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बंजर धरा से हरित धरोहर तक, ‘श्री अरण्यम’ की बदलती तस्वीर


"स्पेशल स्टोरी: करीब 8,000 वृक्षों ने बदली बंजर जमीन की पहचान, जनसहभागिता से तैयार हो रही हरित विरासत"

नोएडा। किसी बंजर जमीन को हरियाली से भर देना आसान काम नहीं। इसके लिए सिर्फ पौधे लगाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वर्षों तक निरंतर देखभाल, पानी, संरक्षण, सामूहिक श्रम और सबसे बढ़कर प्रकृति के प्रति संवेदनशील सोच की जरूरत होती है। सेक्टर-50, नोएडा स्थित ‘श्री अरण्यम सिटी फॉरेस्ट’ इसी सोच और संकल्प की एक ऐसी कहानी बनकर सामने आया है, जहां कभी बंजरता का सन्नाटा था और आज करीब 8,000 वृक्षों की हरितिमा दिखाई देती है।
यह कहानी केवल पौधारोपण की नहीं, बल्कि बंजर जमीन के हरित रूपांतरण, जनसहभागिता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की कहानी है।
"जब बंजर जमीन ने ओढ़ी हरित चुनरिया"
शहरों के तेजी से विस्तार के बीच हरित क्षेत्र लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे समय में श्री अरण्यम सिटी फॉरेस्ट का विकसित होना एक अलग संदेश देता है। जिस जमीन पर कभी हरियाली का अभाव था, वहां आज विभिन्न प्रजातियों के हजारों पेड़-पौधे अपनी जड़ें जमा चुके हैं।
इन वृक्षों के बीच केवल हरियाली ही नहीं, बल्कि एक बड़े पर्यावरणीय संकल्प की तस्वीर दिखाई देती है। पेड़ बड़े होने के साथ इस क्षेत्र को पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए संभावित आश्रय, लोगों के लिए प्राकृतिक वातावरण और शहर के लिए हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने में योगदान दे रहे हैं।
नोएडा प्राधिकरण के सहयोग तथा आर्ट ऑफ लिविंग, नोएडा के स्वयंसेवकों के निरंतर प्रयासों से विकसित श्री अरण्यम अब पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक भागीदारी का उदाहरण बनता जा रहा है।
"पौधारोपण से आगे बढ़कर पौधों के संरक्षण का संकल्प"
रविवार, 23 अगस्त 2026 को सुबह 8 से 10 बजे तक श्री अरण्यम सिटी फॉरेस्ट में विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवकों एवं पदाधिकारियों के साथ आम नागरिकों ने भी भाग लिया।
इस दौरान विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। लेकिन कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा। लोगों को यह संकल्प भी दिलाया गया कि जो पौधा लगाया जाए, उसकी देखभाल भी उसी जिम्मेदारी से की जाए।
यही वह सोच है जो सामान्य पौधारोपण कार्यक्रम और स्थायी हरित अभियान के बीच अंतर पैदा करती है।
"युवा बनें प्रकृति के प्रहरी"
कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग की संचालिका एवं कैलास ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल की डायरेक्टर सविता शर्मा ने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि युवा केवल राष्ट्र के भविष्य के निर्माता नहीं हैं, बल्कि प्रकृति के भी सजग प्रहरी हैं। उनके अनुसार, आज लगाया गया एक छोटा पौधा भविष्य में किसी बच्चे को छाया, किसी पक्षी को आश्रय और समाज को प्राणवायु दे सकता है।
सविता शर्मा ने युवाओं से अपील की कि जन्मदिन, वर्षगांठ और अन्य शुभ अवसरों पर पौधारोपण को एक सामाजिक संस्कार के रूप में अपनाया जाए। साथ ही, पौधा लगाने के बाद उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी ली जाए।
उनका संदेश स्पष्ट था—पेड़ लगाने की तस्वीर से ज्यादा महत्वपूर्ण उस पेड़ का भविष्य है।
"श्री अरण्यम में दिखा सामूहिक प्रयास"
वृक्षारोपण कार्यक्रम में पंकज, विपुल गुप्ता संजय, अरुणिमा, छवि, राखी, इन्दु, सरला और संजय सहित अनेक लोगों ने पौधारोपण किया। मीडिया प्रभारी भगवत प्रसाद शर्मा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष प्रकृति के ऐसे मौन प्रहरी हैं जो बिना किसी अपेक्षा के मानव समाज को प्राणवायु, छाया और पर्यावरणीय संतुलन प्रदान करते हैं।
इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी मानने के बजाय प्रत्येक नागरिक को अपनी भूमिका तय करनी होगी।
"करीब 8,000 वृक्ष—सिर्फ संख्या नहीं, एक संदेश"
श्री अरण्यम में करीब 8,000 वृक्षों की मौजूदगी इस पहल के विस्तार को दर्शाती है। हालांकि किसी भी हरित परियोजना की सफलता केवल लगाए गए पौधों की संख्या से तय नहीं होती। वास्तविक सफलता इस बात से जुड़ी होती है कि कितने पौधे जीवित रहे, कितने वृक्ष बने और उनका संरक्षण कितने लंबे समय तक हुआ।
यही वजह है कि श्री अरण्यम की कहानी में पौधारोपण के साथ संरक्षण और संवर्धन को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
यदि इस तरह के हरित क्षेत्रों का लंबे समय तक संरक्षण होता है, तो ये भविष्य में शहरों के लिए महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संपदा बन सकते हैं।
"नोएडा के शहरी विकास के बीच हरित संतुलन की जरूरत"
नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से हो रहे शहरी एवं औद्योगिक विकास के बीच हरित क्षेत्रों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऊंची इमारतों, सड़कों, व्यावसायिक गतिविधियों और बढ़ती आबादी के बीच ऐसे क्षेत्र शहर को प्राकृतिक संतुलन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
श्री अरण्यम इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। यह मॉडल बताता है कि शहरी विकास के साथ यदि सामुदायिक भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ा जाए तो बंजर भूमि को भी उपयोगी हरित क्षेत्र में बदला जा सकता है।
"एक पौधा, एक जिम्मेदारी"
कार्यक्रम के समापन पर अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा पहले से लगाए गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया गया।
यह संकल्प अपने आप में इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्योंकि पर्यावरण बचाने की शुरुआत किसी बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक पौधे की जिम्मेदारी स्वीकार करने से हो सकती है।
"श्री अरण्यम की कहानी क्या कहती है?"
‘श्री अरण्यम’ केवल एक सिटी फॉरेस्ट का नाम नहीं रह गया है। यह एक विचार को सामने रखता है—अगर सामूहिक इच्छाशक्ति हो, तो बंजर जमीन को भी हरित धरोहर में बदला जा सकता है।
यहां लगाए गए वृक्ष आने वाले वर्षों में और बड़े होंगे। उनकी छाया बढ़ेगी, हरियाली का दायरा बढ़ेगा और संभव है कि यह क्षेत्र शहर के लोगों के लिए प्रकृति के करीब आने का महत्वपूर्ण स्थान बन जाए।
इसलिए श्री अरण्यम की असली कहानी आज के पौधारोपण कार्यक्रम से आगे की है। इसकी असली परीक्षा आने वाले वर्षों में होगी—जब आज लगाए और पहले से लगाए गए पौधे वृक्ष बनेंगे और अगली पीढ़ी इस हरित धरोहर को अपने हिस्से की विरासत के रूप में देखेगी।
Vision Live News का विशेष विश्लेषण
श्री अरण्यम की सबसे बड़ी उपलब्धि करीब 8,000 वृक्षों की संख्या नहीं, बल्कि उस सोच का विकसित होना है जिसमें पौधारोपण को सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरणीय संस्कार से जोड़ा जा रहा है।
नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में ऐसे हरित क्षेत्रों का महत्व और बढ़ जाता है। लेकिन इसके साथ तीन बातें लगातार जरूरी रहेंगी—पौधों का संरक्षण, वैज्ञानिक तरीके से रखरखाव और स्थानीय नागरिकों की निरंतर भागीदारी।
यदि ये तीनों पहलू लंबे समय तक कायम रहते हैं, तो श्री अरण्यम आने वाले वर्षों में केवल एक सिटी फॉरेस्ट नहीं, बल्कि ‘बंजर भूमि से हरित धरोहर’ के सफल मॉडल के रूप में पहचान बना सकता है।
"वृक्ष रहें तो प्राण रहें,
वृक्ष रहें तो सांस;
हरित धरा की गोद में,
सुरक्षित रहे विकास।"
सविता शर्मा
डायरेक्टर, कैलास ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल
संचालिका, आर्ट ऑफ लिविंग
रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"
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