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“शिक्षक संवाद से चुनावी संदेश तक: IILM में MLC श्रीचंद शर्मा ने साधा अकादमिक और लोकतांत्रिक संतुलन”


  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
आईआईएलएम यूनिवर्सिटी में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम केवल एक औपचारिक शैक्षणिक बैठक नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षक समुदाय के बीच लोकतांत्रिक जागरूकता, सहभागिता और आगामी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति का एक सधा हुआ संकेत भी बनकर उभरा। शिक्षक एमएलसी और जनप्रतिनिधि श्री श्रीचंद शर्मा की मौजूदगी ने इस संवाद को खासा महत्वपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. (डॉ.) जय शंकर वारियर द्वारा स्वागत से हुई, लेकिन इसके बाद मंच जिस दिशा में बढ़ा, वह साफ तौर पर शिक्षकों के हितों के साथ-साथ उनके राजनीतिक सशक्तिकरण की ओर केंद्रित रहा। संयोजन कर रहे उपकुलसचिव शरद शर्मा ने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया, जिसमें संवाद और सहभागिता को प्राथमिकता दी गई।
अपने संबोधन में श्रीचंद शर्मा ने अपने पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि शिक्षक समाज के लिए उनकी भूमिका केवल प्रतिनिधि तक सीमित नहीं, बल्कि एक संरक्षक और आवाज़ उठाने वाले नेता की रही है। उन्होंने सेवा-सुविधाओं के विस्तार, शिक्षक सम्मान और शैक्षणिक गरिमा को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयासों को विस्तार से रखा।
हालांकि, इस संवाद का सबसे अहम पहलू वह रहा जब उन्होंने शिक्षकों को उनके मताधिकार और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में उनकी निर्णायक भूमिका के प्रति सजग किया। यह स्पष्ट संकेत था कि यह मंच केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास भी था।
सभा में मौजूद सहायक प्राध्यापकों, विभागाध्यक्षों और अधिष्ठाताओं के साथ हुई चर्चा में शिक्षकों ने भी अपने मुद्दे खुलकर रखे। शैक्षिक ढांचे में सुधार, कार्यस्थल की चुनौतियां और नीतिगत अपेक्षाएं जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए। इससे कार्यक्रम एकतरफा भाषण के बजाय दो-तरफा संवाद में बदलता नजर आया।
कार्यक्रम में कुलसचिव ब्रिगेडियर सुरप्रीत सिंह गिल (वेटेरन), मंडल मंत्री एवं संयोजक गौरव तोमर, मनवीर नागर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिससे आयोजन की संस्थागत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अहमियत साफ दिखी।
विश्लेषण:
इस पूरे आयोजन को यदि व्यापक संदर्भ में देखा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि शिक्षक समुदाय आज केवल शैक्षणिक इकाई नहीं, बल्कि एक संगठित और प्रभावशाली वोट बैंक के रूप में भी उभर रहा है। ऐसे में इस तरह के संवाद कार्यक्रम, जहां शैक्षणिक मुद्दों के साथ लोकतांत्रिक सहभागिता पर जोर दिया जाता है, आने वाले समय में शिक्षक राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विजन लाइव का मत:
विजन लाइव का मानना है कि आईआईएलएम में आयोजित यह शिक्षक संवाद कार्यक्रम शिक्षा और लोकतंत्र के बीच बढ़ते जुड़ाव का सशक्त उदाहरण है। जिस प्रकार शिक्षकों को उनके अधिकारों के साथ-साथ लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, वह एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, ऐसे आयोजनों की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब यहां उठाए गए मुद्दे जमीनी स्तर पर ठोस नीतियों और बदलावों में परिवर्तित हों। शिक्षक समुदाय की अपेक्षाएं केवल संवाद तक सीमित नहीं, बल्कि परिणामोन्मुखी कार्यवाही की भी मांग करती हैं।
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