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दिल्ली में ‘कैफ़े बियॉन्ड आइज़’ की शुरुआत, दृष्टिबाधित युवाओं के लिए 500 रोज़गार का लक्ष्य

📰  Vision Live / नई दिल्ली
समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम उठाते हुए नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (NAB) ने दक्षिण दिल्ली के आर.के. पुरम में ‘कैफ़े बियॉन्ड आइज़’ की शुरुआत की है। यह अनूठा कैफ़े पूरी तरह दृष्टिबाधित युवाओं द्वारा संचालित किया जाएगा, जो समाज में समान अवसर और सम्मानजनक रोजगार की दिशा में एक मिसाल पेश करता है।
इस पहल के साथ NAB ने तत्सत फाउंडेशन के सहयोग से एक महत्वाकांक्षी फूड कार्ट योजना की भी घोषणा की है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 500 दृष्टिबाधित युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल न केवल आजीविका के अवसर प्रदान करेगी, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को भी सशक्त करेगी।
इस परियोजना को मशहूर शेफ अश्वनी कुमार सिंह का मार्गदर्शन प्राप्त है, जो प्रतिभागियों को कुकिंग और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में पेशेवर प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान सटीकता, मसल मेमोरी और संवेदनशीलता आधारित तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि दृष्टिबाधित युवा अपनी अन्य इंद्रियों—स्वाद, सुगंध, स्पर्श और ध्वनि—का उपयोग कर उत्कृष्ट कुकिंग कौशल विकसित कर सकें।
लॉन्च कार्यक्रम के दौरान शेफ अश्वनी कुमार सिंह ने लाइव मास्टरक्लास का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने बिना दृष्टि के खाना बनाने की बारीकियां सिखाईं। उन्होंने ‘तासीर’ की पारंपरिक अवधारणा को भी समझाया, जिससे प्रशिक्षु संतुलित और पौष्टिक भोजन तैयार करने की कला में दक्ष हो सकें।
इस अवसर पर शेफ अश्वनी कुमार सिंह ने कहा, “खाना बनाना केवल देखने पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह जुनून, अनुशासन और संवेदनशील समझ की कला है। दृष्टिबाधित युवा अपनी अन्य इंद्रियों के माध्यम से असाधारण दक्षता हासिल कर सकते हैं।”
NAB के महासचिव प्रशांत वर्मा ने कहा कि यह पहल सहानुभूति से आगे बढ़कर सशक्तिकरण का वास्तविक उदाहरण है, जहां अवसरों के माध्यम से लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। वहीं तत्सत फाउंडेशन की निदेशक डॉ. सुमी गुप्ता ने कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षा और कौशल विकास के जरिए आर्थिक स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त करेगा।
शुभम हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक संजय चतुर्वेदी ने भी इस पहल को सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए समर्थन व्यक्त किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और कैफ़े में कार्यरत युवाओं के आत्मविश्वास, दक्षता और उत्साह को करीब से देखा। ‘कैफ़े बियॉन्ड आइज़’ न केवल रोजगार का माध्यम बन रहा है, बल्कि यह दृष्टिबाधित युवाओं के लिए सम्मान, स्वतंत्रता और नई पहचान का मंच भी तैयार कर रहा है।
यह पहल दर्शाती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर किसी भी चुनौती को ताकत में बदला जा सकता है, और सच्ची ‘दृष्टि’ हौसले, कौशल और आत्मविश्वास में निहित होती है।