BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

हाईटेक शहर या 'वॉटर पार्क'? पहली ही बारिश में ग्रेटर नोएडा हुआ पानी-पानी, विकास के दावे भी बह गए

स्पेशल न्यूज़ स्टोरी:---हाईटेक शहर या 'वॉटर पार्क'? पहली ही बारिश में ग्रेटर नोएडा हुआ पानी-पानी, विकास के दावे भी बह गए
रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
उत्तर प्रदेश का सबसे आधुनिक, सबसे योजनाबद्ध और सबसे हाईटेक शहर कहलाने वाला ग्रेटर नोएडा मानसून की पहली ही जोरदार बारिश में ऐसी तस्वीर पेश करेगा, शायद इसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी। कुछ घंटों की बारिश ने करोड़ों रुपये के विकास कार्यों, स्मार्ट सिटी जैसी सोच और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम के दावों को पानी में बहा दिया।
ऐसा लगा मानो शहर ने आधुनिक नगर की जगह अचानक जलनगरी का रूप धारण कर लिया हो। जहां सड़कें थीं, वहां पानी था; जहां वाहन चलते थे, वहां लोग पानी की गहराई नापते दिखाई दिए। लोगों ने सोशल मीडिया पर मजाक करते हुए लिखा कि यदि यही हाल रहा तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सड़क परिवहन के साथ-साथ नाव परिवहन सेवा भी शुरू करनी पड़ेगी।
डीएम कार्यालय के सामने ही व्यवस्था डूब गई
सबसे ज्यादा चर्चा सूरजपुर की रही। जिस इलाके में जिलाधिकारी का कार्यालय, कलेक्ट्रेट और जिला न्यायालय स्थित हैं, वहीं बारिश के बाद चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दिया। आम आदमी ने तंज कसते हुए कहा कि जब प्रशासन का अपना दरवाजा ही जलभराव से नहीं बच पाया, तो बाकी शहर का हाल कैसा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
विडंबना यह रही कि पुलिस चौकी तक में पानी घुस गया। पुलिस जहां लोगों की सुरक्षा का भरोसा देती है, वहीं इस बार चौकी को खुद पानी से सुरक्षा की जरूरत पड़ गई।
नोएडा-दादरी रोड बनी 'मिनी एक्सप्रेसवे झील'
नोएडा-दादरी रोड पर जलभराव इतना अधिक था कि दोपहिया वाहन बंद होते रहे और चारपहिया वाहन भी रेंगते नजर आए। कई लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर लिखा कि सड़क कम और झील ज्यादा लग रही है।
स्थानीय लोगों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि कुछ और बारिश हो जाती तो शायद प्रशासन को ट्रैफिक पुलिस के साथ लाइफ जैकेट भी बांटनी पड़ती।
तिलपता, लड़पुरा और मंडी श्यामनगर के लोगों की परेशानी
तिलपता गांव के लोगों का कहना है कि नालों और नालियों की समय पर सफाई नहीं होने के कारण पानी सीधे घरों में घुस गया। कई परिवारों का घरेलू सामान भीग गया। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई।
लड़पुरा और मंडी श्यामनगर में भी जलभराव ने लोगों का जनजीवन प्रभावित किया। लोगों का आरोप है कि हर वर्ष बरसात से पहले सफाई अभियान के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश उन दावों की वास्तविकता सामने ला देती है।
प्राधिकरण के दावे और जमीनी तस्वीर
बारिश के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी एन.जी. रवि कुमार के निर्देश पर अधिकारी और कर्मचारी लगातार फील्ड में मौजूद हैं, जलभराव वाले स्थानों पर पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है और शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
लेकिन दूसरी ओर शहर के कई हिस्सों से आई तस्वीरों ने अलग ही कहानी सुनाई। लोगों का कहना था कि जहां पंप पहुंचे, वहां तक पहुंचने से पहले पानी अपनी कहानी लिख चुका था।
इतने आईएएस अधिकारी, फिर भी पहली बारिश में परीक्षा फेल?
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण शायद प्रदेश का ऐसा संस्थान है, जहां प्रशासनिक अनुभव की कोई कमी नहीं कही जा सकती। मुख्य कार्यपालक अधिकारी एन.जी. रवि कुमार के अलावा अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों में सुनील सिंह, सौम्य श्रीवास्तव, सुमित यादव, वी.एस. लक्ष्मी और प्रेरणा सिंह जैसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी व्यवस्था संभाल रहे हैं।
व्यंग्य यह है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में एक जिलाधिकारी पूरे जिले का प्रशासन संभाल लेते हैं। लेकिन यहां एक प्राधिकरण में ही कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मौजूद हैं। इसके बावजूद यदि पहली ही बारिश में शहर के प्रमुख मार्ग, सरकारी कार्यालय, पुलिस चौकी और रिहायशी इलाके जलमग्न हो जाएं तो आम नागरिक यह सवाल पूछने लगे हैं कि आखिर इतनी बड़ी प्रशासनिक व्यवस्था का लाभ जमीन पर क्यों नहीं दिखाई देता?
हाईटेक शहर की हाईटेक जलनिकासी कहां गई?
हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई, जलनिकासी की तैयारी और कंट्रोल रूम की बातें होती हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने की जानकारी भी सामने आती है। लेकिन पहली बारिश में यदि पानी घंटों तक सड़कों पर खड़ा रहे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या तैयारियां केवल कागजों तक सीमित थीं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर नाले कचरे से भरे मिले, कहीं पानी की निकासी का रास्ता ही बंद था और कहीं निर्माण कार्यों के कारण जलप्रवाह बाधित हो गया।
नेताओं की धरती, जनता की परेशानी
गौतम बुद्ध नगर राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण जिला है। यहां सत्तारूढ़ भाजपा के कई बड़े नेता, जनप्रतिनिधि और पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली चेहरे सक्रिय हैं। चुनाव के समय विकास के मॉडल की चर्चा होती है, लेकिन पहली बारिश में जब लोग अपने घरों से निकलने के लिए पानी में उतरने को मजबूर हो जाएं, तो विकास का मॉडल सवालों के घेरे में आ जाता है।
पहली बारिश का ट्रेलर, पूरी फिल्म अभी बाकी है
मानसून की यह तो सिर्फ शुरुआत है। अभी कई दौर की बारिश बाकी हैं। यदि पहली ही बारिश में शहर का यह हाल है तो आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल पानी निकालना नहीं, बल्कि यह भरोसा कायम करना भी है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
जनता पूछ रही है...
लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हर वर्ष बारिश आने पर यही तस्वीर दोहराई जाएगी? क्या करोड़ों रुपये की परियोजनाओं का लाभ नागरिकों तक पहुंचेगा? क्या नालों की सफाई केवल फाइलों में होगी या जमीन पर भी दिखाई देगी? और क्या जिम्मेदारी तय होगी या फिर हर बार बारिश को ही दोष देकर मामला ठंडा कर दिया जाएगा?
ग्रेटर नोएडा को देश का आधुनिक शहर बनाने का सपना तभी सार्थक होगा, जब पहली बारिश शहर की परीक्षा न बने, बल्कि व्यवस्थाओं की सफलता का प्रमाण बने। फिलहाल तो तस्वीर यही कह रही है कि बारिश कम हुई, लेकिन सवाल बहुत ज्यादा बरस गए।
.header-ads img { height:300px !important; max-height:300px !important; width:150% !important; object-fit:cover; }