा रोमांचित किया।
मुकाबले के दौरान हर दांव के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया और निर्णायक क्षण में भोली पहलवान ने बाजी अपने पक्ष में कर ली। जीत के बाद अखाड़े के आसपास मौजूद दर्शकों ने तालियों, जयकारों और उत्साहपूर्ण नारों के साथ उनका जोरदार अभिनंदन किया।
भोली पहलवान की इस शानदार जीत ने 103वें श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेले के कुश्ती दंगल को विशेष पहचान दिलाई। उनकी जीत को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक अखाड़े के आसपास जुटे रहे।
इनामी कुश्तियों ने बढ़ाया रोमांच
दंगल में पहलवानों के उत्साह को बढ़ाने के लिए कई प्रमुख इनामी कुश्तियों का आयोजन किया गया। प्रथम कुश्ती के विजेता को 11,000 रुपये, द्वितीय कुश्ती के विजेता को 5,100 रुपये तथा तृतीय कुश्ती के विजेता को 4,100 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
इसके अलावा अन्य मुकाबलों में विजेता पहलवानों के लिए 3,100 रुपये और 2,100 रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई। पुरस्कार राशि और प्रतिष्ठित मुकाबलों के चलते पहलवानों में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
103 वर्षों की परंपरा में आज भी कायम है कुश्ती का आकर्षण
श्री द्रोण गौशाला समिति (रजि.) के प्रबंधक रजनीकान्त अग्रवाल ने कहा कि दनकौर का श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेला अपनी 103 वर्षों की गौरवशाली और ऐतिहासिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। कुश्ती दंगल इस मेले का प्रमुख आकर्षण रहा है और यह आयोजन भारतीय पारंपरिक कुश्ती एवं ग्रामीण खेल संस्कृति को मजबूती प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में भी ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी पारंपरिक खेल विरासत से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। अखाड़े की परंपरा केवल खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, मेहनत, आत्मविश्वास और संघर्ष की भावना का प्रतीक है।
दंगल में उमड़ा जनसैलाब
कुश्ती मुकाबलों को देखने के लिए दनकौर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अखाड़े में जैसे-जैसे मुकाबले आगे बढ़ते गए, दर्शकों का उत्साह भी बढ़ता गया। किसी पहलवान के शानदार दांव पर तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती तो किसी रोमांचक मुकाबले के दौरान दर्शक जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान कर देते।
नगर पंचायत दनकौर के प्रतिनिधि दीपक सिंह ने आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेला दनकौर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने दंगल में भाग लेने वाले सभी पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
समिति पदाधिकारियों और गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी
दंगल के अवसर पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष राकेश कुमार गर्ग, मोहित कुमार गर्ग, प्रबंधक रजनीकान्त अग्रवाल, सदस्य सुशील कुमार मांगलिक, संजय गोयल, मनीष सिंघल, मनोज त्यागी, सांसद प्रतिनिधि सोनू वर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री (क्रीड़ा) प्रसाद महानकर, ललित, डॉ. अम्बुज गर्ग, भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय महामंत्री पवन खटाना, राजे प्रधान (नवादा), ध्रुव गोयल सहित दनकौर नगर पंचायत के सभासदगण मौजूद रहे।
आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। हजारों दर्शकों ने पूरे उत्साह के साथ कुश्ती मुकाबलों का आनंद लिया और अखाड़े में उतरे पहलवानों का मनोबल बढ़ाया।
परंपरा, संस्कृति और खेल का संगम बना दंगल
103वें श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेले का यह कुश्ती दंगल केवल मुकाबलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दनकौर की ऐतिहासिक परंपरा, ग्रामीण खेल संस्कृति और सामाजिक एकजुटता की तस्वीर भी पेश की। आधुनिकता के दौर में भी अखाड़े के प्रति लोगों का यह उत्साह बताता है कि भारतीय पारंपरिक कुश्ती आज भी जनमानस के बीच अपनी मजबूत जगह बनाए हुए है।
दंगल के समापन पर समिति की ओर से आयोजन में सहयोग करने वाले सभी पदाधिकारियों, सदस्यों, स्थानीय नागरिकों और कुश्ती प्रेमियों का आभार व्यक्त किया गया।


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