BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

सेवा से संकल्प तक—जन-जन के द्वार पहुँचेगा राष्ट्रसेवा का संदेश


सेवा-संस्कार, युवा शक्ति और मातृशक्ति के समन्वय से राष्ट्र निर्माण की ओर बढ़ता सार्थक संकल्प
“नर सेवा ही नारायण सेवा है।”
भारतीय संस्कृति में सेवा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने की ऐसी महान परंपरा है, जिसमें व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण को प्राथमिकता देता है। सेवा की भावना व्यक्ति को संवेदनशील बनाती है, समाज को जोड़ती है और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है। जब सेवा केवल किसी अवसर विशेष का कार्यक्रम न रहकर जीवन का संस्कार बन जाती है, तब उसका प्रभाव व्यापक सामाजिक परिवर्तन के रूप में दिखाई देता है।
इसी विचार और भावना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी गौतमबुद्धनगर द्वारा ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत जिला कार्यालय, तिलपता चौक पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव मुख्य अतिथि रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने की।
कार्यशाला में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम के दौरान सेवा कार्यों को संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के साथ-साथ समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्ग तक पहुंच बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
सेवा जब संस्कार बन जाए, तब बदलता है समाज
सेवा का वास्तविक अर्थ केवल किसी व्यक्ति को आर्थिक सहायता देना नहीं है। किसी जरूरतमंद की समस्या सुनना, पीड़ित व्यक्ति के साथ खड़ा होना, पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना, बुजुर्गों और असहाय लोगों की मदद करना तथा सामाजिक समस्याओं के समाधान में अपनी भूमिका निभाना भी सेवा के महत्वपूर्ण स्वरूप हैं।
कहा जाता है कि “जहाँ चाह, वहाँ राह।” लेकिन राष्ट्रसेवा की राह केवल इच्छा से नहीं बनती। इसके लिए निरंतर प्रयास, अनुशासन, संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।
कार्यशाला में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि समाज परिवर्तन केवल बड़े-बड़े नारों और आयोजनों से नहीं होता। वास्तविक परिवर्तन छोटे-छोटे सकारात्मक कार्यों की निरंतर श्रृंखला से आता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास के लोगों की समस्याओं को समझकर उनके समाधान में सहयोग करने का संकल्प ले, तो समाज के भीतर सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे सेवा का प्रकाश
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव ने अभियान की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सेवा किसी एक दिन या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए। संगठन के कार्यकर्ताओं को समाज के प्रत्येक वर्ग के बीच पहुंचकर उनकी वास्तविक आवश्यकताओं को समझना चाहिए और यथासंभव सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेवा अभियान का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना और उसे यह विश्वास दिलाना है कि समाज उसके साथ खड़ा है।
भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे जनसंपर्क को केवल राजनीतिक गतिविधि के रूप में न देखें, बल्कि इसे समाज के साथ आत्मीय जुड़ाव और सेवा का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को लोगों की समस्याओं को सुनना, समझना और उनके समाधान के लिए संबंधित स्तर पर प्रयास करना चाहिए।
दादरी विधायक तेजपाल नागर ने भी अभियान को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
युवा शक्ति में छिपी है राष्ट्र परिवर्तन की ऊर्जा
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। देश की बड़ी युवा आबादी यदि अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता को सकारात्मक दिशा में लगाए तो सामाजिक परिवर्तन की गति कई गुना बढ़ सकती है।
युवा केवल रोजगार और व्यक्तिगत सफलता की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को भी समझें—यह आज की बड़ी आवश्यकता है।
सेवा युवाओं के भीतर नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करती है। किसी जरूरतमंद की मदद करना, किसी विद्यार्थी को शिक्षा के लिए प्रेरित करना, पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना, रक्तदान, स्वच्छता, जनजागरूकता और सामाजिक सहयोग जैसे कार्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ सकते हैं।
यदि युवा शक्ति को सही दिशा और सकारात्मक उद्देश्य मिल जाए तो वह केवल अपने भविष्य का निर्माण नहीं करती, बल्कि समाज के भविष्य को भी बदलने की क्षमता रखती है।
मातृशक्ति है संस्कारों की प्रथम पाठशाला
राष्ट्र निर्माण की चर्चा युवा शक्ति के बिना अधूरी है, लेकिन इसके साथ मातृशक्ति की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
