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इन्दर नागर की 23 साल की संघर्षगाथा, अब दादरी-62 से 2027 के लिए भाजपा टिकट की दावेदारी


छात्र राजनीति से किसान आंदोलनों तक सक्रिय भूमिका, जेल और मुकदमों का सामना करने का दावा; युवा मोर्चा से किसान मोर्चा तक संगठन में निभाईं कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ दादरी विधानसभा-62
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर गौतमबुद्धनगर की दादरी विधानसभा सीट पर भाजपा के भीतर सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच कई संभावित चेहरे अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन और संगठनात्मक सक्रियता के आधार पर दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। इसी क्रम में एडवोकेट इन्द्रजीत गुर्जर उर्फ इन्दर नागर ने दादरी विधानसभा क्षेत्र-62 से भाजपा के टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।
इन्दर नागर की दावेदारी की खास बात यह है कि वे अपने करीब 23 वर्षों के राजनीतिक सफर को छात्र राजनीति, आंदोलनों, किसान संघर्ष, युवाओं के मुद्दों, संगठनात्मक जिम्मेदारियों और चुनावी प्रबंधन के अनुभव से जोड़कर देखते हैं। उनका राजनीतिक परिचय बताता है कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की और धीरे-धीरे भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियों तक पहुंचे।
दादरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की लगातार मजबूत होती राजनीतिक स्थिति के बीच 2027 को लेकर टिकट की चर्चा स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार तेजपाल सिंह नागर ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में दादरी सीट से भाजपा को जीत दिलाई थी।  ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले भाजपा के भीतर संभावित दावेदारों की सक्रियता को स्थानीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मिलक लच्छी से शुरू हुआ सफर, छात्र राजनीति बनी पहली सीढ़ी
गांव मिलक लच्छी, पोस्ट वैदपुरा, तहसील दादरी निवासी इन्दर नागर का जन्म 7 दिसंबर 1982 को हुआ। वे बीए और एलएलबी शिक्षित हैं तथा व्यापार एवं सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं।
उनके अनुसार गरीब, असहाय, निर्धन, कमजोर वर्ग और समाज के सभी वर्गों की सेवा करना उनकी राजनीतिक और सामाजिक सोच का हिस्सा रहा है। क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत और सरकारी स्तर पर प्रयास करते रहना भी वे अपनी प्राथमिकता बताते हैं।
उनकी राजनीतिक यात्रा वर्ष 2003 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महाविद्यालय अध्यक्ष के रूप में शुरू हुई। वर्ष 2004 में जिला मंत्री और वर्ष 2005 में जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली।
यही वह दौर था जब इन्दर नागर ने छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन और संघर्ष की राजनीति को करीब से देखा और उसमें सक्रिय भागीदारी की।
छात्र संघ चुनाव बहाली बना राजनीतिक पहचान का बड़ा पड़ाव
इन्दर नागर के राजनीतिक सफर में छात्र संघ चुनावों की बहाली का आंदोलन विशेष महत्व रखता है। उनके राजनीतिक परिचय के अनुसार वर्ष 2004 में लंबे समय से लंबित छात्र संघ चुनावों को बहाल कराने के लिए उन्होंने बड़े आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनका दावा है कि छात्र संघ चुनावों की बहाली, कॉलेजों में सीट बढ़ाने, दाखिले की समस्याओं और विद्यार्थियों से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर आंदोलन किए गए। इसी दौरान उन्हें गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जिम्मेदारी भी मिली।
छात्र राजनीति से जुड़े इन आंदोलनों ने उन्हें युवाओं के बीच पहचान दिलाई और यही पहचान आगे चलकर उनके संगठनात्मक सफर की नींव बनी।
कॉलेजों में सीट बढ़ाने से लेकर इवनिंग क्लास तक संघर्ष
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से जुड़े छात्र हितों के मुद्दों पर भी इन्दर नागर ने आंदोलन करने का दावा किया है।
उनके अनुसार स्नातक और परास्नातक स्तर पर सीटों की संख्या बढ़ाने तथा इवनिंग क्लास शुरू कराने की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल तक की गई। उनका कहना है कि इस संघर्ष से बड़ी संख्या में छात्रों को लाभ मिला।
विश्वविद्यालय से जुड़े चर्चित 'कॉपी कांड' में एलएलबी छात्रों की परीक्षा कॉपियां खेतों में मिलने के मामले को लेकर भी आंदोलन किया गया। उनके अनुसार आंदोलन के बाद छात्रों के हित में परीक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए गए और बैक पेपर की व्यवस्था में राहत मिली।
डोनेशन के खिलाफ मोर्चा, गरीब छात्रों को दिलाया दाखिला
इन्दर नागर के राजनीतिक परिचय में शिक्षा के क्षेत्र में डोनेशन प्रथा के खिलाफ संघर्ष को भी प्रमुखता दी गई है।
