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हिण्डन डूब क्षेत्र की जमीन को लेकर शिकायत, सीमांकन और कथित अवैध निर्माण की जांच की मांग


बिसरख जलालपुर के खसरा संख्या-112 को लेकर समाजसेवी नरेश कुमार ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में दिया प्रार्थना पत्र, प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार सीईओ ने लिया संज्ञान

मौहम्मद इल्यास- दनकौरी / ग्रेटर नोएडा
 बिसरख जलालपुर गांव के अंतर्गत हिण्डन नदी के डूब क्षेत्र से संबंधित बताई जा रही भूमि को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई गई है। समाजसेवी नरेश कुमार ने 20 अगस्त 2026 को प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर खसरा संख्या-112 का सीमांकन कराने तथा वहां बताए गए निर्माण और कथित प्लॉटिंग की वैधानिक स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

शिकायतकर्ता ने अपने पत्र में दावा किया है कि संबंधित क्षेत्र में पिछले करीब तीन वर्षों से निर्माण गतिविधियां जारी हैं। उन्होंने प्राधिकरण और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से राजस्व एवं प्राधिकरण अभिलेखों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

हालांकि, शिकायत पत्र में लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है। इसलिए उन्हें आरोप अथवा शिकायत के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।

खसरा संख्या-112 के सीमांकन की मांग

नरेश कुमार ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि ग्राम बिसरख जलालपुर स्थित खसरा संख्या-112 का संबंध हिण्डन नदी के डूब क्षेत्र से है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर मौके पर सीमांकन कराया जाए, जिससे भूमि की वास्तविक स्थिति और सीमा स्पष्ट हो सके।

शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित क्षेत्र की सीमा नोएडा क्षेत्र से जुड़ती है और इसी वजह से भूमि की सीमा तथा निर्माण गतिविधियों की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए संयुक्त स्तर पर जांच जरूरी है।

भूमि की वास्तविक स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित राजस्व रिकॉर्ड, प्राधिकरण के अभिलेख और मौके के सत्यापन से ही किया जा सकता है।

कथित अवैध कॉलोनी और निर्माण का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खसरा संख्या-112 में कथित रूप से प्लॉटिंग कर निर्माण गतिविधियां की जा रही हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि संबंधित क्षेत्र में लोगों को प्लॉट बेचे जाने की स्थिति की जांच की जानी चाहिए।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से पूर्व में जारी कुछ दस्तावेजों में भी बिसरख जलालपुर के खसरा संख्या-112 में कथित अवैध प्लॉटिंग और निर्माण के संबंध में पुलिस कार्रवाई का अनुरोध किए जाने की बात सामने आती है।

हालांकि, किसी व्यक्ति अथवा संस्था को इस आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आरोपों की वैधानिक स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित हो सकती है।

एक इंटरनेशनल एकेडमी का भी शिकायत में उल्लेख

शिकायतकर्ता ने खसरा संख्या-112 पर एक इंटरनेशनल एकेडमी संचालित होने का उल्लेख करते हुए संबंधित निर्माण की वैधानिक स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

उपलब्ध शिकायत पत्र से संस्था की भूमि संबंधी स्थिति, भवन स्वीकृति अथवा संचालन की वैधानिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। इसलिए इस संबंध में संबंधित विभागों के रिकॉर्ड से तथ्य स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

प्राधिकरण के पुराने पत्रों और कार्रवाई का भी जिक्र

मामले की खास बात यह है कि उपलब्ध प्राधिकरणीय दस्तावेजों में भी बिसरख जलालपुर के खसरा संख्या-112 और 113 में कथित अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण को लेकर पुलिस बल उपलब्ध कराने तथा कार्रवाई की मांग किए जाने का उल्लेख है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल-3 की ओर से 22 जुलाई 2026 को पुलिस उपायुक्त, मुख्यालय, गौतमबुद्ध नगर को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि संबंधित खसरों की भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण और प्लॉटिंग की जा रही है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि खसरा संख्या-112 में पूर्व में 19 मार्च 2024 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी।

इसी पत्र में वर्ष 2022 से 2026 तक पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न तारीखों में भेजे गए कई पत्रों का उल्लेख किया गया है।

इन दस्तावेजों से इतना जरूर सामने आता है कि संबंधित भूमि को लेकर प्राधिकरण स्तर पर पहले भी कार्रवाई और पुलिस सहायता की मांग की जाती रही है। हालांकि, प्रत्येक कार्रवाई के परिणाम और वर्तमान स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।

18 अगस्त की प्रस्तावित कार्रवाई का क्या हुआ?

शिकायतकर्ता के 20 अगस्त 2026 के पत्र में 18 अगस्त 2026 को ध्वस्तीकरण की प्रस्तावित तारीख का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि निर्धारित कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।

वहीं उपलब्ध अन्य प्राधिकरणीय पत्र में खसरा संख्या-112 और 113 से कथित अवैध निर्माण हटाने के लिए 19 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजे पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध दर्ज है।

इससे संकेत मिलता है कि कार्रवाई की तारीख में परिवर्तन अथवा पुनर्निर्धारण हुआ हो सकता है। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि प्राधिकरण के आधिकारिक आदेश से ही हो सकेगी।

सीईओ रवि कुमार एनजी ने लिया संज्ञान?

