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शारदा विश्वविद्यालय में ‘आइडिया से इनोवेशन’ तक का रोडमैप, विश्व IPR दिवस पर जागरूकता और रणनीति का संगम



  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा

आज के ज्ञान-आधारित युग में केवल विचार होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा और व्यावसायिक उपयोग ही असली सफलता की कुंजी है। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए शारदा विश्वविद्यालय के IPR सेल ने विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) दिवस का भव्य आयोजन किया, जो महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नवाचार को संरक्षण देने और उसे उद्यमिता में बदलने की दिशा में एक ठोस पहल बनकर उभरा।

इस कार्यक्रम में भारत सरकार के पूर्व सचिव (MSME) एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री दिनेश राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को वैश्विक नवाचार शक्ति बनने के लिए केवल रिसर्च नहीं, बल्कि मजबूत IPR रणनीति की आवश्यकता है। उनके विचारों ने छात्रों और शोधकर्ताओं को यह समझने की दिशा दी कि नीति और नवाचार का तालमेल किस प्रकार देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित आईईएस अधिकारी श्री सतीश कुमार ने MSME क्षेत्र के संदर्भ में IPR की उपयोगिता को विस्तार से समझाया। उन्होंने सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और सहायता प्रणालियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार छोटे और मध्यम उद्यम भी बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं। उन्होंने संतुलित और प्रभावी वैश्विक IPR इकोसिस्टम की आवश्यकता पर जोर दिया, जो नवाचार और रचनात्मकता को सतत विकास से जोड़ता है।

कार्यक्रम का कुशल संचालन शारदा विश्वविद्यालय के एसोसिएट डीन (अनुसंधान) एवं IPR सेल के प्रमुख डॉ. मोहित साहनी द्वारा किया गया। उन्होंने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को केवल अकादमिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें “इनोवेटर से इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ओनर” बनने के लिए प्रेरित करना है।

इस अवसर पर डीन (अनुसंधान) डॉ. भुवनेश कुमार और कुलपति प्रो. सिबाराम खारा ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शोध, नवाचार और पेटेंट जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि उनके विचार केवल प्रोजेक्ट तक सीमित न रहकर समाज और उद्योग में वास्तविक बदलाव ला सकें।

कार्यक्रम की खास विशेषता IPR पर आयोजित पांच विशेषज्ञ व्याख्यानों की श्रृंखला रही, जिन्हें प्रतिष्ठित कानूनी फर्मों के विशेषज्ञों ने प्रस्तुत किया। इन सत्रों में पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई, जिससे प्रतिभागियों को IPR के कानूनी और व्यावसायिक पहलुओं की गहरी समझ प्राप्त हुई।

इस आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के डीन, हेड, फैकल्टी मेंबर्स, शोधकर्ता, विद्यार्थी और स्टाफ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान एक बात स्पष्ट रूप से सामने आई—आज का छात्र केवल ज्ञान अर्जित करने वाला नहीं, बल्कि भविष्य का नवप्रवर्तक और उद्यमी है, जिसे अपने विचारों की सुरक्षा और मूल्य को समझना जरूरी है।

शारदा विश्वविद्यालय का यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण बना कि जब शिक्षा संस्थान नवाचार और बौद्धिक संपदा संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं, तो वे न केवल छात्रों का भविष्य संवारते हैं, बल्कि देश के आर्थिक और तकनीकी विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।