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हुनर की रोशनी से विशेष बच्चों के आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ा एक और कदम, आर्या फैशन्स ने कराया हस्तशिल्प कला प्रशिक्षण


ऑपरेशन अपराजेय के विजन को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए विशेष बच्चों को दिया कौशल, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का मंच
    मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
समाज में बदलाव केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि उन छोटी-छोटी पहलों से भी आता है, जो किसी के जीवन में उम्मीद, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का रास्ता पैदा करती हैं। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए आर्या फैशन्स ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक ऐसी पहल की, जिसमें सहायता से कहीं आगे बढ़कर उन्हें हुनर सिखाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
आर्या फैशन्स की संस्थापिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. खुशबू सिंह के नेतृत्व में कंपनी परिसर में विशेष बच्चों के लिए हस्तशिल्प कला एवं आभूषण निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेष बच्चों ने न केवल हस्तशिल्प और ज्वेलरी बनाने की बारीकियां सीखीं, बल्कि अपने हाथों से कुछ नया तैयार कर यह संदेश भी दिया कि अवसर मिलने पर विशेष बच्चे भी अपनी रचनात्मक क्षमता और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं।
इस विशेष कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर एवं वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी सिंह रहीं। उनके साथ पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम ने सामाजिक संस्था, उद्योग जगत, पुलिस प्रशासन और विशेष बच्चों के बीच सहयोग एवं संवेदनशीलता की एक नई मिसाल पेश की।
ऑपरेशन अपराजेय से प्रेरणा लेकर आर्या फैशन्स ने बढ़ाया कदम
गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा 9 जून 2026 को शुरू किए गए "ऑपरेशन अपराजेय" का उद्देश्य विशेष बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, सम्मान, अवसर और कौशल विकास की दिशा में प्रभावी पहल करना है। इसी विजन को सामाजिक स्तर पर आगे बढ़ाने की भावना से आर्या फैशन्स ने विशेष बच्चों को कौशल प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया।
डॉ. खुशबू सिंह ने बताया कि लक्ष्मी सिंह के विजन और मार्गदर्शन से प्रेरणा लेते हुए आर्या फैशन्स ने यह महसूस किया कि विशेष बच्चों के लिए केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है। यदि उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाए, उन्हें काम करने का अवसर मिले और उनकी रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया जाए, तो वे भविष्य में अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ कंपनी ने विशेष बच्चों के लिए हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है और इसे भविष्य में भी निरंतर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्य अतिथि लक्ष्मी सिंह ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम में गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने विशेष बच्चों के साथ समय बिताया और प्रशिक्षण गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों द्वारा तैयार किए जा रहे हस्तशिल्प और आभूषणों को देखा तथा उनकी प्रतिभा और उत्साह की सराहना की।
उन्होंने कहा कि विशेष बच्चों की प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने के लिए समाज के साथ-साथ उद्योग जगत को भी आगे आना होगा। ऐसे बच्चों को सम्मान, सुरक्षा और अवसर उपलब्ध कराना सामूहिक जिम्मेदारी है।
लक्ष्मी सिंह ने डॉ. खुशबू सिंह की पहल की सराहना करते हुए कहा कि एक महिला उद्यमी के रूप में उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी को जिस तरह कौशल विकास से जोड़ा है, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आर्या फैशन्स की पहल से प्रेरणा लेकर अन्य औद्योगिक संस्थाएं और सामाजिक संगठन भी विशेष बच्चों के कौशल विकास के लिए आगे आएंगे।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विशेष बच्चों को केवल आर्थिक सहायता देने की बजाय कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक परिणाम देने वाला कदम हो सकता है।
पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में पुलिस प्रशासन की ओर से संयुक्त पुलिस आयुक्त एवं डीआईजी राजीव नारायण मिश्रा, डीसीपी एवं ऑपरेशन अपराजेय की नोडल अधिकारी सुनीति, एसीपी इकोटेक-3 राजीव, एसएचओ इकोटेक-3 तथा चौकी इंचार्ज सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम के महत्व को और बढ़ाया तथा यह संदेश दिया कि विशेष बच्चों के विकास और सम्मान से जुड़े प्रयासों में प्रशासनिक स्तर पर भी संवेदनशीलता और सहयोग की आवश्यकता है।
अभय रेनबो किड्स फाउंडेशन के करीब 30 बच्चों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में अभय रेनबो किड्स फाउंडेशन की प्रिंसिपल दिशा कपूर और उनकी पूरी टीम के साथ करीब 30 विशेष बच्चे शामिल हुए।
इन बच्चों में ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम और अन्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चे शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को उनकी क्षमता और समझ के अनुरूप विभिन्न गतिविधियों में शामिल किया गया।
प्रशिक्षकों ने बच्चों को हस्तशिल्प के अलग-अलग चरणों से परिचित कराया। बच्चों को बताया गया कि किस प्रकार विभिन्न सामग्री को जोड़कर आकर्षक आभूषण और क्राफ्ट तैयार किए जा सकते हैं। इसके साथ ही तैयार उत्पाद की पैकिंग और उसे व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने की जानकारी भी दी गई।
लाइव डेमो ने बच्चों में बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण आभूषण निर्माण का लाइव डेमो रहा। आर्या फैशन्स के अनुभवी कारीगरों और प्रशिक्षकों ने बच्चों के सामने आभूषण तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया।
बच्चों ने बड़ी उत्सुकता के साथ पूरी प्रक्रिया को देखा। इसके बाद उन्हें स्वयं सामग्री के साथ काम करने का अवसर दिया गया। कई बच्चों ने अपने हाथों से आभूषण और छोटे-छोटे क्राफ्ट तैयार करने का प्रयास किया।
बच्चों ने प्रशिक्षण के दौरान सवाल पूछे और प्रशिक्षकों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। अपने हाथों से तैयार वस्तुओं को देखकर बच्चों के चेहरों पर दिखाई देने वाली खुशी और आत्मविश्वास इस कार्यक्रम की सबसे भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर रही।
आर्या फैशन्स के एमडी अभिषेक चौहान और टीम की अहम भूमिका
कार्यक्रम की रूपरेखा को सफल बनाने में आर्या फैशन्स के एमडी अभिषेक चौहान और उनकी पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कंपनी के वरिष्ठ कर्मचारियों और अनुभवी कारीगरों ने बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए विशेष रूप से समय दिया।
प्रशिक्षण के दौरान टीम ने बच्चों के साथ बेहद धैर्य और आत्मीयता के साथ काम किया। प्रत्येक बच्चे की क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें गतिविधियों में शामिल किया गया।
आर्या फैशन्स की टीम का प्रयास रहा कि बच्चों के लिए प्रशिक्षण का माहौल ऐसा हो, जहां वे बिना किसी संकोच के सीख सकें, प्रश्न पूछ सकें और अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन कर सकें।
ग्रामीण महिलाओं से विशेष बच्चों तक पहुंची आत्मनिर्भरता की सोच
आर्या फैशन्स की सामाजिक सोच का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण महिलाओं को हुनर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने से जुड़ा रहा है। कंपनी का मानना है कि हुनर किसी व्यक्ति को केवल काम नहीं देता, बल्कि आत्मविश्वास और पहचान भी देता है।
इसी सोच को विशेष बच्चों तक पहुंचाने का प्रयास इस कार्यक्रम के माध्यम से किया गया।
डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि जिस प्रकार ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया जा रहा है, उसी तरह विशेष बच्चों को भी उनकी क्षमता के अनुरूप कौशल प्रदान किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि हर बच्चा अपनी तरह से विशेष होता है और उसकी प्रतिभा को पहचानना समाज की जिम्मेदारी है।
एक दिन का कार्यक्रम नहीं, आगे भी जारी रहेगा प्रशिक्षण
