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“सेहत सर्वोपरि” का जीवंत संकल्प: NANHAK फाउंडेशन के योग शिविर में बच्चों ने अपनाई स्वस्थ जीवनशैली की दिशा

  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर जहां पूरा देश योगमय वातावरण में डूबा नजर आया, वहीं ग्रेटर नोएडा के इटा-1 स्थित NANHAK फाउंडेशन के सेंटर पर आयोजित विशेष योग शिविर ने “सेहत सर्वोपरि” के संदेश को वास्तविक रूप में साकार कर दिया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसा जन-जागरूकता अभियान बनकर उभरा, जिसने बच्चों के मन में स्वस्थ, संतुलित और अनुशासित जीवन की मजबूत नींव रखने का कार्य किया।
सुबह की ताजगी भरी हवा, हल्की धूप और उत्साह से भरे चेहरों के बीच शुरू हुए इस योग शिविर में करीब 80 बच्चों ने भाग लिया। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर किशोर उम्र के प्रतिभागियों तक, सभी में योग के प्रति अद्भुत जिज्ञासा और सीखने का उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम स्थल को सरल किन्तु सुसज्जित रूप में तैयार किया गया था, जहां हर प्रतिभागी को सहज और सकारात्मक वातावरण में योगाभ्यास का अनुभव मिला।
इस अवसर पर शहर की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामयी बना दिया। मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की चेयरपर्सन एवं जानी-मानी मोटिवेशनल स्पीकर श्रीमती कंचन कुमारी उपस्थित रहीं। उनके साथ प्रज्ञा आईएएस अकैडमी की मैनेजिंग डायरेक्टर आरती शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय, समाजसेवी श्री सत्य प्रकाश गर्ग, श्रीमती पूनम, ग्रेनो न्यूज़ के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार रोहित प्रियदर्शन तथा योगाचार्य एवं NANHAK फाउंडेशन की अध्यक्ष साधना सिंहा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत योग सत्र से हुई, जिसमें योगाचार्य साधना सिंहा ने बच्चों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की तकनीकों का अभ्यास कराया। ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम, कपालभाति जैसे सरल किन्तु प्रभावी आसनों के माध्यम से बच्चों को शारीरिक लचीलापन, श्वसन नियंत्रण और मानसिक एकाग्रता का महत्व समझाया गया। साधना सिंहा ने बेहद सहज और प्रेरणादायक शैली में बच्चों को यह बताया कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि मन और आत्मा को भी संतुलित करने का माध्यम है।
योग सत्र के दौरान बच्चों का अनुशासन और समर्पण देखने लायक था। हर आसन को सीखने और सही तरीके से करने की उनकी कोशिश यह दर्शा रही थी कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो नई पीढ़ी योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकती है।
कार्यक्रम के प्रेरणादायक सत्र में श्रीमती कंचन कुमारी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में जहां बच्चे मोबाइल और स्क्रीन के अधिक संपर्क में रहते हैं, वहां योग उन्हें मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करता है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे प्रतिदिन कम से कम 10-15 मिनट योग के लिए निकालें। उन्होंने अपने मोटिवेशनल अंदाज में कहा, “छोटी-छोटी अच्छी आदतें ही जीवन में बड़े बदलाव लाती हैं, और योग उनमें सबसे महत्वपूर्ण है।”
वहीं, आरती शर्मा ने बच्चों को जीवन के व्यावहारिक पहलुओं से जोड़ते हुए “संतुलित जीवन” का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई, खेल और खान-पान — इन तीनों में संतुलन बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे न केवल पढ़ाई में आगे बढ़ें, बल्कि शारीरिक रूप से भी सक्रिय रहें और पौष्टिक आहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. अजय ने भी स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से योग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, एकाग्रता में सुधार होता है और तनाव से मुक्ति मिलती है।
करीब डेढ़ घंटे तक चले इस आयोजन में बच्चों की ऊर्जा, उत्साह और सहभागिता ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया। कई बच्चों ने पहली बार योग का अनुभव किया, जबकि कुछ पहले से ही योग से जुड़े हुए थे — लेकिन सभी के लिए यह सत्र एक नई सीख और प्रेरणा लेकर आया।
योग सत्र के समापन के बाद सभी प्रतिभागियों को पौष्टिक रिफ्रेशमेंट वितरित किए गए। बच्चों के चेहरों पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी, मानो उन्होंने न केवल योग सीखा, बल्कि एक नई जीवनशैली को अपनाने की दिशा में पहला कदम भी बढ़ाया हो।
कार्यक्रम के अंत में NANHAK फाउंडेशन की अध्यक्ष साधना सिंहा ने सभी अतिथियों, सहयोगियों, अभिभावकों और बच्चों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन का उद्देश्य केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास शामिल है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस प्रकार के स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे।
यह योग शिविर केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक सकारात्मक पहल थी, जिसने यह संदेश दिया कि यदि बचपन से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित की जाए, तो एक स्वस्थ और सशक्त समाज की नींव रखी जा सकती है। NANHAK फाउंडेशन का यह प्रयास निश्चित रूप से समाज में प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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