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मेरठ प्रकरण को लेकर बीकेयू भानू ने सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग


Vision Live / नोएडा
 मेरठ में किसान नेता दिग्विजय सिंह भाटी और दलित नेता मोहित जाटव के साथ कथित मारपीट के प्रकरण को लेकर भारतीय किसान यूनियन भानू ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन के नोएडा अध्यक्ष राजवीर मुखिया के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
राजवीर मुखिया ने आरोप लगाया कि मेरठ में किसान नेता दिग्विजय सिंह भाटी और दलित नेता मोहित जाटव के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से बर्बरता की गई। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह भाटी भारतीय किसान यूनियन बीआर अंबेडकर के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। संगठन का कहना है कि यदि किसी किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो आम नागरिकों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
बीकेयू भानू के पदाधिकारियों मनोज चौधरी और मीडिया प्रभारी सुभाष भाटी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
संगठन ने मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे के खिलाफ भी जांच कर कार्रवाई की मांग उठाई है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि किसी भी किसान नेता या आम नागरिक के साथ कथित दुर्व्यवहार और बल प्रयोग को स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।
बीकेयू भानू ने चेतावनी दी कि यदि प्रकरण में निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन प्रदेश स्तर पर आंदोलन का निर्णय ले सकता है। संगठन के नेताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसान नेताओं के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सुनील अवाना, प्रेम सिंह भाटी, ओमी प्रधान, किट्टी बैसोया, ऋषि अवाना, राजकुमार, रवि पहलवान, शहाबुद्दीन, श्याम दीक्षित, कर्मवीर बैंसला सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विजन लाइव न्यूज़ का विश्लेषण:
मेरठ प्रकरण में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे मामलों में आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। संगठन द्वारा की गई मांगों पर संबंधित प्रशासन और पुलिस विभाग का पक्ष सामने आना भी जरूरी होगा। किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी को दोषी ठहराने से पहले जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।
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