BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम में फिजियोथेरेपी की अहम भूमिका

विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर Faith Physiotherapy & Rehab Centre ने नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति लोगों को किया जागरूक
रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास- “दनकौरी”
Vision Live News / ग्रेटर नोएडा
 विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर मंगलवार को फिजियोथेरेपी, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को लेकर लोगों को जागरूक किया गया। Faith Physiotherapy & Rehab Centre, A Unit of Vision Health and Education Foundation की ओर से आयोजित जागरूकता पहल में विशेष रूप से हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन तथा पुनर्वास में फिजियोथेरेपी की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
इस वर्ष विश्व फिजियोथेरेपी दिवस की थीम “हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन और पुनर्वास में फिजियोथेरेपी एवं शारीरिक गतिविधि की भूमिका” रखी गई है। इसी विषय को केंद्र में रखते हुए लोगों को समझाया गया कि नियमित और सुरक्षित शारीरिक गतिविधि को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर स्वास्थ्य संबंधी कई जोखिमों को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
फिजियोथेरेपी केवल दर्द और चोट के उपचार तक सीमित नहीं
केंद्र के संचालक एवं निदेशक डॉ. अजय कुमार (PT), BPT, MPT (Neurology) ने कहा कि फिजियोथेरेपी को केवल दर्द, चोट या मांसपेशियों की समस्या के उपचार तक सीमित समझना उचित नहीं है। आधुनिक फिजियोथेरेपी का दायरा काफी व्यापक है और इसमें शारीरिक सक्रियता बढ़ाने, व्यायाम क्षमता में सुधार करने तथा विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के बाद व्यक्ति को उसकी सामान्य कार्यक्षमता की ओर लौटाने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से स्ट्रोक के बाद मरीजों को शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, चलने-फिरने में परेशानी, संतुलन संबंधी समस्या और दैनिक गतिविधियां करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में व्यवस्थित फिजियोथेरेपी और न्यूरो-रिहैबिलिटेशन मरीज की गतिशीलता, संतुलन और कार्यक्षमता में सुधार की दिशा में सहायक हो सकते हैं।
व्यक्ति की क्षमता के अनुसार हो व्यायाम कार्यक्रम
डॉ. अजय कुमार ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और शारीरिक क्षमता अलग होती है। इसलिए व्यायाम या शारीरिक गतिविधि का कार्यक्रम भी व्यक्ति की आवश्यकता और क्षमता के अनुसार होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “शारीरिक रूप से सक्रिय रहना स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और क्षमता के अनुसार सुरक्षित एवं व्यक्तिगत व्यायाम कार्यक्रम अपनाना चाहिए।”
उन्होंने लोगों से अपील की कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें और अपनी दैनिक दिनचर्या में नियमित शारीरिक गतिविधियों को शामिल करें। वहीं, किसी बीमारी, चोट अथवा स्ट्रोक के बाद बिना विशेषज्ञ सलाह के कठिन व्यायाम करने के बजाय प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार पुनर्वास कार्यक्रम अपनाया जाए।
स्ट्रोक के बाद रिहैबिलिटेशन की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि स्ट्रोक के बाद पुनर्वास एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें मरीज की स्थिति के अनुसार उसकी गतिशीलता, संतुलन और दैनिक कार्यों को बेहतर बनाने पर काम किया जाता है। फिजियोथेरेपी के माध्यम से मरीज की शारीरिक क्षमता के अनुरूप पुनर्वास योजना तैयार की जा सकती है।
World Physiotherapy के अनुसार भी फिजियोथेरेपिस्ट व्यक्ति की क्षमता और लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए exercise programme तैयार करने तथा शारीरिक गतिविधि को सुरक्षित तरीके से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों और टीम की रही मौजूदगी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डॉ. अमित, डॉ. हसन, डॉ. मुन्नी मिश्रा, राज कुमार और निक्की सहित अन्य लोग मौजूद रहे। उपस्थित विशेषज्ञों और टीम सदस्यों ने लोगों को शारीरिक सक्रियता, फिजियोथेरेपी तथा पुनर्वास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के प्रति जागरूक किया।
स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में जागरूकता जरूरी
Faith Physiotherapy & Rehab Centre, जो Vision Health and Education Foundation की एक इकाई है, फिजियोथेरेपी एवं रिहैबिलिटेशन के माध्यम से लोगों को बेहतर mobility, functional recovery और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस का संदेश केवल बीमारी के बाद उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को समय रहते शारीरिक रूप से सक्रिय रहने और अपनी स्वास्थ्य क्षमता को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रेरित करना भी है।
संदेश स्पष्ट है—
“सक्रिय रहें, स्वस्थ रहें और बेहतर जीवन की ओर बढ़ें।”

.header-ads img { height:300px !important; max-height:300px !important; width:150% !important; object-fit:cover; }