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17 जुलाई से शुरू होने वाले संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन को कांग्रेस का खुला समर्थन, दीपक भाटी चोटीवाला बोले— "किसानों की हर न्यायपूर्ण लड़ाई में मजबूती से साथ खड़ी रहेगी कांग्रेस"

   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
गौतमबुद्धनगर में किसानों के लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर 17 जुलाई से प्रस्तावित संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। जिला कांग्रेस कमेटी गौतमबुद्ध नगर ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में आंदोलन को अपना पूर्ण नैतिक, राजनीतिक एवं लोकतांत्रिक समर्थन देने की घोषणा की। जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर का किसान इस जिले के विकास का सबसे बड़ा भागीदार है और उसकी न्यायपूर्ण मांगों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीन देकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों के विकास की मजबूत नींव रखी, लेकिन आज वही किसान अपने अधिकारों के लिए लगातार आंदोलन करने को मजबूर हैं। यदि विकास का लाभ सबसे पहले उन किसानों तक नहीं पहुंचता जिन्होंने अपनी जमीन देकर शहर बसाने में योगदान दिया, तो ऐसा विकास अधूरा माना जाएगा।
किसानों के मुद्दों पर सरकार और प्राधिकरणों को घेरा
दीपक भाटी चोटीवाला ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में किसानों से अनेक वादे किए गए, समितियां गठित की गईं और समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन अधिकांश समितियों की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई तथा उनके सुझावों पर अमल भी नहीं हुआ। इससे किसानों का प्रशासन और प्राधिकरणों पर भरोसा कमजोर हुआ है।
उन्होंने कहा कि आबादी निस्तारण, 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, लीजबैक, बढ़ा हुआ मुआवजा, विस्थापित किसानों के अधिकार, स्थानीय युवाओं को रोजगार तथा अन्य लंबित मांगें आज भी समाधान की प्रतीक्षा कर रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसानों के हितों को प्रभावित करने के उद्देश्य से गठित विशेष जांच समिति (SIT) को लेकर भी किसानों में व्यापक असंतोष है।
"लिखित समझौते भी नहीं माने जा रहे"
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि समय-समय पर प्रशासन और प्राधिकरणों ने किसानों से लिखित समझौते किए, समयसीमा तय की और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अधिकांश वादे कागजों तक ही सीमित रह गए। उनका आरोप था कि अब कई मामलों में अधिकारी पहले से हुए लिखित समझौतों को भी मानने से इंकार कर रहे हैं, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के दावों के अनुसार सब कुछ ठीक है, तो गौतमबुद्ध नगर का किसान बार-बार आंदोलन करने के लिए क्यों विवश हो रहा है? इसका जवाब सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को देना चाहिए।
"दमन नहीं, संवाद से निकले समाधान"
दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलनों को दबाने और आवाज उठाने वालों पर दबाव बनाने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि प्रशासन को टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाकर किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
कांग्रेस ने गिनाया किसानों के पक्ष में अपना रिकॉर्ड
पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस ने किसानों के हितों से जुड़े अपने पुराने रुख का भी उल्लेख किया। दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि वर्ष 2013 में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा बनाया गया "भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम" किसानों को बेहतर मुआवजा, सामाजिक प्रभाव आकलन और पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण अधिकार देने वाला ऐतिहासिक कानून था। उन्होंने कहा कि बाद में इस कानून को कमजोर करने के प्रयासों का कांग्रेस ने देशभर में विरोध किया।
उन्होंने यह भी कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चले देशव्यापी किसान आंदोलन के दौरान कांग्रेस और राहुल गांधी ने किसानों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया और उनके संघर्ष में सक्रिय भागीदारी निभाई।
17 जुलाई के आंदोलन में शामिल होंगे कांग्रेस कार्यकर्ता
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि 17 जुलाई से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा शुरू किए जा रहे आंदोलन में कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से शामिल होकर किसानों की आवाज को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी संगठनात्मक पदाधिकारियों को आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के निर्देश दिए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान, अधिकार और न्याय की लड़ाई के लिए उनके साथ खड़ी है। उनका कहना था कि विकास तभी सार्थक होगा, जब विकास की कीमत चुकाने वाले किसानों को भी सम्मान और न्याय मिले।
यह रहे मौजूद
पत्रकार वार्ता में दुष्यंत नागर, मुकेश शर्मा, गौतम अवाना, रमा नैय्यर, नीरज लोहिया, देवेश चौधरी, महाराज सिंह नागर, निशा शर्मा, अरुण भाटी, सुबोध भट्ट सहित कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
राजनीतिक महत्व
गौरतलब है कि गौतमबुद्ध नगर में किसानों के विभिन्न मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा 17 जुलाई से आंदोलन शुरू करने जा रहा है। ऐसे समय में कांग्रेस द्वारा आंदोलन को खुला समर्थन देने से किसान आंदोलन को राजनीतिक मजबूती मिलने की संभावना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य राजनीतिक दल इस आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाते हैं और प्रशासन किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाता है।
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