उनका दावा है कि कई ऐसे शिक्षण संस्थानों के खिलाफ आंदोलन किए गए, जो डोनेशन के लिए चर्चित थे। गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को बिना डोनेशन दाखिला दिलाने के लिए भी प्रयास किए गए।
उनके समर्थक इस भूमिका को उनकी राजनीति के उस पक्ष से जोड़ते हैं जिसमें छात्र और कमजोर वर्ग को अवसर दिलाने की कोशिश को प्रमुखता दी गई।
किसान आंदोलनों ने बदली राजनीतिक पहचान
छात्र राजनीति के बाद इन्दर नागर की सक्रियता का बड़ा क्षेत्र किसान आंदोलन बना। गौतमबुद्धनगर और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर किसानों के बीच सक्रिय रहने का दावा उनके राजनीतिक परिचय में किया गया है।
वर्ष 2010 में ग्रेटर नोएडा वेस्ट से शुरू हुए किसान आंदोलन को लेकर वे कई गांवों में पंचायतों और जनजागरूकता अभियानों से जुड़े रहे। उनका दावा है कि किसानों को उनके अधिकारों के लिए संगठित किया गया और न्यायालय का रास्ता अपनाने के लिए भी जागरूक किया गया।
अतिरिक्त मुआवजा और 10 प्रतिशत विकसित आबादी के प्लॉट जैसी मांगों को लेकर चले किसान संघर्षों में भी उनकी सक्रियता का उल्लेख है।
भट्टा पारसौल और घोड़ी बछेड़ा आंदोलनों में सक्रियता
इन्दर नागर के राजनीतिक परिचय में भट्टा पारसौल और घोड़ी बछेड़ा जैसे चर्चित किसान आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने का भी दावा किया गया है।
किसानों की भूमि, आबादी और अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन के दौरान किसानों के साथ खड़े रहने की बात कही गई है। उनका दावा है कि कई गांवों में किसानों के दबाव और आंदोलनों के कारण अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और इसे किसानों की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा गया।
पुश्तैनी आबादी के मुद्दे पर भी किसानों के साथ खड़े होने का दावा
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में किसानों की पुश्तैनी आबादी को लेकर लंबे समय से विवाद और आंदोलन होते रहे हैं। इन्दर नागर का दावा है कि जब किसानों की आबादी तोड़े जाने की कार्रवाई शुरू हुई तो उन्होंने किसानों के साथ मौके पर खड़े होकर विरोध किया।
उनके अनुसार आंदोलन और जनदबाव के बाद प्राधिकरण को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा।
यही किसान मुद्दे उनके राजनीतिक सफर में एक ऐसे पक्ष को सामने लाते हैं, जिसके आधार पर वे खुद को केवल संगठनात्मक कार्यकर्ता नहीं बल्कि जमीनी संघर्ष से जुड़े नेता के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
बिजली आंदोलन और 28 दिन जेल में रहने का दावा
वर्ष 2010 में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की बिजली व्यवस्था को लेकर भी इन्दर नागर ने आंदोलन किया। उनके अनुसार उस समय क्षेत्र में बिजली आपूर्ति गाजियाबाद से होती थी और बिजली व्यवस्था की खराब स्थिति को लेकर उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन किया।
उनका दावा है कि इसी आंदोलन के दौरान उन्हें 28 दिन जेल में रहना पड़ा।
उनके राजनीतिक परिचय में जनहित के आंदोलनों के दौरान मुकदमे दर्ज होने और जेल जाने का भी उल्लेख है। वे इसे अपने राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बताते हैं।
शराब की दुकानों के खिलाफ भी आंदोलन
इन्दर नागर ने शिक्षण संस्थानों के आसपास शराब की दुकानों को हटाने के लिए भी आंदोलन करने का दावा किया है।
उनके अनुसार शिक्षण संस्थानों के आसपास शराब की दुकानों के विरोध में लगातार आवाज उठाई गई। उनका दावा है कि आंदोलन के दबाव के बाद कई स्थानों से ऐसे ठेकों को हटाने का निर्णय लिया गया।
इस मुद्दे को वे युवाओं और विद्यार्थियों के हितों से जोड़कर देखते हैं।
बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन और युवाओं को रोजगार दिलाने का दावा
राजनीतिक परिचय के अनुसार बेरोजगारी के मुद्दे पर भी इन्दर नागर ने बड़ा आंदोलन किया। उनका दावा है कि आंदोलन के बाद कई युवाओं को रोजगार दिलाने में मदद की गई।
युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराना उनकी राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल बताया गया है।
दादरी क्षेत्र में तेजी से हो रहे औद्योगिक विस्तार के बीच स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता का मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनाव में भी महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में इन्दर नागर का युवाओं से जुड़ा पुराना राजनीतिक एजेंडा उनकी दावेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
लाल चौक तक पहुंची राष्ट्रवादी राजनीति
इन्दर नागर के राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण अध्याय वर्ष 2009 की भाजपा की राष्ट्रीय एकता यात्रा से जुड़ा है।
