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समाजसेविका अर्चना सिंह की पहल लाई रंग: सूरजपुर जिला न्यायालय में युद्ध स्तर पर सफाई अभियान, बदली परिसर की तस्वीर


जिला न्यायाधीश को दिए पत्र के बाद हरकत में आया प्रशासनिक अमला, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कई टीमें जुटीं; जेसीबी से झाड़ियों की कटाई, नालियों की सफाई और दवा का छिड़काव
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर स्थित जिला न्यायालय परिसर में लंबे समय से बनी गंदगी और अव्यवस्था की समस्या को लेकर उठाई गई आवाज अब असर दिखाने लगी है। न्यायालय परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से व्यापक स्तर पर सफाई अभियान शुरू किया गया है। अभियान के तहत प्राधिकरण की कई टीमें एक साथ अलग-अलग हिस्सों में सफाई कार्य में जुटी हुई हैं। परिसर में उगी झाड़ियों को जेसीबी मशीनों के माध्यम से हटाया जा रहा है, नालियों और नालों की सफाई कराई जा रही है तथा विभिन्न स्थानों पर दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है।
सफाई अभियान के चलते जिला न्यायालय परिसर में पिछले कुछ समय से दिखाई दे रही गंदगी और झाड़ियों की समस्या से राहत मिलने लगी है। अधिवक्ताओं के चैंबरों के बीच की गलियों, आने-जाने वाले रास्तों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष रूप से सफाई कराई जा रही है। सफाई कर्मचारियों द्वारा झाड़ू लगाने के साथ कूड़ा-कचरा एकत्र कर उसे हटाने का कार्य भी किया जा रहा है।
गंदगी का अंबार देख उठाई आवाज
रुस्तमपुर गांव निवासी समाजसेविका अर्चना सिंह, जो अधिवक्ता भी हैं, ने जिला न्यायालय परिसर की सफाई व्यवस्था को लेकर पहल की। उन्होंने बताया कि सूरजपुर स्थित जिला कोर्ट परिसर में कई स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ था। लंबे समय से जमा कूड़े-कचरे, उगी झाड़ियों और गंदगी के कारण न्यायालय परिसर में आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
अधिवक्ता अर्चना सिंह के मुताबिक, जिला न्यायालय एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिवक्ता, वादकारी, न्यायिक कर्मचारी और आम नागरिक आते हैं। ऐसे स्थान पर स्वच्छता और बेहतर वातावरण बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने जिला न्यायाधीश को पत्र देकर न्यायालय परिसर में विशेष रूप से साफ-सफाई कराए जाने की मांग की।
जिला न्यायाधीश तक पहुंचा पत्र, फिर प्राधिकरण ने संभाली कमान
अर्चना सिंह ने बताया कि उनके द्वारा दिया गया पत्र जिला न्यायाधीश के माध्यम से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तक पहुंचा। पत्र के प्राधिकरण तक पहुंचते ही संबंधित प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और न्यायालय परिसर की सफाई व्यवस्था को लेकर अभियान शुरू कर दिया गया।
इसके बाद प्राधिकरण की कई टीमों को मौके पर लगाया गया। सफाई कार्य को केवल सामान्य झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि परिसर में उगी झाड़ियों को मशीनों के माध्यम से हटाने, नालियों और नालों की सफाई तथा दवा के छिड़काव सहित व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है।
जेसीबी से हटाई जा रही झाड़ियां
जिला न्यायालय परिसर के कई हिस्सों में काफी समय से उगी झाड़ियों को जेसीबी की मदद से काटकर हटाया जा रहा है। झाड़ियों के कारण जहां परिसर की सुंदरता प्रभावित हो रही थी, वहीं इनमें कचरा जमा होने और मच्छर एवं अन्य कीट पनपने की आशंका भी बनी रहती थी।
