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दादरी में टिकट दावेदारों की बाढ़, नोएडा-जेवर में टोटा ! गुर्जरों की ‘आर्थिक राजधानी’ में सियासत का गणित बदला, कहीं दावेदारों की कतार तो कहीं राजनीतिक सन्नाटा


मौहम्मद इल्यास- दनकौरी / ग्रेटर नोएडा
विशेष संवाददाता | Vision Live News
गौतम बुद्ध नगर को कभी गुर्जरों की आर्थिक और राजनीतिक ताकत का बड़ा केंद्र माना जाता था। यहां की सियासत में एक दौर ऐसा भी रहा, जब विधानसभा से लेकर संसद तक गुर्जर नेताओं की मजबूत मौजूदगी दिखाई देती थी। लेकिन समय बदला, परिसीमन बदला, विधानसभा क्षेत्रों का भूगोल बदला और उसके साथ-साथ गौतम बुद्ध नगर की गुर्जर राजनीति का नक्शा भी बदलता चला गया।
अब हालात कुछ ऐसे हैं कि दादरी विधानसभा में टिकट के दावेदारों की कतार देखकर लगता है जैसे टिकट नहीं, बल्कि लॉटरी खुलने वाली हो, जबकि नोएडा और जेवर में वही राजनीतिक दावेदारी अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है।
कभी तीनों तरफ था ‘गुर्जर सियासत’ का दबदबा
एक दौर वह भी था जब एनटीपीसी क्षेत्र से लेकर नोएडा के कालिंदी कुंज तक का बड़ा इलाका एक ही विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था। उस समय गुर्जर नेताओं का विधानसभा में प्रतिनिधित्व रहा।
बाद में दादरी से अलग होकर नोएडा विधानसभा अस्तित्व में आई, लेकिन उसके बाद से नोएडा विधानसभा को अब तक कोई गुर्जर विधायक नहीं मिल पाया।
इसी तरह सिकंदराबाद क्षेत्र से अलग होकर कासना-ग्रेटर नोएडा से जेवर तक का क्षेत्र जेवर विधानसभा का हिस्सा बना। इस सीट पर भी एक समय वेदराम भाटी जैसे गुर्जर नेता विधायक हुआ करते थे।
सांसदों की बात करें तो एक समय सुरेंद्र नागर भी गौतम बुद्ध नगर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। यानी वह दौर भी रहा जब संसद में गुर्जर चेहरा, दादरी-नोएडा की राजनीति में गुर्जर विधायक और जेवर में भी गुर्जर विधायक—तीनों स्तरों पर बिरादरी का प्रतिनिधित्व नजर आता था।
अब तस्वीर पूरी तरह बदली हुई है
आज गौतम बुद्ध नगर में चुने हुए जनप्रतिनिधियों की तस्वीर पर नजर डालें तो दादरी से तेजपाल नागर गुर्जर बिरादरी के एकमात्र विधायक हैं।
वहीं लोकसभा में डॉ. महेश शर्मा, नोएडा विधानसभा में पंकज सिंह और जेवर विधानसभा में धीरेंद्र सिंह गुर्जर बिरादरी से बाहर के प्रतिनिधि हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी भी गुर्जर बिरादरी से नहीं आते।
यानी कभी जिस जिले में गुर्जर राजनीति का मजबूत प्रभाव दिखाई देता था, वहां आज विधानसभा और संसद के प्रतिनिधित्व का समीकरण काफी बदल चुका है।
2027 की आहट और दादरी में टिकट की ‘महाभारत’
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। गौतम बुद्ध नगर की तीनों विधानसभा सीटों—नोएडा, दादरी और जेवर—में संभावित दावेदार अपने-अपने स्तर पर सक्रिय दिखाई देने लगे हैं।
इनमें दादरी सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है।
भाजपा से टिकट की दावेदारी करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। दिलचस्प बात यह है कि दादरी में टिकट की दौड़ में दिखाई देने वाले कई चेहरे गुर्जर समाज से ही आते हैं।
ऐसा लगता है कि यहां टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं के बीच अनौपचारिक मुकाबला कुछ यूं है—
टिकट किसे मिलेगा?” से बड़ा सवाल है—“दावेदार कितने हैं?”