उनके अनुसार उस समय वे भाजपा युवा मोर्चा के पश्चिमी क्षेत्रीय प्रभारी थे। राष्ट्रीय एकता यात्रा के तहत गौतमबुद्धनगर से कार्यकर्ताओं के साथ कश्मीर के लाल चौक तक पहुंचने और तिरंगा फहराने के अभियान में भाग लिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तारी देने का भी दावा किया गया है।
यह दौर उनके राजनीतिक जीवन में संगठनात्मक और राष्ट्रवादी सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया जाता है।
महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ भी रहे सक्रिय
इन्दर नागर के राजनीतिक परिचय में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ संसद घेराव में भाग लेने का उल्लेख है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भी महंगाई, भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी की बात कही गई है। उनका दावा है कि इस दौरान पुलिस कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा।
मायावती, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के कार्यकाल में विपक्षी आंदोलनों में भागीदारी और सरकार के खिलाफ जनहित के मुद्दों को उठाने का भी उल्लेख उनके परिचय में किया गया है।
भाजपा में संगठनात्मक सफर भी लंबा
इन्दर नागर की दावेदारी का दूसरा मजबूत आधार उनका भाजपा संगठन के साथ लंबा जुड़ाव है।
उनके राजनीतिक परिचय के अनुसार—
2003 — महाविद्यालय अध्यक्ष, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
2004 — जिला मंत्री, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
2005 — जिला महामंत्री, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
2007 — भाजपा की प्राथमिक सदस्यता
2008 — विभाग संयोजक, युवा मोर्चा भाजपा
2010 — प्रभारी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश युवा मोर्चा
2011 — जिला अध्यक्ष, युवा मोर्चा भाजपा
2013 से 2019 तक — प्रदेश मंत्री, युवा मोर्चा भाजपा उत्तर प्रदेश
2019 — क्षेत्रीय महामंत्री, किसान मोर्चा भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश
2021 — प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, किसान मोर्चा भाजपा उत्तर प्रदेश
इस लिहाज से वे संगठन के छात्र, युवा और किसान मोर्चे से जुड़े विभिन्न स्तरों पर काम करने का अनुभव रखते हैं।
चुनावी मैदान में भी निभाई अहम जिम्मेदारियां
इन्दर नागर अपनी दावेदारी में चुनावी अनुभव को भी प्रमुखता दे रहे हैं।
2009 लोकसभा चुनाव: भाजपा प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा के चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका।
2014 लोकसभा चुनाव: डॉ. महेश शर्मा के पक्ष में चुनाव प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी।
2017 विधानसभा चुनाव: दादरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी तेजपाल नागर के चुनाव अभियान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने का दावा।
2019 लोकसभा चुनाव: डॉ. महेश शर्मा की चुनावी रैलियों के संयोजन में भूमिका।
2024 लोकसभा चुनाव: मतगणना और पोलिंग स्टेशन संयोजक की जिम्मेदारी निभाने का दावा।
दादरी में 2017 में भाजपा ने तेजपाल सिंह नागर को उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने जीत दर्ज की थी; 2022 में भी भाजपा ने सीट बरकरार रखी।
इस लिहाज से इन्दर नागर के लिए यह चुनावी अनुभव केवल संगठनात्मक पदों तक सीमित नहीं बल्कि मैदान में चुनाव लड़ाने और चुनावी व्यवस्था को समझने के अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
मीडिया और सोशल मीडिया में भी सक्रिय
इन्दर नागर के राजनीतिक परिचय में सोशल मीडिया और मीडिया से बेहतर संपर्क का भी उल्लेख किया गया है।
उनके अनुसार फेसबुक और व्हाट्सऐप पर हजारों लोग उनसे जुड़े हुए हैं। स्थानीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ भी उनके मधुर संबंध और लगातार संवाद का दावा किया गया है।
आज के चुनावी दौर में सोशल मीडिया केवल प्रचार का माध्यम नहीं बल्कि जनसंपर्क और राजनीतिक नैरेटिव बनाने का महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बन चुका है। ऐसे में किसी दावेदार का डिजिटल नेटवर्क भी पार्टी के लिए एक अतिरिक्त राजनीतिक संसाधन माना जा सकता है।
व्यक्तित्व को भी बनाया दावेदारी का आधार
इन्दर नागर अपने परिचय में स्वयं को मृदुभाषी, विनम्र, अनुशासित और स्वच्छ छवि वाला सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं।
उनके राजनीतिक परिचय में ईमानदार, लगनशील, निष्ठावान, दयालु, संघर्षशील, जुझारू और कार्यशील जैसे गुणों का उल्लेख किया गया है।
युवा और बुजुर्गों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहने तथा समाज के कमजोर वर्गों की सेवा करने को भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
दावेदारी के पीछे क्या है राजनीतिक गणित?