जेसीबी से झाड़ियों को हटाने के बाद संबंधित स्थानों की सफाई की जा रही है, जिससे परिसर के ऐसे हिस्से भी खुले और व्यवस्थित नजर आने लगे हैं, जो पहले झाड़ियों और कचरे से ढके हुए थे।
नालियों और नालों पर विशेष ध्यान
अभियान के दौरान न्यायालय परिसर की नालियों और नालों की सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जमा गंदगी और कचरे को बाहर निकालकर जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
नालियों की सफाई के बाद उनमें दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है। इससे गंदगी के कारण पैदा होने वाली दुर्गंध तथा मच्छर-मक्खियों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अधिवक्ताओं के चैंबरों के बीच की गलियों की भी सफाई
जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के चैंबरों के बीच बनी गलियों और रास्तों को भी सफाई अभियान में शामिल किया गया है। इन स्थानों पर सफाई कर्मचारी विशेष रूप से झाड़ू लगाकर कूड़ा-कचरा हटा रहे हैं।
अधिवक्ताओं के चैंबरों के आसपास सफाई होने से रोजाना न्यायालय आने वाले अधिवक्ताओं को भी राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, वादकारियों और आम लोगों के लिए भी न्यायालय परिसर का वातावरण अधिक स्वच्छ और सुविधाजनक हो सकेगा।
रुस्तमपुर गांव में भी शुरू हुआ युद्ध स्तर पर सफाई अभियान
समाजसेविका अर्चना सिंह ने बताया कि उनके अपने गांव रुस्तमपुर में भी युद्ध स्तर पर सफाई अभियान शुरू हो चुका है। यहां यमुना प्राधिकरण की कई टीमें सफाई कार्य में जुटी हुई हैं।
गांव में अलग-अलग स्थानों पर सफाई कराई जा रही है और गंदगी को हटाने का कार्य किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को भी बेहतर स्वच्छता व्यवस्था मिलने की उम्मीद है।
एक पहल से शुरू हुआ बदलाव
जिला न्यायालय की सफाई का यह पूरा मामला इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि किसी सार्वजनिक समस्या को लेकर यदि संबंधित अधिकारियों के समक्ष उचित तरीके से आवाज उठाई जाए तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की राह खुल सकती है।
समाजसेविका अर्चना सिंह ने न्यायालय परिसर की स्थिति को लेकर जिला न्यायाधीश को पत्र दिया। पत्र आगे प्राधिकरण तक पहुंचा और इसके बाद सफाई के लिए मशीनरी तथा कर्मचारियों को मैदान में उतारा गया। अब कई टीमें एक साथ अभियान में जुटी हैं।
अब नियमित सफाई और निगरानी की जरूरत
सूरजपुर जिला न्यायालय में जिस स्तर पर अभी सफाई अभियान चल रहा है, उससे तत्काल राहत तो मिल सकती है, लेकिन इसकी स्थायी सफलता नियमित निगरानी और सफाई व्यवस्था पर निर्भर करेगी। झाड़ियों की दोबारा बढ़ोतरी, नालियों में कचरा जमा होने और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलने से रोकने के लिए नियमित सफाई जरूरी होगी।
समाजसेविका अर्चना सिंह ने उम्मीद जताई कि सफाई अभियान के बाद भी न्यायालय परिसर में स्वच्छता व्यवस्था को नियमित रूप से बनाए रखा जाएगा, ताकि कुछ समय बाद फिर से वही समस्या सामने न आए।
फिलहाल सूरजपुर स्थित जिला न्यायालय में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कई टीमों द्वारा चलाया जा रहा सफाई अभियान चर्चा का विषय बना हुआ है। जेसीबी से झाड़ियों की कटाई, नालियों-नालों की सफाई, दवा का छिड़काव और अधिवक्ताओं के चैंबरों के बीच की गलियों में विशेष सफाई से परिसर की स्थिति में बदलाव दिखाई देने लगा है। इस पूरी पहल में समाजसेविका अर्चना सिंह द्वारा जिला न्यायाधीश के समक्ष उठाई गई समस्या महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आई है।

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