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लॉयड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के फार्मेसी विभाग का पाँच दिवसीय ऑनलाइन एफडीपी-1.0 सफलतापूर्वक सम्पन्न

   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
लॉयड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के फार्मेसी विभाग द्वारा फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) एवं आईबीएम बिजनेस एनालिटिक्स लैब के सहयोग से 15 से 19 जून तक आयोजित पाँच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी-1.0) “एम्पावरिंग एजुकेटर्स विद पायथन एंड एआई” का सफल समापन हुआ।
“नई फार्मेसी पाठ्यचर्या के अनुरूप फार्मेसी शिक्षकों की क्षमता संवर्धन” विषय पर आधारित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के 20 राज्यों से विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 154 शिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), पायथन, डेटा एनालिटिक्स तथा उभरती डिजिटल तकनीकों से सशक्त बनाते हुए पीसीआई की नई पाठ्यचर्या के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु तैयार करना रहा।
उद्घाटन सत्र में लॉयड ग्रुप की चीफ स्ट्रेटेजी ऑफिसर एवं हेड ऑफ ग्रोथ प्रो. वंदना अरोड़ा सेठी, अध्यक्ष मनोहर ठैरानी तथा मुख्य अतिथि जशुभाई हीराभाई चौधरी (उपाध्यक्ष, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार) उपस्थित रहे।
प्रो. वंदना अरोड़ा सेठी ने अपने संबोधन में कहा कि पीसीआई और आईबीएम बिजनेस एनालिटिक्स लैब के सहयोग से आयोजित यह एफडीपी फार्मेसी शिक्षकों को एआई, पायथन और डिजिटल नवाचारों से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने पीसीआई के सहयोग की सराहना करते हुए बताया कि लॉयड ग्रुप के संकाय सदस्य पिछले आठ महीनों से नई पीसीआई पाठ्यचर्या के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप लागू नई बी.फार्म पाठ्यचर्या को भारतीय फार्मेसी शिक्षा में परिवर्तनकारी कदम बताते हुए कहा कि यह पाठ्यक्रम नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता, डिजिटल दक्षता और बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देता है। साथ ही पीसीआई के “कैप्सूल” नेतृत्व कार्यक्रम की सराहना करते हुए उन्होंने इसे भविष्य के शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं के निर्माण की दिशा में अहम बताया।
मुख्य अतिथि जशुभाई हीराभाई चौधरी ने कहा कि पीसीआई का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम परिवर्तन नहीं, बल्कि ऐसे शिक्षकों और विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो भारतीय फार्मेसी शिक्षा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिला सकें। उन्होंने बताया कि एआई आधारित दवा खोज, क्लीनिकल रिसर्च और हेल्थकेयर एनालिटिक्स आने वाले समय में फार्मेसी क्षेत्र की दिशा तय करेंगे, जिससे दवा विकास की प्रक्रिया तेज और किफायती होगी।
अध्यक्ष मनोहर ठैरानी ने नई बी.फार्म पाठ्यचर्या को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए पीसीआई के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह बदलाव उद्योग एवं तकनीक आधारित शिक्षा को नई दिशा देगा और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. नीतू बाली कामरा, डॉ. मोहम्मद रागिब शकील, मोहित अग्रवाल, नेहा इस्सर, डॉ. खालिद रज़ा और डॉ. सौमेंद्र मोहंती सहित कई विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। पाँच दिनों में एआई, मशीन लर्निंग, डेटा विज़ुअलाइजेशन, ड्रग डिस्कवरी, फार्माकोविजिलेंस, एनएलपी, कंप्यूटर विज़न और क्लाउड-आधारित एआई टूल्स जैसे विषयों पर व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए।
समापन दिवस पर प्रतिभागियों ने मेडिकेशन एडहीरेंस ट्रैकर, रिमोट पेशेंट मॉनिटरिंग डैशबोर्ड और एआई-आधारित स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट जेनरेटर जैसे कैपस्टोन प्रोजेक्ट्स का प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान एआई संचालित शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य पर भी विचार-विमर्श हुआ तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
यह एफडीपी नई पीसीआई पाठ्यचर्या के अनुरूप फार्मेसी शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जो भविष्य में भारतीय फार्मेसी शिक्षा के स्वरूप को नई दिशा देने में सहायक होगा।
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