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सीजन की पहली ही बारिश में तिलपता डूबा, विकास के दावों की खुली पोल

भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार पर बरसे सुखबीर सिंह आर्य, बोले- अबकी बार होगा ऐतिहासिक आंदोलन
रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
 मानसून की पहली ही तेज बारिश ने ग्रेटर नोएडा के तिलपता गांव में विकास कार्यों की हकीकत उजागर कर दी। गांव की मुख्य सड़कें जलमग्न हो गईं, गलियों में घुटनों तक पानी भर गया, नालियां ओवरफ्लो होने लगीं और कई स्थानों पर लोगों के घरों के बाहर तक पानी पहुंच गया। जलभराव के कारण राहगीरों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। भारी वाहनों और कंटेनरों के आवागमन के बीच गांव की सड़कें कीचड़ और पानी से लबालब नजर आईं। पहली ही बारिश के बाद हालात बिगड़ने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और विकास के तमाम दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रमुख समाजसेवी सुखबीर सिंह आर्य ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा कि तिलपता क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग होने के बावजूद यहां वर्षों से विकास कार्यों की घोर अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की "ट्रिपल इंजन सरकार" केवल विकास के दावे और उद्घाटन करती है, जबकि धरातल पर हालात पूरी तरह विपरीत हैं।
सुखबीर सिंह आर्य ने कहा कि तिलपता गांव से प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं। आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी, विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं, फैक्ट्रियों के वाहन, स्कूल बसें और भारी कंटेनर इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद सड़कों की हालत इतनी खराब है कि बारिश के समय पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर इतना पानी भर जाता है कि दोपहिया और चारपहिया वाहन बंद हो जाते हैं और लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि गांव की नालियां लंबे समय से बंद पड़ी हैं। कई बार अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से शिकायतें दी गईं तथा समय रहते सफाई और मरम्मत कराने की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया। अब जब बरसात शुरू हो चुकी है तो दिखावे के लिए कुछ स्थानों पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है, जबकि यदि समय पर कार्रवाई होती तो गांव को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
आर्य ने आरोप लगाया कि करीब दो वर्ष पहले गांव की सड़क निर्माण परियोजना का बड़े स्तर पर शिलान्यास किया गया था। उस समय विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए और जनता को जल्द सड़क निर्माण पूरा होने का भरोसा दिया गया, लेकिन आज तक सड़क अधूरी पड़ी है। उन्होंने कहा कि यदि परियोजनाएं केवल शिलान्यास और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह जाएं तो ऐसे उद्घाटनों का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण तिलपता गांव लगातार विकास से वंचित रहा है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही गांव की समस्याओं को भुला दिया जाता है। ग्रामीण आज भी उन्हीं मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं जिनका समाधान वर्षों पहले हो जाना चाहिए था।
सुखबीर सिंह आर्य ने कहा कि तिलपता की सबसे बड़ी समस्या बाईपास का न बनना है। जब तक गांव के बाहर वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं होगा, तब तक भारी वाहनों का दबाव मुख्य सड़क पर बना रहेगा और जाम व दुर्घटनाओं की समस्या समाप्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि बाईपास निर्माण की मांग वर्षों पुरानी है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने बताया कि पूर्व में ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन भी किया था। उस समय प्राधिकरण के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था और डिवाइडर निर्माण का कार्य शुरू कराया गया, लेकिन वह भी अधूरा छोड़ दिया गया। उन्होंने मांग की कि डिवाइडर को आगे तक बढ़ाया जाए ताकि यातायात व्यवस्थित हो सके और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।
सुखबीर सिंह आर्य ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) से स्वयं तिलपता गांव का दौरा करने की मांग करते हुए कहा कि अधिकारी यदि एक बार गांव का निरीक्षण करेंगे तो उन्हें कागजों और वास्तविकता का अंतर साफ दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि गांव के लोग नारकीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं, जबकि प्राधिकरण स्मार्ट सिटी और आधुनिक विकास के दावे करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के लोगों से विकास के नाम पर वादे किए गए, लेकिन उन्हें सुविधाओं के बजाय बदहाल सड़कें, जलभराव और अव्यवस्थित यातायात मिला। उनका कहना था कि ग्रामीणों के लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी की जा रही है और विकास के नाम पर केवल घोषणाएं की जा रही हैं।
भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए सुखबीर सिंह आर्य ने कहा कि ट्रिपल इंजन सरकार के बावजूद तिलपता गांव की यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि सरकार और प्राधिकरण वास्तव में विकास के प्रति गंभीर होते तो पहली ही बारिश में गांव की सड़कें तालाब में तब्दील नहीं होतीं।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि बारिश के बाद भी सड़क, नाली, जल निकासी, बाईपास और अन्य लंबित विकास कार्यों को पूरा नहीं किया गया तो इस बार तिलपता ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के ग्रामीण एकजुट होकर ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन और जन आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक गांव की सभी प्रमुख समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो जाता।
अंत में उन्होंने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि वह गांव में पहुंचकर वास्तविक स्थिति को अपनी आंखों से देखे और जनता की आवाज प्रशासन तक पहुंचाए। उनका कहना था कि यदि मीडिया गांव की बदहाली को प्रमुखता से उठाएगा तो प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बनेगा और वर्षों से लंबित विकास कार्यों को गति मिल सकेगी।
तिलपता गांव में पहली ही बारिश के बाद सामने आई बदहाली ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरकार के विकास मॉडल पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन समस्याओं का समाधान समय रहते करता है या फिर ग्रामीणों की चेतावनी के अनुरूप तिलपता एक बड़े जन आंदोलन का केंद्र बनता है।
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