दादरी विधानसभा में भाजपा की लगातार दो बड़ी जीतों के बाद 2027 का चुनाव पार्टी के लिए एक अलग तरह की चुनौती और अवसर दोनों लेकर आएगा। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार 2017 में तेजपाल सिंह नागर ने बड़े अंतर से जीत हासिल की थी और 2022 में उनकी जीत का अंतर और भी बढ़ा।
ऐसे राजनीतिक माहौल में किसी भी नए दावेदार के लिए केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता पर्याप्त नहीं होगी। संगठन के भीतर स्वीकार्यता, बूथ स्तर का नेटवर्क, स्थानीय जनसंपर्क, पार्टी के प्रति लंबे समय की निष्ठा और चुनावी प्रबंधन की क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इन्दर नागर अपनी दावेदारी में इन्हीं पहलुओं को सामने रख रहे हैं।
उनका राजनीतिक संदेश मूल रूप से यह है कि उन्होंने भाजपा के लिए केवल चुनाव के समय काम नहीं किया, बल्कि छात्र जीवन से संगठन और जनआंदोलनों के माध्यम से लगातार सक्रिय रहे हैं।
'टिकट की दावेदारी' से आगे 'जनप्रतिनिधित्व' का लक्ष्य
इन्दर नागर की दावेदारी को केवल टिकट मांगने की राजनीतिक कवायद के रूप में नहीं देखा जाए तो उनके पूरे परिचय में एक लंबी राजनीतिक यात्रा का दावा दिखाई देता है।
छात्र नेता से युवा मोर्चा पदाधिकारी, किसान मोर्चा के क्षेत्रीय पदाधिकारी और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य तक पहुंचने के बाद अब वे विधानसभा की राजनीति में प्रत्यक्ष जनप्रतिनिधित्व की भूमिका चाहते हैं।
उनका कहना है कि यदि भाजपा नेतृत्व उन्हें दादरी विधानसभा से अवसर देता है तो वे केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के साथ क्षेत्र के विकास, युवाओं के रोजगार, किसानों की समस्याओं, शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देंगे।
आंदोलन से संगठन और अब चुनावी दावेदारी तक
इन्दर नागर की राजनीतिक कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि उनके द्वारा प्रस्तुत परिचय में राजनीति का सफर आंदोलन → संगठन → चुनाव प्रबंधन → जनप्रतिनिधित्व की दिशा में दिखाई देता है।
करीब 23 वर्ष पहले छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर आज दादरी विधानसभा की टिकट की दावेदारी तक पहुंच चुका है।
किसान आंदोलन, छात्र हित, बेरोजगारी, बिजली, शिक्षा, डोनेशन, भूमि अधिग्रहण, राष्ट्रीय एकता यात्रा और चुनावी अभियानों में सक्रियता को वे अपनी राजनीतिक पूंजी मानते हैं।
अब देखना यह होगा कि भाजपा नेतृत्व 2027 के लिए दादरी विधानसभा की रणनीति बनाते समय उनके इस लंबे संगठनात्मक और आंदोलनकारी अनुभव को किस नजरिए से देखता है।
दादरी की राजनीति में 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन टिकट की दौड़ ने दस्तक दे दी है। इन्दर नागर ने अपनी दावेदारी के जरिए यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वे इस दौड़ में स्वयं को एक लंबे समय से सक्रिय, संघर्षशील और संगठन से जुड़े भाजपा कार्यकर्ता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल उनकी दावेदारी को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व के स्तर पर होना है। लेकिन इतना तय है कि दादरी-62 की 2027 की सियासी कहानी में इन्दर नागर का नाम अब चर्चा के दायरे में आ गया है।

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