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रंग-बिरंगी राखियों में नजर आई विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, मुन्नी ने प्रथम स्थान हासिल कर बढ़ाया मान


श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज में रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में ‘राखी बनाओ प्रतियोगिता’ का भव्य आयोजन

रक्षाबंधन की सांस्कृतिक भावना को रचनात्मकता से जोड़ा, विद्यार्थियों ने कला-कौशल के साथ दिया भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का संदेश
मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
रक्षाबंधन के पावन पर्व के उपलक्ष्य में श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में “राखी बनाओ प्रतियोगिता” का आयोजन उत्साह, उमंग और रचनात्मक वातावरण के बीच किया गया। महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी कलात्मक प्रतिभा, सृजनात्मक सोच और कल्पनाशीलता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता के दौरान महाविद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पना को आकार देते हुए विभिन्न प्रकार की सुंदर और आकर्षक राखियां तैयार कीं। रंग-बिरंगे धागों, मोतियों, रिबन, सजावटी सामग्री तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग करते हुए विद्यार्थियों ने बेहद खूबसूरत राखियां बनाईं। प्रत्येक राखी में प्रतिभागी की अपनी अलग सोच और रचनात्मक शैली देखने को मिली।
कला और संस्कृति का सुंदर संगम
“राखी बनाओ प्रतियोगिता” केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने कला, संस्कृति और परंपरा को एक साथ जोड़ने का कार्य किया। विद्यार्थियों ने राखी तैयार करने के दौरान अपनी कलात्मक क्षमता का प्रदर्शन करने के साथ-साथ रक्षाबंधन के सांस्कृतिक एवं भावनात्मक महत्व को भी समझने का प्रयास किया।
आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि भारतीय त्योहार केवल उत्सव मनाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सामाजिक, पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर
प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों ने पूरी मेहनत और लगन के साथ राखियां तैयार कीं। कई विद्यार्थियों ने पारंपरिक डिजाइन को अपनाया, जबकि कुछ प्रतिभागियों ने अपनी राखियों में आधुनिक रचनात्मकता का समावेश किया।
राखियों की सजावट में विद्यार्थियों ने रंगों और विभिन्न सजावटी सामग्रियों का बेहतर तालमेल प्रस्तुत किया। अपनी मेहनत से तैयार की गई राखियों को लेकर विद्यार्थियों में खास उत्साह दिखाई दिया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थी एक-दूसरे की बनाई राखियों को देखते और उनके डिजाइन की सराहना करते नजर आए।
इस गतिविधि ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ एक-दूसरे से सीखने और नए विचारों को अपनाने का अवसर भी प्रदान किया।
अमित नागर और डॉ. शशि नागर दहेलिया ने किया मूल्यांकन
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई राखियों का मूल्यांकन अमित नागर एवं डॉ. शशि नागर दहेलिया द्वारा किया गया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की राखियों की रचनात्मकता, सुंदरता, मौलिकता, सजावट और कलात्मक प्रस्तुति को ध्यान में रखते हुए विजेताओं का चयन किया।
प्रतियोगिता में मुन्नी, बी.ए. पंचम सेमेस्टर ने अपनी उत्कृष्ट कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया।
गुलसबा, बी.ए. प्रथम सेमेस्टर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान हासिल किया।
वहीं शिवानी एवं कशिश, बी.ए. प्रथम सेमेस्टर ने अपनी रचनात्मकता के दम पर संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
विजेता प्रतिभागियों की उपलब्धि पर महाविद्यालय परिवार की ओर से उन्हें बधाई दी गई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। प्रतियोगिता में शामिल अन्य विद्यार्थियों के प्रयासों की भी सराहना की गई।
डॉ. निशा शर्मा के निर्देशन में हुआ आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन गृह विज्ञान विभाग की डॉ. निशा शर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया और उन्हें अपनी रचनात्मक क्षमता को स्वतंत्र रूप से प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया।
गृह विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित इस गतिविधि ने यह भी प्रदर्शित किया कि कला एवं रचनात्मक कार्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हाथों से कुछ नया तैयार करने की प्रक्रिया विद्यार्थियों में धैर्य, एकाग्रता, आत्मविश्वास और समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करती है।
प्राचार्य एवं उपप्राचार्या ने किया विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन
कार्यक्रम का अवलोकन करने एवं विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करने के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स एवं उपप्राचार्या डॉ. रश्मि गुप्ता उपस्थित रहीं।
उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विभिन्न राखियों का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। प्राचार्य एवं उपप्राचार्या ने प्रतियोगिता में शामिल सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में उनकी सहभागिता भी आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि प्रतियोगिताओं का उद्देश्य केवल पुरस्कार प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा को पहचानना, उसे निखारना और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना भी है।
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक
कार्यक्रम के दौरान रक्षाबंधन पर्व के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। बताया गया कि रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम, स्नेह, विश्वास और आपसी जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।
राखी का धागा भाई-बहन के रिश्ते में मौजूद भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त करता है। यह पर्व परिवार में प्रेम, अपनत्व और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने का संदेश देता है।
विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि त्योहारों के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ती है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रचनात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों में विकसित होते हैं अनेक गुण
महाविद्यालय में आयोजित इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत एवं सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
राखी बनाने जैसी गतिविधियों से विद्यार्थियों में—
रचनात्मक एवं कल्पनाशील सोच का विकास
कलात्मक कौशल में वृद्धि
आत्मविश्वास का निर्माण
धैर्य और एकाग्रता में सुधार
स्वयं कुछ नया करने की भावना
भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति सम्मान
सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना
जैसे गुणों को बढ़ावा मिलता है।
विद्यार्थियों को मिला अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच
प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी छिपी हुई प्रतिभा को सामने लाने का अवसर मिला। कई ऐसे विद्यार्थी भी इस आयोजन का हिस्सा बने, जिन्हें सामान्य कक्षा गतिविधियों में अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे कार्यक्रम उनके भीतर मौजूद प्रतिभा को पहचानने और उसे आगे बढ़ाने में सहायक साबित होते हैं।
विद्यार्थियों ने जिस उत्साह के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया, उससे यह स्पष्ट हुआ कि युवा वर्ग अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े आयोजनों में रुचि रखता है। यदि उन्हें उचित मंच और मार्गदर्शन मिले तो वे अपनी रचनात्मक क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
कार्यक्रम ने दिया संस्कृति और सृजनशीलता का संदेश
श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज में आयोजित “राखी बनाओ प्रतियोगिता” ने रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना को विद्यार्थियों की रचनात्मकता से जोड़ने का सफल प्रयास किया। कार्यक्रम में जहां एक ओर विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति अपने जुड़ाव को भी अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी गईं और उन्हें भविष्य में भी महाविद्यालय द्वारा आयोजित होने वाली विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में आयोजित यह आयोजन विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके सम्मान का सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया। प्रतियोगिता ने यह संदेश भी दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभाओं को पहचानकर उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है।


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