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी ने शिकायत पत्र में उठाए गए बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधीनस्थ अधिकारियों को मामले में तत्काल आवश्यक कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, भूमि की स्थिति, सीमांकन, कथित निर्माण और संबंधित अभिलेखों की जांच को प्राथमिकता दी जा सकती है।

हालांकि, इन निर्देशों के संबंध में प्राधिकरण की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान या लिखित आदेश इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है। इसलिए कार्रवाई की वास्तविक स्थिति संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।

रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज को लेकर भी सवाल

शिकायतकर्ता ने हिण्डन नदी के डूब क्षेत्र से संबंधित भूमि की रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह जांच कराने की मांग की है कि संबंधित भूमि की वर्तमान राजस्व अभिलेखों में क्या स्थिति है और वहां किसी प्रकार के हस्तांतरण, प्लॉटिंग अथवा निर्माण की अनुमति है या नहीं।

यह मामला राजस्व रिकॉर्ड की जांच से ही स्पष्ट हो सकता है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को अभी प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

बिजली आपूर्ति को लेकर भी शिकायत

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित अवैध कॉलोनी में रोड लाइट के पोल से बिजली की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने संबंधित विभाग से इसकी जांच और कार्रवाई की मांग की है।

इस आरोप की भी उपलब्ध दस्तावेजों से स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। इसलिए विद्युत विभाग की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

NGT के नियमों का हवाला, लेकिन आदेश का सत्यापन जरूरी

शिकायतकर्ता ने हिण्डन नदी के डूब क्षेत्र में पक्के निर्माण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के प्रावधानों का हवाला दिया है।

हालांकि, शिकायत पत्र में संबंधित NGT आदेश अथवा प्रकरण संख्या का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि खसरा संख्या-112 में मौजूद प्रत्येक निर्माण स्वतः अवैध है।

भूमि की वास्तविक श्रेणी, संबंधित NGT आदेश, प्राधिकरण की अधिसूचना और लागू पर्यावरणीय एवं विकास संबंधी नियमों की जांच के बाद ही इस संबंध में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

पहले भी दर्ज हुई हैं FIR

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण और प्राधिकरण की भूमि से जुड़े मामलों को लेकर थाना सेक्टर-113 में वर्ष 2024 की FIR संख्या 0365 तथा थाना बिसरख में वर्ष 2025 की FIR संख्या 0972 दर्ज होने की जानकारी सामने आती है।

इन FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं का उल्लेख है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, मामलों में जांच के लिए पुलिस अधिकारियों को विवेचना सौंपी गई थी।

इसके अलावा, अप्रैल 2025 के एक प्राधिकरणीय पत्र में खसरा संख्या-112 पर कथित अवैध प्लॉटिंग और बहुमंजिला निर्माण का उल्लेख करते हुए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने का अनुरोध किया गया था।

FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के अपराधी होने का प्रमाण नहीं है। किसी भी आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर निर्धारित होती है।

प्राधिकरण ने पुलिस को भेजे कई पत्र

22 जुलाई 2026 के प्राधिकरणीय पत्र में वर्ष 2022 से लेकर 2026 तक पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए भेजे गए अनेक पत्रों का विवरण दिया गया है।

इन पत्रों का उल्लेख करते हुए प्राधिकरण ने संबंधित खसरों से कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

यह दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्राधिकरण स्तर पर संबंधित क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का विषय लंबे समय से पत्राचार में रहा है। हालांकि, कार्रवाई की प्रभावशीलता और वर्तमान स्थिति के लिए नवीनतम आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

अब जांच के दायरे में होंगे ये प्रमुख सवाल

मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट करने के लिए मुख्य रूप से इन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी—

1. खसरा संख्या-112 की वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में स्थिति क्या है?


2. क्या संबंधित भूमि का हाल में आधिकारिक सीमांकन हुआ है?


3. मौके पर मौजूद निर्माणों के लिए कौन-कौन सी स्वीकृतियां प्राप्त हैं?


4. क्या संबंधित भूमि वास्तव में हिण्डन नदी के अधिसूचित डूब क्षेत्र में आती है?


5. संबंधित NGT आदेश इस भूमि पर किस सीमा तक लागू होते हैं?


6. प्राधिकरण द्वारा पूर्व में की गई कार्रवाई का वास्तविक परिणाम क्या रहा?


7. 18 अगस्त 2026 को प्रस्तावित कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी?


8. 19 सितंबर 2026 की प्रस्तावित कार्रवाई के लिए पुलिस बल की क्या व्यवस्था की गई है?


9. कथित प्लॉटिंग और निर्माण से संबंधित FIR की वर्तमान विवेचनात्मक स्थिति क्या है?


10. बिजली आपूर्ति संबंधी शिकायत की विद्युत विभाग ने कोई जांच की है या नहीं?


विजन लाइव न्यूज़ का विश्लेषण

उपलब्ध शिकायत पत्र, प्राधिकरणीय पत्राचार और FIR से संबंधित दस्तावेजों को एक साथ देखने पर यह स्पष्ट होता है कि बिसरख जलालपुर के खसरा संख्या-112 और आसपास की भूमि पर कथित अतिक्रमण एवं निर्माण का मुद्दा नया नहीं है और इस संबंध में विभिन्न स्तरों पर पत्राचार तथा पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पहले भी सामने आ चुकी है।

वहीं, वर्तमान शिकायत में फिर से सीमांकन, निर्माण की वैधानिक स्थिति और कथित प्लॉटिंग की जांच की मांग उठाई गई है। प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार सीईओ स्तर से भी मामले का संज्ञान लिए जाने की बात सामने आ रही है।

फिलहाल सबसे जरूरी है कि राजस्व विभाग, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और संबंधित अन्य विभाग संयुक्त रूप से अभिलेखों एवं मौके का सत्यापन करें। यदि जांच में नियमविरुद्ध निर्माण अथवा अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, जिन निर्माणों अथवा व्यक्तियों के संबंध में वैध दस्तावेज अथवा स्वीकृतियां हैं, उनका पक्ष भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि शिकायत, उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को सामने रखना है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

— विजन लाइव न्यूज़
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