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दनकौर के श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज में बौद्धिक संपदा अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित


भारत और विदेशों के विशेषज्ञों ने AI, कॉपीराइट, पेटेंट और नवाचार पर साझा किए विचार

मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी" /गौतमबुद्धनगर

गौतमबुद्ध नगर के श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में मंगलवार को "Emerging Trends in Intellectual Property Rights: A Multidisciplinary Approach" विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन हाइब्रिड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) माध्यम से किया गया। सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से जुड़े शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लेकर बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) से जुड़े समकालीन मुद्दों पर गहन मंथन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। महाविद्यालय के सचिव रजनीकांत अग्रवाल एवं प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज के ज्ञान-आधारित युग में बौद्धिक संपदा अधिकार केवल कानूनी विषय नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और देश के आर्थिक विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से मौलिक शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया। कार्यक्रम की रूपरेखा उपप्राचार्या एवं सम्मेलन समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता ने प्रस्तुत की।

मुख्य अतिथि प्रो. शिवराज सिंह पुंडीर, विभागाध्यक्ष (गणित), चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ एवं क्षेत्रीय समन्वयक, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान ने कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को संरक्षित रखने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति व्यापक जागरूकता आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि प्रो. जे.एस. भारद्वाज, पूर्व संकायाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में IPR की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

सम्मेलन के मुख्य वक्ताओं में हार्वर्ड विश्वविद्यालय (अमेरिका) के डॉ. राज मोगरे, ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय, देहरादून के आईपीआर सेल प्रमुख डॉ. अरुण प्रताप तथा कमला नेहरू महाविद्यालय, नागपुर के प्रो. डॉ. डब्ल्यू.बी. गुर्नुले शामिल रहे। विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल युग में कॉपीराइट, तकनीकी हस्तांतरण, अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

सम्मेलन के दौरान जर्मनी से विशेष व्याख्यान सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें पोर्शे ए.जी. (जर्मनी) के एसोसिएट डायरेक्टर एवं ग्लोबल लीड श्री विनीत महाली तथा प्रो. विकास शर्मा ने डिजिटल नवाचार, मेटावर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक बौद्धिक संपदा व्यवस्था पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों ने इन सत्रों में विशेष रुचि दिखाई।

कार्यक्रम के अंतर्गत चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इन शोध-पत्रों में AI, कॉपीराइट, पेटेंट, ट्रेडमार्क, जैव विविधता संरक्षण, डेटा सुरक्षा, साइबर कानून, मुक्त अभिगम और नवाचार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। विषय विशेषज्ञों ने शोधार्थियों को उपयोगी सुझाव देकर उनके शोध कार्य को और बेहतर बनाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया।

समापन सत्र में डॉ. प्रशांत कन्नौजिया ने सम्मेलन का प्रतिवेदन एवं अनुशंसाएं प्रस्तुत कीं। इसके बाद डॉ. लक्ष्मण नागर, डॉ. सतेंद्र कुमार एवं सहायक कुलसचिव (परीक्षा) श्री सत्यप्रकाश ने अपने संबोधन में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, नवाचार आधारित शिक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, शोधार्थियों, प्रतिभागियों, आयोजन समिति एवं महाविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया। बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति के बीच राष्ट्रगान के साथ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन हुआ।

यह सम्मेलन न केवल बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी मंच साबित हुआ, बल्कि अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग को नई दिशा देने की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण पहल माना गया।

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