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नलगढ़ा भूमि विवाद: कोर्ट के आदेश पर थाना सेक्टर-142 में एफआईआर दर्ज

स्पेशल रिपोर्ट | नलगढ़ा भूमि विवाद: कोर्ट के आदेश पर थाना सेक्टर-142 में एफआईआर दर्ज, फर्जी बैनामा और कब्जे के आरोपों की होगी पुलिस जांच

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/गौतमबुद्धनगर
गौतमबुद्धनगर के थाना सेक्टर-142 क्षेत्र से जुड़े एक भूमि विवाद मामले में न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सिविल जज (जू.डि.)/एफटीसी-02 एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्धनगर की अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला संज्ञेय अपराध का प्रतीत होने पर थाना सेक्टर-142 के प्रभारी निरीक्षक को सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने का निर्देश दिया।
यह आदेश प्रार्थना पत्र संख्या-78/2026, योगेश बनाम सुखवीर एवं अन्य में पारित किया गया। न्यायालय का आदेश धारा 173(4) बीएनएसएस (BNSS) के तहत दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
अदालती अभिलेखों के अनुसार, शिकायतकर्ता योगेश ने आरोप लगाया कि ग्राम नलगढ़ा स्थित खसरा संख्या-202 की कृषि भूमि में उसका और उसके भाई आनंद का आधा-आधा हिस्सा है। शिकायत में कहा गया कि सह-हिस्सेदार रहे कुछ लोगों ने वर्ष 2014 में अपना हिस्सा बेचने के बावजूद बाद में शिकायतकर्ता के हिस्से की भूमि के संबंध में कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर अन्य व्यक्तियों के नाम बैनामे कर दिए।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस कथित षड्यंत्र में कई व्यक्तियों और प्रॉपर्टी डीलरों की भूमिका रही तथा उसके हिस्से की जमीन का फर्जी तरीके से विक्रय किया गया।
कब्जे और फायरिंग का भी आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया कि 5 अप्रैल 2026 को आरोपी पक्ष कथित रूप से शिकायतकर्ता की भूमि पर कब्जा करने पहुंचे। विरोध करने पर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के साथ एक आरोपी द्वारा पिस्टल से फायर करने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह बाल-बाल बच गया।
पहले पुलिस और पुलिस कमिश्नर को भी दी गई थी शिकायत
अदालती आदेश के अनुसार, शिकायतकर्ता ने पहले थाना सेक्टर-142 तथा बाद में पुलिस कमिश्नर, गौतमबुद्धनगर को भी शिकायत दी थी। आरोप है कि उस समय कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जिसके बाद न्यायालय की शरण ली गई।
कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की श्रेणी के प्रतीत होते हैं और उनकी सत्यता का पता केवल पुलिस विवेचना से ही लगाया जा सकता है।
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि थाना सेक्टर-142 की रिपोर्ट के अनुसार इस संबंध में पहले कोई अभियोग पंजीकृत नहीं था। इसलिए न्यायालय ने पुलिस जांच को आवश्यक मानते हुए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
आदेश में यह भी कहा गया कि मामले के तथ्यों की वास्तविक स्थिति विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी तथा उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित विधिक सिद्धांतों के अनुरूप एफआईआर दर्ज किया जाना उचित है।
पुलिस को दिए गए निर्देश
न्यायालय ने थाना सेक्टर-142 के प्रभारी निरीक्षक को निर्देशित किया कि:
सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए।
मामले की निष्पक्ष एवं विधिसम्मत विवेचना की जाए।
की गई कार्रवाई से न्यायालय को निर्धारित समय में अवगत कराया जाए।
कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज
कोर्ट के आदेश के अनुपालन में थाना सेक्टर-142 पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। अब पुलिस दस्तावेजों, बैनामों, भूमि स्वामित्व, कब्जे और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों की जांच करेगी।
अधिवक्ता अजेंद्र भाटी की पैरवी
इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजेंद्र भाटी ने न्यायालय में पैरवी की। पैरवी के दौरान उन्होंने अदालत के समक्ष शिकायतकर्ता के पक्ष में उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों को प्रस्तुत किया। इसके बाद न्यायालय ने मामले में एफआईआर दर्ज कर विवेचना कराने का आदेश पारित किया।
कानूनी स्थिति
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि न्यायालय द्वारा एफआईआर दर्ज करने का आदेश और पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किया जाना आरोपों की पुष्टि नहीं माना जाता। सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। उनकी सत्यता अथवा असत्यता का अंतिम निर्धारण पुलिस विवेचना, उपलब्ध साक्ष्यों तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय में होने वाली आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा। आरोपित पक्ष को भी कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
(Vision Live News कानूनी और पत्रकारिता मानकों का पालन करते हुए निष्पक्ष रिपोर्टिंग के सिद्धांतों के अनुसार यह समाचार प्रकाशित कर रहा है।)
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