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अभिभावक-शिक्षक संवाद से तय होगी विद्यार्थियों की नई दिशा, श्री द्रोणाचार्य कॉलेज में ‘पहल–एक नई सोच’ सम्मेलन


29 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा से लेकर मोबाइल उपयोग और अनुशासन तक पर हुई चर्चा, अभिभावकों ने साझा किए अनुभव और दिए महत्वपूर्ण सुझाव
मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’ / ग्रेटर नोएडा
दनकौर, 22 अगस्त 2026। शिक्षा केवल कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व, संस्कार, अनुशासन और भविष्य के निर्माण की प्रक्रिया भी है। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर में शनिवार को “पहल–एक नई सोच” अभिभावक–शिक्षक सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ उनकी नियमित उपस्थिति, अनुशासन, व्यवहार, अध्ययन की आदतों और मोबाइल फोन के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अभिभावकों एवं शिक्षकों के बीच सार्थक संवाद हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन बी.एससी., वाणिज्य, बी.बी.ए./बी.सी.ए. एवं बी.एड. विभागों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम रजनीकान्त अग्रवाल, सचिव तथा डॉ. गिरीश कुमार वत्स, प्राचार्य के दिशा-निर्देशन में संपन्न हुआ।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई सम्मेलन की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ रजनीकान्त अग्रवाल, डॉ. गिरीश कुमार वत्स, डॉ. रश्मि गुप्ता, उपप्राचार्या एवं आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक, सुरेश चन्द्र एवं शारदा द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मंच संचालन विज्ञान संकाय के विभागाध्यक्ष अमित नागर ने किया।
29 वर्षों की यात्रा और ‘छोटे पौधे से वटवृक्ष’ बनने की कहानी
महाविद्यालय का परिचय देते हुए डॉ. रश्मि गुप्ता ने संस्थान की 29 वर्षों की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वर्गीय वेद प्रकाश अग्रवाल ने क्षेत्र में, विशेषकर बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महाविद्यालय की स्थापना का सपना देखा था।
उन्होंने कहा कि स्थापना के समय लगाया गया छोटा-सा पौधा आज वटवृक्ष का रूप ले चुका है। वर्तमान प्रबंध समिति—अध्यक्ष राकेश कुमार गर्ग, सचिव रजनीकान्त अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष मनीष कुमार अग्रवाल—तथा प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के नेतृत्व में महाविद्यालय निरंतर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
डॉ. रश्मि गुप्ता ने कहा कि जब अभिभावक और शिक्षक मिलकर विद्यार्थी के भविष्य को दिशा देते हैं, तो शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं रह जाती, बल्कि संस्कार, व्यक्तित्व और जीवन-निर्माण का माध्यम बन जाती है।
उन्होंने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से अभिभावकों को महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों, विभिन्न विभागों, उपलब्ध सुविधाओं, विद्यार्थियों की उपलब्धियों और संस्थान की विकास यात्रा की जानकारी दी। अभिभावकों ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए महाविद्यालय की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की।
पहल’ का उद्देश्य केवल बैठक नहीं, सहभागिता बढ़ाना
अमित नागर ने कहा कि “पहल–एक नई सोच” का उद्देश्य महाविद्यालय की कार्यप्रणाली को अधिक सुचारू, संगठित और अनुशासित बनाने के साथ अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के विकास में महाविद्यालय और परिवार दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी सोच के तहत सम्मेलन में अभिभावकों और शिक्षकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को प्राथमिकता दी गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंध समिति की ओर से अभिभावकों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
सचिव ने कहा—अभिभावकों का सहयोग जरूरी
महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महाविद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। महाविद्यालय विद्यार्थियों के विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, लेकिन इन प्रयासों को अपेक्षित सफलता तभी मिलेगी, जब अभिभावक भी शिक्षकों के साथ मिलकर विद्यार्थियों की प्रगति पर ध्यान दें।
उन्होंने अभिभावकों से महाविद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
मोबाइल फोन और अनुशासन पर प्राचार्य का विशेष जोर
