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किसान संगठनों के दबाव के आगे झुकी टोल कंपनी: यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों की टोल छूट बहाल, 3 जुलाई का महाधरना और महापंचायत स्थगित

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ यीडा सिटी
 यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों को वर्षों से मिल रही टोल छूट की सुविधा अचानक बिना पूर्व सूचना बंद किए जाने के बाद गौतमबुद्धनगर के किसान संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। इसके विरोध में किसान संघर्ष मोर्चा एवं जिले के विभिन्न किसान संगठनों ने 3 जुलाई को जेवर टोल प्लाजा पर विशाल धरना, महापंचायत और आंदोलन की घोषणा कर दी थी। आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और किसान नेताओं के साथ हुई महत्वपूर्ण वार्ता के बाद टोल कंपनी को किसानों की सुविधा बहाल करनी पड़ी। इसके बाद प्रस्तावित धरना और महापंचायत फिलहाल स्थगित कर दी गई।
आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रशासन ने बुलाई आपात बैठक
धरने की घोषणा के बाद प्रशासन ने तत्काल यमुना एक्सप्रेसवे के मीटिंग हॉल में किसान संगठनों, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) और टोल कंपनी के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की।
बैठक में प्रशासन की ओर से डीसीपी ग्रेटर नोएडा, एडीसीपी संतोष कुमार, यमुना प्राधिकरण के एसीईओ आशीष तथा ओएसडी शैलेन्द्र भाटिया सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं गौतमबुद्धनगर के लगभग सभी प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लेकर किसानों की मांगों को मजबूती से रखा।
तत्काल बहाल हुई टोल सुविधा
बैठक के दौरान किसान संगठनों ने स्पष्ट कहा कि बिना किसी सूचना के टोल छूट समाप्त करना किसानों के साथ अन्याय है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसानों के कड़े विरोध के बाद अधिकारियों और टोल कंपनी ने किसानों की मांगों पर सहमति जताई और टोल सुविधा तत्काल प्रभाव से पुनः शुरू करने का निर्णय लिया।
प्रेस विज्ञप्ति जारी होने तक सभी पात्र किसान संगठनों के सदस्यों की टोल छूट बहाल कर दी गई थी। इसके बाद किसान संगठनों ने आपसी सहमति से 3 जुलाई को प्रस्तावित धरना, प्रदर्शन और महापंचायत स्थगित करने की घोषणा कर दी।
'जमीन हमारी, सड़क हमारी, फिर टोल क्यों?'
किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने कहा कि देशभर में बनने वाली सड़कें किसानों की अधिग्रहित जमीन पर तैयार होती हैं। यदि विभिन्न वर्गों को टोल में छूट मिल सकती है तो जिन किसानों की भूमि पर एक्सप्रेसवे बना है, उन्हें यह सुविधा मिलना उनका अधिकार है।
उन्होंने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना से जुड़े किसानों की कई महत्वपूर्ण समस्याएं आज भी लंबित हैं। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। किसानों को 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा नहीं मिला है और 7 प्रतिशत आबादी के भूखंड भी अभी तक आवंटित नहीं किए गए हैं।
किसानों के अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं
किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोरन प्रधान ने कहा कि किसानों की जमीन पर बनी सड़क पर उन्हीं किसानों से टोल वसूली पूरी तरह अनुचित है। गौतमबुद्धनगर के अधिकांश किसानों की भूमि किसी न किसी विकास परियोजना में अधिग्रहित हुई है। इसलिए अन्य एक्सप्रेसवे की तरह यहां भी किसानों को निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को मिलने वाली इस राहत को समाप्त करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसान संगठन एकजुट होकर इसका विरोध करेंगे और भविष्य में भी किसानों के अधिकारों पर किसी प्रकार की चोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
'यह सुविधा संघर्ष से मिली है, किसी की कृपा नहीं'
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसानों की टोल छूट किसी सरकार या कंपनी की कृपा नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। जिन किसानों की जमीन पर एक्सप्रेसवे बना है, उनसे टोल वसूलना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में किसानों की टोल सुविधा या अन्य अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की गई तो सभी किसान संगठन संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। साथ ही उन्होंने भूमि अधिग्रहण से जुड़े लंबित मामलों, अतिरिक्त मुआवजा, 7 प्रतिशत आबादी के प्लॉट और अन्य समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग भी उठाई।
9 जुलाई को होगी निर्णायक बैठक
बैठक के अंत में अधिकारियों ने किसान संगठनों को आश्वस्त किया कि टोल सुविधा तत्काल प्रभाव से बहाल कर दी गई है। साथ ही इस पूरे विषय पर स्थायी समाधान निकालने के लिए 9 जुलाई को किसान संगठनों, यमुना प्राधिकरण और टोल कंपनी के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में रहे प्रमुख किसान नेता
बैठक में मास्टर श्योराज, अनिल तालान, सुखबीर खलीफा, सोरन प्रधान, डॉ. रुपेश वर्मा, महेश ठाकुर, अमन ठाकुर, महेश कसाना, उदल यादव, कुंवरपाल प्रधान, गीता भाटी, ब्रजेश भाटी, रोहताश नागर, इरफान प्रधान, अनुज नागर, राजकुमार नागर, प्रेम प्रधान, श्रीपाल भाटी, मास्टर धर्म सिंह, आनंद सिंह, जगवीर नम्बरदार, वीर सिंह नागर, विनोद राजपूत, नवाब कुरेशी, जयपाल शर्मा, गौरव राजपूत, देशराज नागर, राजसिंह ठेकेदार, रविन्द्र नागर, मेहरबान अली, रुपन खारी, सुभाष भाटी, उमेद एडवोकेट, पप्पे नागर, जेपी नागर, गोलू प्रधान, संदीप भाटी, रहीस ठेकेदार सहित विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
विजन लाइव विश्लेषण
यमुना एक्सप्रेसवे पर किसानों की टोल छूट बहाल होना किसान संगठनों की एक बड़ी सामूहिक जीत माना जा रहा है। यह घटनाक्रम बताता है कि संगठित और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को निर्णय बदलने के लिए मजबूर कर सकती है। हालांकि किसानों की प्रमुख मांगें—64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा, 7 प्रतिशत आबादी के भूखंड, सर्विस रोड का निर्माण और भूमि अधिग्रहण से जुड़े अन्य मुद्दे—अब भी लंबित हैं। ऐसे में 9 जुलाई की प्रस्तावित बैठक केवल टोल सुविधा ही नहीं, बल्कि किसानों की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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