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ब्रेकिंग न्यूज़ | ग्राम अस्तौली 🚨“डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ उबाल—जहरीली हवा के बीच गांवों की ‘आर-पार’ की लड़ाई”


📹 मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’  /  ग्रेटर नोएडा/ बुलंदशहर बॉर्डर
ग्राम अस्तौली में प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के खिलाफ अब विरोध सिर्फ धरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आंदोलन धीरे-धीरे जनआक्रोश और अस्तित्व की लड़ाई में बदलता जा रहा है।
✊ भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने दो टूक ऐलान किया है—
👉 “डंपिंग ग्राउंड हटाकर ही दम लेंगे, नहीं तो आंदोलन और तेज होगा।”
🔴 जमीन इंडस्ट्री के लिए, बना डंपिंग ग्राउंड
ग्रामीणों का आरोप है कि—
👉 अस्तौली की करीब साढ़े 600 बीघा उपजाऊ जमीन को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने औद्योगिक विकास के नाम पर अधिग्रहित किया था
👉 लेकिन वादा उद्योग लगाने का था, और हकीकत में वहां कूड़ा रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित कर दिया गया
👉 यह प्लांट एनटीपीसी के सहयोग से प्राधिकरण द्वारा विकसित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट बताया जा रहा है
📌 ग्रामीण इसे “विकास के नाम पर धोखा” बता रहे हैं
🌫️ ट्रायल में ही बिगड़ी स्थिति—“तीन दिन में दम घुटने लगा
📅 22 मार्च 2026 को प्लांट शुरू हुआ
👉 लेकिन ट्रायल फेज के पहले ही तीन दिनों में हालात बेकाबू हो गए
ग्रामीणों के मुताबिक—
▪️ पूरे इलाके में तेज बदबू और जहरीली गैस फैल गई
▪️ सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और सिरदर्द जैसी शिकायतें बढ़ीं
▪️ बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं पर भी असर दिखने लगा
👉 “घर के अंदर रहना मुश्किल, बाहर निकलना खतरनाक”—ऐसी स्थिति बन गई
🌾 उपजाऊ जमीन पर संकट
📌 अस्तौली और आसपास का इलाका
👉 बागवानी, डेयरी और खेती के लिए जाना जाता है
लेकिन अब—
▪️ फसलों पर प्रदूषण का खतरा
▪️ जमीन की गुणवत्ता खराब होने की आशंका
▪️ पशुपालन पर भी असर
👉 किसानों का कहना है—
“अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।”
🌍 कई गांवों में फैल रहा असर
इस प्लांट का प्रभाव सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं—
👉 गौतम बुद्ध नगर:
अस्तौली, देवटा, गढ़ी आजमपुर, बांजपुर, सरकपुर
👉 बुलंदशहर:
हिरनौटी, कमालपुर, रौनी, फतेहपुर
📌 यानी यह मुद्दा अब दो जिलों के कई गांवों की साझा समस्या बन चुका है
12 अप्रैल से जारी अनिश्चितकालीन धरना
👉 12 अप्रैल 2026 से ग्रामीणों ने
डंपिंग ग्राउंड हटाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया
👉 दिन-रात लोग धरनास्थल पर मौजूद रह रहे हैं
👉 महिलाओं और बुजुर्गों की भी सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है
🎤 आंदोलन की आवाज—नेताओं का सख्त रुख
भाकियू (टिकैत) NCR उपाध्यक्ष सूरज भाटी ने कहा—
👉 “हम अपने बच्चों को जहर नहीं खिलने देंगे, यह प्लांट हटेगा ही।”
देवेंद्र भाटी (पर्यावरण रक्षक) ने चेतावनी दी—
👉 “अगर प्राधिकरण ने फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन पूरे NCR में फैलाया जाएगा।”
🏢 प्राधिकरण से वार्ता—उम्मीद या औपचारिकता?
👉 ग्रामीणों की ACEO वी.एस. लक्ष्मी से बातचीत हुई
👉 प्राधिकरण ने कहा—
📊 पर्यावरण और स्वास्थ्य विभागों से रिपोर्ट मंगाई जा रही है
👉 लेकिन ग्रामीणों का आरोप है—
“सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, जमीनी समाधान नहीं।”
👥 धरने में उमड़ी बड़ी भीड़—ग्राउंड से जुड़ी आवाजें
धरने में भारी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे, जिनमें—
👉 सुमित भाटी, प्रमोद भाटी, विनोद प्रधान, भोपाल सिंह भाटी
👉 बलराज भाटी, मनवीर भाटी, धनपाल नेताजी
👉 महकार ठेकेदार, प्रेमचंद शर्मा (सरकपुर)
👉 पवन कुमार (हिरनौटी), अमरीश सिंह (फतेहपुर)
👉 बॉबी भाटी (रौनी), मनोज (फतेहपुर) सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे
📌 यह भागीदारी इस आंदोलन के व्यापक समर्थन को दर्शाती है
⚖️ बड़ा सवाल—विकास या विनाश?
👉 शहरों के कचरे के निस्तारण के लिए प्लांट जरूरी
👉 लेकिन क्या इसके लिए गांवों को प्रदूषण का बोझ उठाना पड़ेगा?
👉 क्या पर्यावरणीय मानकों का सही पालन हुआ?
👉 क्या ग्रामीणों की सहमति ली गई?
🎯 Vision Live का विश्लेषण
Vision Live News के अनुसार,
अस्तौली का यह मामला केवल एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि भारत में विकास मॉडल पर उठते सवालों का प्रतीक बनता जा रहा है।
👉 एक तरफ शहरीकरण और कचरा प्रबंधन की चुनौती है
👉 दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता पर्यावरणीय दबाव
👉 यदि प्रशासन समय रहते पारदर्शी जांच और संतुलित समाधान नहीं देता,
तो यह आंदोलन
✔️ बड़े स्तर पर फैल सकता है
✔️ राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन सकता है
👉 साफ है—
अब यह सिर्फ डंपिंग ग्राउंड का मामला नहीं, बल्कि “जीवन और पर्यावरण बचाने की लड़ाई” बन चुका है।

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