जेवर में भी दावेदारी, मगर दादरी जैसा हुजूम नहीं
जेवर विधानसभा की स्थिति दादरी से थोड़ी अलग है। यहां गुर्जर समाज से आने वाले कुछ भाजपा नेता टिकट की दावेदारी करते दिखाई दे रहे हैं।
इनमें एडवोकेट नरेंद्र डाढा, मनोज चौधरी (तुगलपुर), सत्येंद्र नागर, मुकेश भाटी पत्नी सुनील भाटी (सिरसा) और प्रधान अजीत मुखिया (खानपुर) जैसे नाम चर्चा में हैं।
यानी जेवर में कम से कम टिकट मांगने वालों की आवाज तो सुनाई दे रही है।
लेकिन दादरी जैसा राजनीतिक हुजूम यहां भी नहीं दिखाई देता।
और नोएडा? यहां तो कहानी कुछ और ही है!
सबसे बड़ा सवाल नोएडा विधानसभा को लेकर उठता है।
दादरी में जहां टिकट के लिए राजनीतिक हलचल है, जेवर में कुछ चेहरे मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, वहीं नोएडा में गुर्जर बिरादरी से टिकट की दावेदारी करने वाले चेहरे अपेक्षाकृत कम नजर आते हैं।
यही स्थिति कई सवाल खड़े करती है।
क्या नोएडा में गुर्जर समाज के नेताओं ने राजनीतिक दावेदारी से दूरी बना ली है?
क्या उन्हें लगता है कि यहां से टिकट की संभावना बेहद कम है?
या फिर नोएडा की बदलती राजनीति में गुर्जर नेतृत्व अभी अपने लिए कोई नया रास्ता तलाश रहा है?
आर्थिक राजधानी’ में राजनीतिक पूंजी का सवाल
गौतम बुद्ध नगर की पहचान सिर्फ उद्योग, जमीन और आर्थिक गतिविधियों से नहीं है। यह जिला पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे में गुर्जर समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का बदलता स्वरूप चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।
एक समय था जब जिले की राजनीति में गुर्जर चेहरों की मौजूदगी को लेकर कोई सवाल नहीं उठता था।
आज सवाल यह है कि—
दादरी में टिकट के लिए इतनी बेचैनी क्यों है?
जेवर में दावेदार सीमित क्यों हैं?
और सबसे बड़ा सवाल—
नोएडा में दावेदारी की आवाज इतनी धीमी क्यों है?
दादरी में बाढ़, जेवर में धार और नोएडा में सूखा!
2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक तापमान बढ़ना शुरू हो चुका है।
गौतम बुद्ध नगर की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर को अगर व्यंग्य में कहा जाए तो—
दादरी में टिकट दावेदारों की बाढ़ है, जेवर में कुछ नावें पानी में उतर चुकी हैं और नोएडा में अभी तालाब तलाशा जा रहा है।
हालांकि राजनीति में आज का सन्नाटा कल की आंधी भी बन सकता है। इसलिए 2027 के चुनाव तक तस्वीर कितनी बदलती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
क्योंकि गौतम बुद्ध नगर की राजनीति में टिकट सिर्फ एक चुनावी टिकट नहीं है—यह आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा का संकेत भी हो सकता है।
और फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—
“गुर्जरों की आर्थिक राजधानी में गुर्जर राजनीति आखिर सिकुड़ क्यों रही है?”
✍️ लेखक परिचय
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
विशेष संवाददाता — Vision Live News
दनकौर, गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" , गौतम बुद्ध नगर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकारों, प्रशासनिक गतिविधियों एवं जनप्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर लंबे समय से समाचार एवं विश्लेषणात्मक सामग्री तैयार करते हैं। उनकी लेखनी का फोकस स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम, बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरण और क्षेत्रीय मुद्दों को तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से सामने रखना है।
नोट: लेखक द्वारा प्रस्तुत राजनीतिक टिप्पणियां एवं विश्लेषण उपलब्ध सूचनाओं, सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाले घटनाक्रमों पर आधारित हैं।
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