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भरत तिवारी हत्याकांड को लेकर महिला शक्ति उत्थान मंडल का प्रदर्शन, प्रशासनिक अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की उठी मांग

    मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
 स्वर्गीय भरत तिवारी हत्याकांड को लेकर सोमवार को महिला शक्ति उत्थान मंडल ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने डीसीपी शैलेंद्र कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए मामले में केवल हत्या के आरोपियों ही नहीं, बल्कि उन शासन एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की, जिन पर भरत तिवारी की ग्राम विकास संबंधी शिकायतों और जनहित के मुद्दों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया।
महिला शक्ति उत्थान मंडल का कहना है कि भरत तिवारी लंबे समय से क्षेत्र के विकास और जनसमस्याओं को लेकर विभिन्न सरकारी विभागों एवं अधिकारियों के समक्ष आवाज उठा रहे थे। उन्होंने कई बार संबंधित विभागों से शिकायतें कीं और समाधान की मांग की, लेकिन अधिकांश मामलों में उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता रहा। संगठन का आरोप है कि यदि संबंधित अधिकारी समय पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते और शिकायतों का गंभीरता से निस्तारण करते, तो परिस्थितियां इतनी गंभीर नहीं बनतीं। इसलिए इस पूरे मामले में प्रशासनिक जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
ज्ञापन में संगठन ने कहा कि वर्तमान समय में शासन और प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार, लापरवाही और जवाबदेही की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए महीनों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती। कई बार विकास योजनाओं की जानकारी भी आम लोगों तक नहीं पहुंचती, जिससे पात्र लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
महिला शक्ति उत्थान मंडल ने आरोप लगाया कि गौतमबुद्ध नगर में यह स्थिति अब आम होती जा रही है। कई मामलों में पीड़ितों को न्याय पाने के लिए पहले प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और उसके बाद अदालतों का सहारा लेना पड़ता है। संगठन का कहना है कि कई मामलों में हाईकोर्ट और निचली अदालतों के स्पष्ट आदेशों के बावजूद थानों में समय पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती। कार्रवाई के बजाय फाइलें एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास भेजी जाती हैं, जिससे पीड़ितों का न्याय व्यवस्था से भरोसा कमजोर होता है।
संगठन ने मांग की कि भरत तिवारी हत्याकांड की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए। साथ ही जिन अधिकारियों की लापरवाही या उदासीनता सामने आए, उनके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी जनहित से जुड़े मामलों की अनदेखी करने का साहस न कर सके।
महिला शक्ति उत्थान मंडल ने अपने ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर और पुलिस कमिश्नर से प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने की मांग की। संगठन ने कहा कि प्रत्येक पीड़ित की शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई हो, सरकारी विभाग जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें और विकास योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना भेदभाव पहुंचे।
संगठन का कहना है कि यदि प्रशासन जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुने और समय पर कार्रवाई करे, तो अनेक विवाद और अप्रिय घटनाओं को रोका जा सकता है। इसलिए केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय शिकायतों के प्रारंभिक स्तर पर ही प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान रूपा गुप्ता, अंजू पुंडीर, गुड्डी वर्मा, संगीता सक्सेना, गीता मिश्रा, मंजू सिरोही, आराधना सिंह, विद्या, कमलेश सिंह, प्रतिभा झा, कुसुम प्रजापति सहित महिला शक्ति उत्थान मंडल की अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहीं। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो भविष्य में व्यापक जनआंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।
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