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गुलिस्तानपुर में किसान की जमीन, चकरोड और कथित अवैध कॉलोनी का मामला: मुख्यमंत्री जनता दरबार से हाई कोर्ट तक पहुंची लड़ाई

स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव न्यूज़ स्टोरी:--गुलिस्तानपुर में किसान की जमीन, चकरोड और कथित अवैध कॉलोनी का मामला: मुख्यमंत्री जनता दरबार से हाई कोर्ट तक पहुंची लड़ाई, डीएम के निर्देश पर संयुक्त जांच समिति गठित
रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
गौतमबुद्धनगर के ग्राम गुलिस्तानपुर में एक किसान की जमीन, ग्राम समाज की भूमि और चक मार्ग (चकरोड) पर कथित अवैध कब्जे तथा अधिसूचित क्षेत्र में अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने का मामला अब प्रशासनिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर गंभीर विषय बन गया है। लगभग आठ महीने से विभिन्न सरकारी विभागों के चक्कर काट रहे किसान को स्थानीय स्तर पर राहत नहीं मिलने के बाद मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार और इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंचा। इसके बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और अब पूरे प्रकरण की जांच के लिए राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर दी गई है।
नवंबर 2025 में की गई थी पहली शिकायत
उपलब्ध शिकायत पत्रों के अनुसार ग्राम गुलिस्तानपुर निवासी किसान चरण सिंह शर्मा एवं विनोद कुमार शर्मा ने 7 नवंबर 2025 को ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) को विस्तृत शिकायत भेजी थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राम गुलिस्तानपुर के अधिसूचित क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा बिना वैधानिक स्वीकृति के कथित रूप से अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनकी निजी भूमि के साथ-साथ सरकारी चकरोड पर भी कब्जा कर प्लॉटिंग की गई है तथा वहां पक्की सड़क, नालियां और अन्य आधारभूत निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि संबंधित लोग कथित रूप से आम लोगों को यह कहकर प्लॉट बेच रहे हैं कि कॉलोनी को जिला प्रशासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की स्वीकृति प्राप्त है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कई खसरा नंबरों का किया गया उल्लेख
शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में कई खसरा नंबरों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उन पर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग की जा रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि खसरा संख्या 389 और 455 के चकरोड तथा खसरा संख्या 385 की निजी भूमि के एक हिस्से पर भी कथित रूप से अतिक्रमण किया गया है।
धमकी देने के भी लगाए आरोप
शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि जब शिकायतकर्ता ने मौके पर पहुंचकर कथित कब्जे का विरोध किया तो कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और जान से मारने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद कुछ व्यक्तियों के पास हथियार थे।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। Vision Live News इन आरोपों की सत्यता का दावा नहीं करता तथा संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों पर भी लगाए आरोप
पहले शिकायत पत्र में शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मौके का निरीक्षण करने पहुंचे कुछ राजस्व अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। यह आरोप भी शिकायतकर्ता के हैं और इनकी पुष्टि किसी सक्षम जांच से नहीं हुई है।
डीएम को दी विस्तृत आपत्ति
इसके बाद 10 नवंबर 2025 को शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी को एक और विस्तृत प्रार्थना पत्र देकर उपजिलाधिकारी सदर द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराई।
इस शिकायत में कहा गया कि ग्राम समाज की भूमि, चकरोड और कथित ऐतिहासिक महत्व वाले स्थल पर भी अतिक्रमण हुआ है तथा खनन के माध्यम से भूमि की स्थिति बदल दी गई है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की कि ग्राम समाज की संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, अवैध निर्माण हटाए जाएं और संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
महीनों तक नहीं मिली राहत
शिकायतकर्ता के अनुसार नवंबर 2025 से लेकर जून 2026 तक उन्होंने कई बार संबंधित विभागों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें अपनी भूमि पर कब्जा नहीं मिल सका और न ही कथित अतिक्रमण हटाया गया।
मुख्यमंत्री जनता दरबार पहुंचे किसान
स्थानीय स्तर पर समाधान न मिलने पर किसान चरण सिंह शर्मा 15 जून 2026 को गोरखपुर में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी पूरी समस्या मुख्यमंत्री के समक्ष रखी और न्याय दिलाने की मांग की।
जिलाधिकारी से दोबारा लगाई गुहार
इसके बाद 6 जुलाई 2026 को शिकायतकर्ता ने गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी से मुलाकात कर पुनः शिकायत सौंपी। शिकायत में कहा गया कि उनकी भूमि तथा सरकारी चकरोड को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
डीएम के निर्देश पर प्रशासन सक्रिय
जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ, एसडीएम सदर, तहसीलदार तथा एडिशनल डीसीपी को संयुक्त रूप से आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके बाद एसडीएम सदर द्वारा नायब तहसीलदार की अध्यक्षता में एक संयुक्त राजस्व जांच समिति का गठन किया गया।
समिति में राजस्व निरीक्षक नरेश कुमार शर्मा तथा लेखपाल सुशील यादव, मनोज दुबे और नवीन कुमार को शामिल किया गया है।
एक सप्ताह में मांगी गई रिपोर्ट
समिति को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतकर्ता की मौजूदगी में संबंधित चक मार्गों का सीमांकन किया जाए, राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया जाए तथा मौके का निरीक्षण कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
रिपोर्ट के आधार पर यदि अतिक्रमण अथवा अवैध प्लॉटिंग की पुष्टि होती है तो संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
हाई कोर्ट भी पहुंचा मामला
इस पूरे प्रकरण के बीच शिकायतकर्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी रिट याचिका दायर की। शिकायतकर्ता के अनुसार हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ तथा एसडीएम सदर को मामले का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, न्यायालय के आदेश की विस्तृत प्रति के आधार पर अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा?
अब इस पूरे मामले में प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो राजस्व विभाग, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभाग कानून के अनुसार अतिक्रमण हटाने, अवैध निर्माण ध्वस्त करने तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने का निर्णय ले सकते हैं।
वहीं यदि जांच में आरोप पुष्ट नहीं होते हैं तो उसी के अनुरूप प्रशासन अपना निर्णय देगा।
कानूनी पक्ष
यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रार्थना पत्रों, प्रशासनिक आदेशों और न्यायालय संबंधी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में जिन व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप लगाए गए हैं, वे शिकायतकर्ता के आरोप हैं। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम प्रशासनिक जांच अथवा न्यायालय द्वारा ही होगा। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा। यही निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता का सिद्धांत है।
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