प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने अभिभावकों से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, अध्ययन, अनुशासन और सकारात्मक व्यवहार पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को विद्यार्थियों की महाविद्यालयीन गतिविधियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने मोबाइल फोन के उपयोग पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत बताई, ताकि विद्यार्थी तकनीक का सदुपयोग करें और उसके नकारात्मक प्रभावों से बच सकें।
अभिभावकों ने भी खुलकर रखे अपने अनुभव
सम्मेलन की खास बात यह रही कि कार्यक्रम केवल वक्ताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अभिभावकों ने भी अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
सूरज सोलंकी ने कहा कि विद्यार्थियों की गतिविधियों की जानकारी उनके अभिभावकों को भी होनी चाहिए। ऋषि राज शर्मा ने कहा कि बच्चे, अभिभावक और अध्यापक मिलकर कार्य करें तो समाज के विकास की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षक सुरेश चन्द्र ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके दो बच्चों ने इसी महाविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद शिक्षक के रूप में सफलता हासिल की है।
डॉ. एन.सी. शर्मा ने बताया कि अन्य विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद महाविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी बेटी का प्रवेश इसी संस्थान में कराया।
इसी क्रम में बृजपाल सिंह ने शिक्षकों के मित्रवत व्यवहार, श्रीमती राधा ने शिक्षा व्यवस्था और लोकेश ने महाविद्यालय के अनुशासन की सराहना की।
शैक्षणिक प्रगति के साथ व्यक्तिगत विकास पर भी फोकस
सम्मेलन के दौरान विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, उपस्थिति, अनुशासन, व्यवहार और अध्ययन की आदतों पर शिक्षकों एवं अभिभावकों के बीच सार्थक चर्चा हुई। विद्यार्थियों की व्यक्तिगत प्रगति से जुड़े पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
संवाद के दौरान विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। इससे स्पष्ट हुआ कि संस्थान विद्यार्थी की केवल परीक्षा और परिणाम आधारित प्रगति के बजाय उसके समग्र व्यक्तित्व विकास पर भी अभिभावकों के साथ मिलकर ध्यान केंद्रित करना चाहता है।
बड़ी संख्या में अभिभावक और विद्यार्थी हुए शामिल
कार्यक्रम में डॉ. देवानन्द सिंह, डॉ. प्रीति रानी सेन, श्रीमती शशि नागर, डॉ. रश्मि जहाँ, डॉ. कोकिल, डॉ. प्रशान्त कन्नौजिया, डॉ. राजीव उर्फ पिन्टू, डॉ. सूर्य प्रताप राघव, डॉ. नाज़ परवीन, श्रीमती प्रीति शर्मा, इन्द्रजीत सिंह, डॉ. संगीता रावल, डॉ. रेशा, महींपाल सिंह, कु. चारू सिंह, कु. काजल कपासिया, श्रीमती सुनीता शर्मा, कु. रूचि शर्मा, अखिल कुमार, प्रिन्स त्यागी, अजय कुमार, करन नागर, पुनीत कुमार गुप्ता, बिजेन्द्र सिंह, रामकिशन सिंह, विनीत कुमार, अंकित नागर, रनवीर सिंह, मीनू सिंह एवं ज्ञान प्रकाश सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में अभिभावकों एवं छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता की।
विजन लाइव का विशेष विश्लेषण
‘पहल–एक नई सोच’ सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें शिक्षा को केवल अंक और परीक्षा के नजरिए से नहीं, बल्कि विद्यार्थी के संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण से जोड़कर देखा गया। आज के दौर में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ उनकी उपस्थिति, अनुशासन, व्यवहार, डिजिटल उपकरणों के उपयोग और एकाग्रता जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।
ऐसे में अभिभावक और शिक्षक यदि एक-दूसरे से नियमित संवाद बनाए रखते हैं तो विद्यार्थी की कमजोरियों को समय रहते पहचाना जा सकता है और उसकी क्षमताओं को बेहतर दिशा दी जा सकती है।
द्रोणाचार्य कॉलेज में आयोजित यह सम्मेलन इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में सामने आया, जहां संस्थान ने अभिभावकों को केवल सूचना देने के बजाय उन्हें विद्यार्थी की शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत प्रगति की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया।
निष्कर्ष 
अंत में प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने सभी अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
“पहल–एक नई सोच” सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि विद्यार्थी का उज्ज्वल भविष्य केवल शिक्षक या परिवार की अकेली जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दोनों के साझा प्रयास, निरंतर संवाद और सकारात्मक सहयोग से तैयार होता है।
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