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ग्रेटर नोएडा में खुलेगा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का कैंपस, भारत-ऑस्ट्रेलिया शिक्षा साझेदारी को मिलेगी नई उड़ान


उत्तर प्रदेश में पहली बार विदेशी विश्वविद्यालय की दस्तक, दिसंबर 2026 में शुरू हो सकता है कैंपस | जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जल सुरक्षा पर होगा शोध | युवाओं को मिलेगी विश्वस्तरीय शिक्षा और कौशल विकास के अवसर
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा, 31 अगस्त 2026। ग्रेटर नोएडा अब सिर्फ औद्योगिक और आधुनिक शहर के रूप में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और शोध के नए केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दो दशक से अधिक समय से चली आ रही शैक्षणिक, शोध और संस्थागत साझेदारी को नया आयाम देते हुए वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने ग्रेटर नोएडा में अपने नए कैंपस की स्थापना की औपचारिक घोषणा कर दी है।
इस प्रस्तावित कैंपस को ‘जलसेतु’ नाम दिया गया है। उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी विदेशी विश्वविद्यालय का कैंपस खुलने की यह पहल उच्च शिक्षा, शोध, इनोवेशन, कौशल विकास और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कैंपस शुरू होने के बाद ग्रेटर नोएडा और आसपास के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा एवं शोध के अवसर देश में ही उपलब्ध हो सकेंगे।
दिल्ली में हुआ औपचारिक ऐलान
सोमवार को दिल्ली स्थित नेशनल एग्रीकल्चर साइंस कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की मौजूदगी में ग्रेटर नोएडा कैंपस की औपचारिक घोषणा की।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ प्रेरणा सिंह, न्यू साउथ वेल्स के कोषाध्यक्ष डेनियल मुकी तथा वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं अध्यक्ष विशिष्ट प्रोफेसर जॉर्ज विलियम्स एओ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्राधिकरण कार्यालय परिसर के टावर-2 में खुलेगा कैंपस
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी का प्रस्तावित कैंपस ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय परिसर के टावर-2 में स्थापित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की ओर से यहां तीन फ्लोर लिए गए हैं। कैंपस को दिसंबर 2026 में शुरू करने की तैयारी है।
कैंपस शुरू होने से ग्रेटर नोएडा, नोएडा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के नए विकल्प उपलब्ध होंगे। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की आवश्यकता कम होगी और वे देश में रहते हुए ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय की शिक्षा एवं वैश्विक अकादमिक वातावरण से जुड़ सकेंगे।
उद्योगों की जरूरत के अनुसार तैयार होंगे युवा
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के ग्रेटर नोएडा कैंपस का एक प्रमुख उद्देश्य शिक्षा को उद्योगों की जरूरतों से जोड़ना है। कैंपस के माध्यम से युवाओं को आधुनिक तकनीक, कौशल विकास, इनोवेशन और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी के माध्यम से शिक्षा के साथ-साथ शोध एवं औद्योगिक सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रेटर नोएडा के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक एवं कॉरपोरेट क्षेत्र को प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
महिला सशक्तीकरण, डाटा और इनोवेशन पर भी फोकस
कार्यक्रम के दौरान वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी ने भारत में अपनी साझेदारी को और व्यापक बनाने की घोषणा की। विश्वविद्यालय की ओर से महिला सशक्तीकरण, बिजनेस, डाटा, इनोवेशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए स्कॉलरशिप कार्यक्रमों की भी घोषणा की गई।
इन पहलों का उद्देश्य भारतीय युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा, शोध और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना है। खास तौर पर ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा, जो भविष्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनेगा विशेष आकर्षण
ग्रेटर नोएडा कैंपस की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में ‘जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ शामिल होगा। इस केंद्र के माध्यम से उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में जल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर शोध और व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
यह केंद्र शोध संस्थानों, सरकार, उद्योग जगत और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाने का काम करेगा। इसके तहत भूजल की स्थिरता, नदियों का स्वास्थ्य, सतत सिंचाई और शहरी जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध, इनोवेशन और व्यावहारिक समाधान तलाशे जाएंगे।
सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री भी
विश्वविद्यालय ने कैंपस शुरू करने के साथ ही सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्रोग्राम शुरू करने की भी घोषणा की है। इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों को जल प्रबंधन से जुड़े वास्तविक मुद्दों, शोध और नीतिगत चुनौतियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
छात्रों को शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, सरकारी संस्थानों, बैंकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। इससे जल संरक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में नई तकनीकों एवं व्यावहारिक समाधानों को विकसित करने में मदद मिल सकती है।
भारत के सामाजिक और आर्थिक भविष्य में योगदान हमारा उद्देश्य’
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं अध्यक्ष विशिष्ट प्रोफेसर जॉर्ज विलियम्स एओ ने कहा कि भारत के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना है, जिनके माध्यम से वे भारत के सामाजिक और आर्थिक भविष्य में सार्थक योगदान दे सकें।
वहीं न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने ग्रेटर नोएडा कैंपस को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया। उन्होंने कहा कि इस कैंपस के माध्यम से भारत के छात्रों को वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी की विश्वस्तरीय शिक्षा तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने भी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर कैंपस की स्थापना से संबंधित विषयों पर चर्चा की और प्राधिकरण की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
ग्रेटर नोएडा में विदेशी विश्वविद्यालय की स्थापना को शहर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी, बल्कि शोध, स्टार्टअप, इनोवेशन, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
करीब 50 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं विश्वविद्यालय में
वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी में वर्तमान में लगभग 50 हजार छात्र-छात्राएं नियमित शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विश्वविद्यालय को टाइम्स हायर एजुकेशन यूनिवर्सिटी इम्पैक्ट रैंकिंग में विश्व स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त होने का भी उल्लेख किया गया है।
ऐसे में ग्रेटर नोएडा में इसके कैंपस की स्थापना को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह कैंपस एनसीआर के विद्यार्थियों के लिए वैश्विक शिक्षा, शोध और रोजगारपरक कौशल का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
एक नजर में
उत्तर प्रदेश में पहली बार विदेशी विश्वविद्यालय का कैंपस ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित।
कैंपस का नाम ‘जलसेतु’ रखा गया।
प्राधिकरण कार्यालय परिसर के टावर-2 में तीन फ्लोर पर कैंपस स्थापित होगा।
दिसंबर 2026 में कैंपस शुरू करने की तैयारी।
जल सुरक्षा के लिए ‘जलसेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना।
सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री प्रोग्राम शुरू होगा।
महिला सशक्तीकरण, बिजनेस, डाटा, इनोवेशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर जोर।
छात्रों को देश में रहते हुए अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और शोध के अवसर मिलेंगे।
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा, शोध, इनोवेशन और कौशल विकास की साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा।
उद्योगों की जरूरत के अनुरूप युवाओं को तैयार करने पर विशेष फोकस।


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