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जिम्स कासना विवाद ने पकड़ा व्यापक जनआंदोलन का रूप, सपा, कांग्रेस, भाकियू और किसान सभा समेत कई संगठन मैदान में, प्रशासन और संस्थान पर उठ रहे सवाल

🔴 Vision Live News | विशेष रिपोर्ट
जिम्स कासना विवाद ने पकड़ा व्यापक जनआंदोलन का रूप, सपा, कांग्रेस, भाकियू और किसान सभा समेत कई संगठन मैदान में, प्रशासन और संस्थान पर उठ रहे सवाल
 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स), कासना में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत स्वास्थ्य एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर पैदा हुआ विवाद अब जिले के सबसे बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो गया है। लगभग 15 दिनों से चल रहे आंदोलन को समाप्त कराने के लिए की गई पुलिस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों, किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों ने सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), भारतीय किसान यूनियन के अन्य गुटों तथा अखिल भारतीय किसान सभा ने कर्मचारियों के समर्थन में प्रदर्शन, ज्ञापन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए हैं। वहीं जिम्स प्रशासन का कहना है कि अस्पताल की सभी स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जा रही।
15 जून से चल रहा था कर्मचारियों का धरना
जिम्स में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी 15 जून से अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनकी नौकरी, वेतन और सेवा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं किया जा रहा।
24 जून को जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और संस्थान प्रबंधन के साथ कई घंटे तक वार्ता हुई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद देर रात पुलिस और प्रशासन ने धरना स्थल खाली कराया, जिसके बाद विवाद और गहरा गया।
कर्मचारियों का आरोप – बल प्रयोग और गिरफ्तारियां
आंदोलनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि धरना समाप्त कराने के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया और महिला कर्मचारियों के साथ भी अभद्रता की गई। इन आरोपों को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने जांच की मांग उठाई है।
समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन और सड़क जाम
घटना के विरोध में समाजवादी पार्टी ने जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। जिलाधिकारी से मुलाकात न होने पर सपा कार्यकर्ताओं ने सूरजपुर-परी चौक मार्ग पर जाम लगा दिया।
सपा जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए गिरफ्तार कर्मचारियों की रिहाई और मांगों के समाधान की मांग की। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
कांग्रेस ने लगाया लोकतंत्र कुचलने का आरोप
जिला कांग्रेस कमेटी गौतमबुद्ध नगर ने आरोप लगाया कि पीड़ित कर्मचारियों से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि विपक्षी नेताओं को पीड़ितों से मिलने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस ने न्यायिक जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और कर्मचारियों को न्याय दिलाने की मांग की है।
अखिल भारतीय किसान सभा ने की कड़ी निंदा
अखिल भारतीय किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने जिम्स पहुंचकर कर्मचारियों से मुलाकात की और पुलिस कार्रवाई की निंदा की।
जिला महासचिव संदीप भाटी ने कहा कि कोविड काल में सेवा देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
किसान सभा ने गिरफ्तार कर्मचारियों की रिहाई, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, घायल कर्मचारियों के उपचार और आउटसोर्स कर्मचारियों की बहाली एवं स्थायीकरण की मांग की है।
भारतीय किसान यूनियन ने भी सौंपा ज्ञापन
जिम्स प्रकरण में भारतीय किसान यूनियन भी खुलकर कर्मचारियों के समर्थन में सामने आई है। संगठन के कार्यकर्ताओं ने एसीपी को ज्ञापन सौंपकर पुलिस कार्रवाई का विरोध दर्ज कराया।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव पवन खटाना ने कहा कि पुलिस प्रशासन और शासन का रवैया पूरी तरह गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि धरने पर बैठे कर्मचारियों को जबरन उठाकर गिरफ्तार किया गया और आंदोलन को बलपूर्वक समाप्त कराया गया।
पवन खटाना ने कहा कि:
"पुलिस के बल पर धरना खत्म करना और आंदोलनकारी कर्मचारियों पर लाठीचार्ज करना बेहद गलत है। भारतीय किसान यूनियन इसकी कड़ी निंदा करती है। सभी गिरफ्तार कर्मचारियों को बिना शर्त तुरंत रिहा किया जाए और सभी को पुनः नौकरी पर रखा जाए।"
उन्होंने जिम्स के निदेशक (डायरेक्टर) के खिलाफ कथित वादाखिलाफी और अन्य आरोपों की जांच कर उचित कार्रवाई की भी मांग की।
ज्ञापन कार्यक्रम में रॉबिन नागर, सुनील प्रधान, बली भाटी, सुरेंद्र नागर, मटरू नागर, अजीत अधाना, राजीव मलिक, अमित डेढ़ा, अमित जैलदार, धर्मेंद्र चपराना, योगेश भाटी, धर्मपाल स्वामी, ऋषि पंडित, नागेश दरोगा सहित सैकड़ों किसान कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जिम्स प्रशासन का पक्ष
विवाद के बीच जिम्स प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि अस्पताल की सेवाएं पूरी तरह सामान्य हैं।
संस्थान के अनुसार—
24 जून को कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ लगभग 5 से 6 घंटे तक वार्ता हुई।
प्रारंभिक स्तर पर आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी थी।
बाद में कर्मचारियों ने अपना निर्णय बदल दिया।
पुलिस प्रशासन की सहायता से धरना स्थल खाली कराया गया।
अस्पताल की सभी सेवाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं।
प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार—
25 जून को 841 मरीज ओपीडी में पहुंचे।
100 से अधिक मरीज अस्पताल में भर्ती रहे।
सभी आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हैं।
बढ़ता जा रहा है आंदोलन का दायरा
जिम्स विवाद में अब समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, भारतीय किसान यूनियन, अखिल भारतीय किसान सभा और अन्य किसान संगठनों की सक्रिय भागीदारी यह संकेत दे रही है कि यह मामला केवल कर्मचारियों की नौकरी का मुद्दा नहीं रह गया है। यह श्रमिक अधिकार, आउटसोर्सिंग व्यवस्था, सरकारी संस्थानों में रोजगार सुरक्षा और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार जैसे व्यापक मुद्दों से जुड़ता जा रहा है।
Vision Live विश्लेषण
जिम्स कासना विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई और कर्मचारियों की मांगों से आगे बढ़कर राजनीतिक, सामाजिक और श्रमिक अधिकारों की बहस का केंद्र बन चुका है। कर्मचारियों पर बल प्रयोग, गिरफ्तारियों और महिला कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों ने विपक्षी दलों और किसान संगठनों को एकजुट होने का अवसर दिया है।
सपा, कांग्रेस, अखिल भारतीय किसान सभा और भारतीय किसान यूनियन जैसे संगठनों की लगातार सक्रियता यह संकेत देती है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन जिला स्तर से निकलकर प्रदेश स्तर का मुद्दा बन सकता है। दूसरी ओर प्रशासन और जिम्स प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित हुए बिना विवाद का समाधान निकालने की है।
आने वाले दिनों में संभावित जांच, कर्मचारियों की अगली रणनीति और विभिन्न संगठनों की संयुक्त कार्रवाई इस पूरे घटनाक्रम की दिशा और प्रभाव तय करेगी।
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