भारतीय संस्कृति में नारी को परिवार और समाज के संस्कारों की आधारशिला माना गया है। माँ बच्चे की पहली शिक्षक होती है। वह अपने बच्चों में प्रेम, करुणा, त्याग, अनुशासन, मर्यादा और कर्तव्य की भावना विकसित करती है।
इसी संदर्भ में भारतीय संस्कृति का प्रसिद्ध संदेश है—
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।”
जब परिवार में संस्कार मजबूत होते हैं तो उसका प्रभाव समाज पर पड़ता है और जब समाज संस्कारित होता है तो राष्ट्र मजबूत होता है। इसलिए सेवा संकल्प अभियान में मातृशक्ति की भागीदारी को राष्ट्र निर्माण के व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना आवश्यक है।
युवा ऊर्जा और मातृशक्ति के संस्कार जब एक साथ राष्ट्रहित की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो सेवा केवल एक अभियान नहीं रहती, बल्कि जनचेतना का आंदोलन बन सकती है।
राजनीति से आगे सामाजिक दायित्व की भावना
लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक संगठन केवल चुनाव और राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह सकते। समाज के बीच निरंतर उपस्थित रहना, जनता की समस्याओं को समझना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना भी सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण दायित्व है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखता है कि कार्यकर्ता समाज के बीच केवल किसी विशेष अवसर पर नहीं, बल्कि निरंतर सक्रिय रहें।
सरकारी योजनाओं की जानकारी से लेकर पात्र लाभार्थियों को उनका लाभ दिलाने तक, सामाजिक समस्याओं की पहचान से लेकर संबंधित विभागों तक उनकी आवाज पहुंचाने तक—ऐसी गतिविधियां आम नागरिक और व्यवस्था के बीच संवाद का माध्यम बन सकती हैं।
कार्यकर्ता ही संगठन की वास्तविक शक्ति
कार्यशाला में उपस्थित बड़ी संख्या में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि किसी भी संगठन की वास्तविक शक्ति केवल उसकी संरचना या पदों में नहीं होती, बल्कि उसके कार्यकर्ताओं की निष्ठा, अनुशासन और जनसेवा की भावना में होती है।
जिला महामंत्री एवं अभियान संयोजक वीरेन्द्र भाटी ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। अभियान के सहसंयोजक विकास चौधरी, रजनी तोमर एवं राज नागर सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
जिसकी आवाज नहीं, उसकी आवाज बनना ही सेवा है”
इस अवसर पर भगवत प्रसाद शर्मा ने सेवा की अवधारणा को व्यापक सामाजिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि उनके विचार में सेवा का वास्तविक अर्थ केवल सहायता करना नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के साथ खड़ा होना है जिसे वास्तव में सहयोग की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि “जिसकी आवाज नहीं, उसकी आवाज बनना; जिसे जानकारी नहीं, उसे जानकारी देना और जिसे सहारे की आवश्यकता है, उसके साथ खड़ा होना ही सेवा का वास्तविक अर्थ है।”
उन्होंने कहा कि राष्ट्र केवल सरकारों से नहीं बनता। राष्ट्र का निर्माण उसके नागरिकों के चरित्र, संवेदनशीलता, संस्कार और कर्म से होता है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने आसपास सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प ले तो देश के विकास की दिशा और गति दोनों बदल सकती हैं।
उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा राष्ट्रहित में लगाने, मातृशक्ति से संस्कारों की ज्योति को और मजबूत करने तथा समाज के प्रत्येक नागरिक से अपने सामाजिक दायित्व को समझने का आह्वान किया।
सेवा का संकल्प बने जीवन की पहचान
आज भारत विकास और परिवर्तन के नए दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में केवल आर्थिक और भौतिक विकास पर्याप्त नहीं है। राष्ट्र को ऐसे नागरिकों की आवश्यकता है जो संवेदनशील हों, जिम्मेदार हों और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझते हों।
सेवा की संस्कृति इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की चिंता करता है, जब युवा समाज के लिए समय निकालता है, जब मातृशक्ति बच्चों में राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संस्कार पैदा करती है और जब संगठन अपने कार्यकर्ताओं को जनसेवा से जोड़ते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया मजबूत होती है।
जरूरत इस बात की है कि सेवा किसी अभियान की अवधि तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के दैनिक जीवन का हिस्सा बने।
सेवा कर्म बने, संकल्प पहचान बने और जनसमर्पण राष्ट्र निर्माण की शक्ति बने—इसी भावना के साथ ‘सेवा संकल्प अभियान’ को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश सामने आया।
भगवत प्रसाद शर्मा ✍️
मीडिया एक्जीक्यूटिव (भाजपा)
डॉक्टरेट की मानद उपाधि से विभूषित


.header-ads img { height:300px !important; max-height:300px !important; width:150% !important; object-fit:cover; }