आर्या फैशन्स ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी। कंपनी की ओर से भविष्य में भी विशेष बच्चों के लिए निरंतर सहयोग और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ. खुशबू सिंह के अनुसार, आर्या फैशन्स आगे भी इन बच्चों को निःशुल्क सामग्री और तैयार उत्पाद उपलब्ध कराएगा। कंपनी की टीम समय-समय पर स्कूल जाकर बच्चों को प्रशिक्षण देने का प्रयास करेगी।
इसका उद्देश्य बच्चों को लगातार अभ्यास और प्रशिक्षण का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे धीरे-धीरे हस्तशिल्प एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों में अपनी दक्षता बढ़ा सकें।
कौशल विकास के साथ मानसिक विकास पर भी जोर
इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को कोई उत्पाद बनाना सिखाना नहीं, बल्कि उनके अंदर आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच, धैर्य और उपलब्धि की भावना को बढ़ावा देना भी है।
जब कोई बच्चा अपने हाथों से कोई वस्तु तैयार करता है और उसे देखकर यह महसूस करता है कि उसने स्वयं कुछ बनाया है, तो यह अनुभव उसके आत्मविश्वास को मजबूत कर सकता है।
आर्या फैशन्स की टीम ने इसी सकारात्मक सोच के साथ बच्चों को प्रशिक्षण दिया। बच्चों को उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे पूरे कार्यक्रम में सकारात्मक और उत्साहपूर्ण वातावरण बना रहा।
आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में संभावनाओं का रास्ता
कार्यक्रम के पीछे एक दीर्घकालिक सोच आर्थिक सशक्तिकरण से भी जुड़ी है। आर्या फैशन्स का मानना है कि यदि विशेष बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार लगातार प्रशिक्षण और उपयुक्त अवसर मिलें, तो भविष्य में उनके लिए विभिन्न प्रकार के रचनात्मक कार्यों की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।
हस्तशिल्प, पैकिंग, क्राफ्ट और आभूषण निर्माण जैसी गतिविधियां उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण का माध्यम बन सकती हैं।
इस दिशा में आर्या फैशन्स का प्रयास विशेष बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें उनकी प्रतिभा के आधार पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
पुलिस, उद्योग और सामाजिक संस्था का मिला मंच
इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पुलिस प्रशासन, औद्योगिक क्षेत्र, सामाजिक सोच और विशेष बच्चों की शिक्षा से जुड़े संस्थान एक ही मंच पर दिखाई दिए।
पुलिस प्रशासन की ओर से ऑपरेशन अपराजेय के माध्यम से विशेष बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण का विजन सामने रखा गया, वहीं आर्या फैशन्स ने इस विजन को कौशल विकास और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास किया।
अभय रेनबो किड्स फाउंडेशन ने बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित कर इस पहल को जमीन पर प्रभावी रूप दिया।
समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश
कार्यक्रम के समापन पर मौजूद अतिथियों और आयोजकों ने कहा कि विशेष बच्चों के प्रति समाज का नजरिया केवल सहानुभूति तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्हें भी अपनी क्षमता के अनुसार सम्मान, अवसर, प्रशिक्षण और जिम्मेदारी मिलने का अधिकार है।
आर्या फैशन्स की यह पहल इसी सोच को आगे बढ़ाती दिखाई दी।
आज कंपनी परिसर में विशेष बच्चों के हाथों से तैयार हुए छोटे-छोटे क्राफ्ट और आभूषण केवल हस्तशिल्प की वस्तुएं नहीं थे, बल्कि वे आत्मविश्वास, संभावना और आत्मनिर्भरता की नई कहानी कह रहे थे।
"हर बच्चे में क्षमता है, जरूरत सिर्फ अवसर देने की है"
आर्या फैशन्स की इस पहल का मूल संदेश यही रहा कि किसी बच्चे की विशेष आवश्यकता उसकी प्रतिभा की सीमा नहीं है। सही मार्गदर्शन, धैर्य, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर विशेष बच्चे भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सकते हैं।
ऑपरेशन अपराजेय के विजन को कौशल विकास से जोड़ते हुए आर्या फैशन्स ने जिस पहल की शुरुआत की है, वह आने वाले समय में एक निरंतर अभियान का रूप ले सकती है। यदि उद्योग, सामाजिक संस्थाएं और प्रशासन इसी तरह मिलकर आगे बढ़ें, तो विशेष बच्चों के लिए सुरक्षा और संरक्षण के साथ-साथ सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर भविष्य के नए रास्ते भी तैयार किए जा सकते हैं।


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