BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

“परीक्षा नहीं, भविष्य दांव पर है” — गौतमबुद्धनगर कांग्रेस से उठी आवाज ने राष्ट्रीय बहस को दी नई धार


   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा वेस्ट (बिसरख)
देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गहराते सवालों के बीच, गौतमबुद्ध नगर की धरती से एक ऐसी आवाज उठी, जिसने न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चल रही बहस को और तीखा कर दिया। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित यह पत्रकार वार्ता महज एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों के दर्द, असंतोष और टूटते भरोसे का एक सशक्त मंच बनकर सामने आई।
जिला कांग्रेस कार्यालय, बिसरख में आयोजित इस कार्यक्रम का केंद्र बिंदु रहा राजस्थान के कोटा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा किया गया “छात्र संवाद”—एक ऐसा संवाद, जिसने देशभर के युवाओं की भावनाओं को शब्द दिए। इसी संवाद की गूंज अब ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सुनाई दी, जहां नेताओं ने इसे स्थानीय संदर्भों से जोड़ते हुए विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से सामने रखा।
कार्यक्रम में जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी ‘चोटीवाला’ ने अपनी बात रखते हुए कहा कि देश का युवा आज प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली, पेपर लीक, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही की कमी और शिक्षा व्यवस्था की अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में NEET सहित कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भरोसा तोड़ा है और उनके भविष्य को असमंजस में डाल दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्थिति व्यवस्था में गहरी खामियों की ओर संकेत करती है।
पत्रकार वार्ता के दौरान एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं, पेपर लीक की घटनाओं, भर्ती परीक्षाओं में देरी तथा युवाओं में बढ़ती निराशा जैसे मुद्दों को तथ्यात्मक रूप से रखा गया। यह भी बताया गया कि वर्षों की कठिन तैयारी के बावजूद जब परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रहती, तो छात्रों के मन में हताशा और अविश्वास पैदा होता है, जिसका व्यापक सामाजिक प्रभाव भी पड़ता है।
दीपक भाटी ने राहुल गांधी के कोटा संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने हजारों छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार जैसे विषयों को राजनीति से ऊपर उठाकर देखना होगा और युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी बताया कि राहुल गांधी देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों से संवाद जारी रखेंगे, जिसमें प्रयागराज में प्रस्तावित अगला कार्यक्रम शामिल है।
इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई तथा शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी प्रमुखता से उठाया।
प्रेस वार्ता में दुष्यंत नागर, मुकेश शर्मा, गौतम अवाना, महाराज सिंह नागर, सूबेदार सतपाल सिंह, निशा शर्मा, नीरज लोहिया, धर्मवीर प्रधान, सुरेन्द्र प्रताप सिंह, सतीश शर्मा, धर्म सिंह, मेहकर सिंह, आर.के. प्रथम, रमेश यादव, सुबोध भट्ट, तनवीर, बिन्नू भाटी, नितीश चौधरी, सचिन शर्मा, विपिन त्यागी, दयानंद नागर, प्रिंस भाटी, गजन प्रधान, धीरे सिंह, रमेश जीनवाल, ओमकार राणा, जतन सिन्हा, ओमप्रकाश, विजयपाल सिंह, प्रियंका सिन्हा और संजय भाटी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
विजन लाइव का विश्लेषण
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आयोजित यह पत्रकार वार्ता केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली पर गहराते अविश्वास का स्पष्ट संकेत है। “छात्र संवाद” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों के मुद्दों को सामने लाना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या यह बहस ठोस नीतिगत बदलावों तक पहुंच पाएगी या केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाएगी।
विजन लाइव के अनुसार, देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जो संकट उभर रहा है, वह बहु-स्तरीय है। इसमें केवल पेपर लीक या तकनीकी खामियां ही नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही की कमी, परीक्षा एजेंसियों की संरचना और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जैसे गहरे मुद्दे शामिल हैं। जब एक ही प्रकार की समस्याएं बार-बार सामने आती हैं, तो यह एक व्यवस्थित खामी का संकेत देती हैं।
हालांकि, विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों में गंभीरता नजर आती है, लेकिन समाधान के लिए केवल राजनीतिक बयानबाजी पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए व्यापक और समन्वित सुधार की आवश्यकता है, जिसमें सरकार, परीक्षा एजेंसियां और नीति-निर्माता सभी की जिम्मेदारी तय हो।
एक महत्वपूर्ण पहलू छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का भी है, जिसे अभी तक पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल पाई है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता युवाओं को मानसिक दबाव की ओर धकेल रही है, जो भविष्य के लिए चिंताजनक संकेत है।
विजन लाइव का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह केवल शिक्षा क्षेत्र का संकट नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी उत्पन्न करेगा। इसलिए अब आवश्यकता है कि इस बहस को राजनीतिक दायरे से बाहर निकालकर व्यावहारिक और प्रभावी समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।
.header-ads img { height:300px !important; max-height:300px !important; width:150% !important; object-fit:cover; }