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बालिका-भक्ति का दिव्य आलोक: खाम्बी में महाशिवरात्रि पर शिव आराधना का अद्भुत उत्सव

🔱  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ पलवल (हरियाणा)
 ब्रजधाम की पावन नगरी खाम्बी में महाशिवरात्रि का पर्व इस वर्ष विशेष आध्यात्मिक उल्लास और सांस्कृतिक चेतना के साथ मनाया गया। श्री बिहारी जी मंदिर परिसर में आयोजित भव्य आयोजन में बेटियों ने जिस अनोखे और भावपूर्ण ढंग से भगवान शिव की आराधना की, उसने पूरे क्षेत्र को भक्ति-रस में सराबोर कर दिया।
मंदिर में विराजमान भगवान शिव का बालिकाओं द्वारा दिव्य श्रृंगार किया गया। शिव स्वरूप को उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की भव्यता के अनुरूप अलंकृत किया गया। बेलपत्र, पुष्पमालाएं, चंदन, धूप-दीप और पवित्र गंगाजल से विधिवत अभिषेक कर शिव स्तुति की गई। बालिकाओं ने रुद्राष्टक एवं अन्य शिव-स्तोत्रों का सस्वर गान कर वातावरण को पूर्णतः शिवमय बना दिया। मंदिर प्रांगण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
🐂 नंदी पूजन के माध्यम से संस्कृति संरक्षण का संदेश
इस आयोजन की विशेषता केवल शिव आराधना तक सीमित नहीं रही। मंदिर के महंत पंडित सुखदेव ने बताया कि बालिकाओं ने ग्राम में विचरण करने वाले नंदी का भी विधिवत तिलक, माल्यार्पण एवं पूजन किया। यह दृश्य भारतीय संस्कृति में गौवंश और नंदी की महत्ता को पुनर्स्मरण कराने वाला था। बेटियों ने यह संदेश दिया कि परंपराएं केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान की जीवंत धरोहर हैं।
🌸 नारी-शक्ति और बाल चेतना का प्रेरक उदाहरण
नेहा, नीलम, मुस्कान, अंजलि, साक्षी, राधिका, संध्या, मनीषा, कनिका, प्रज्ञा, अंशिका, चेष्टा, डोली, उर्वशी एवं देवांशी सहित अन्य बालिकाओं की सहभागिता ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। उनकी श्रद्धा, अनुशासन और समर्पण ने यह सिद्ध कर दिया कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति जागरूक है।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में नारी-शक्ति की बढ़ती भागीदारी और आध्यात्मिक नेतृत्व का प्रतीक बनकर उभरा। खाम्बी ग्राम में महाशिवरात्रि का यह पर्व सामूहिक आस्था, सांस्कृतिक संरक्षण और बाल चेतना की उज्ज्वल अभिव्यक्ति के रूप में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।