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‘सम्मान, सहयोग और आत्मनिर्भरता’ का संगम — महिला उत्थान मंडल ने 11 कन्याओं का सामूहिक विवाह कर रचा सामाजिक सरोकार का नया अध्याय

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
महिला उत्थान मंडल द्वारा आयोजित 11 कन्याओं के सामूहिक विवाह समारोह ने सामाजिक एकता, नारी सशक्तिकरण और दहेज-मुक्त वैवाहिक परंपरा का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। हर्षोल्लास, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामुदायिक सहभागिता के बीच संपन्न हुआ यह आयोजन केवल एक विवाह समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
महिलाओं ने संभाली बारात की कमान
इस आयोजन की सबसे विशेष और भावनात्मक झलक वह रही जब महिलाओं ने स्वयं दूल्हों को कार में बैठाकर ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ भव्य बारात निकाली। नाचते-गाते, मंगलगीत गाते और उत्साह से झूमते हुए महिलाओं ने यह संदेश दिया कि समाज में सकारात्मक बदलाव की धुरी महिलाएं ही बन सकती हैं। पूरा परिसर रोशनी, सजावट और उल्लास से सराबोर रहा।
परंपरा और प्रगतिशील सोच का संगम
वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ सभी 11 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। हर जोड़े के लिए अलग-अलग मंडप और आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं, ताकि प्रत्येक विवाह पूर्ण गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न हो। आयोजकों ने यह सुनिश्चित किया कि हर कन्या को वह सम्मान और आत्मविश्वास मिले, जिसकी वह अधिकारी है।
गृहस्थ जीवन की सशक्त शुरुआत
महिला उत्थान मंडल ने नवदंपतियों को आत्मनिर्भर जीवन की मजबूत नींव देने के उद्देश्य से 39 प्रकार की उपयोगी सामग्री भेंट की। इनमें पलंग, अलमारी, कूलर, सिलाई मशीन, मिक्सी, पंखे, प्रेस, कुर्सी-मेज सेट, डिनर सेट, गद्दे, कंबल, चादर, स्टील की टंकी, कुकर, कढ़ाई, स्टील डिब्बे, कैसरोल, दीवार घड़ी, सूटकेस, बिछुए, मेकअप किट, लड़का-लड़की के वस्त्र, शॉल, घड़ियां, गैस सिलेंडर (भरे हुए), गैस चूल्हा, रेगुलेटर, पाइप, सिलेंडर स्टैंड, एप्रन, तकिए, कप सेट और चुनरी जैसी आवश्यक सामग्री शामिल रही।
विशेष रूप से सिलाई मशीन और अन्य घरेलू उपकरणों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी संदेश दिया गया। यह पहल दहेज प्रथा से हटकर सम्मानजनक सामाजिक सहयोग का उदाहरण बनी।
समाज के हर वर्ग का मिला सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में शहर के गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों और विभिन्न संगठनों ने सक्रिय भूमिका निभाई। समारोह में प्रियंका चौहान, प्रतिभा झा, संगीता शर्मा, नीरा डागुर, शांति त्रिपाठी, सुमन शर्मा, मंजू गुप्ता, पूनम यादव, प्रीति गोयल, सलोनी, मनीषा शर्मा, विद्या देवी, संगीता सक्सेना, लक्ष्मी सूर्यकला, रेखा गुर्जर सहित मंजीत सिंह, हरेंद्र भाटी, आलोक सिंह, दीपक भाटी, अनिल कसाना, राहुल नंबरदार, अनिल भाटी, राहुल भाटी, ओम रायजादा, शेर सिंह भाटी, एन.पी. सिंह एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभी ने नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखमय, समृद्ध और सम्मानजनक जीवन की कामना की।
सामाजिक संदेश: दहेज नहीं, सहयोग और सम्मान
इस सामूहिक विवाह ने समाज को यह संदेश दिया कि विवाह केवल आर्थिक प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि दो परिवारों के पवित्र मिलन का संस्कार है। सामूहिक विवाह जैसे आयोजन जरूरतमंद परिवारों के आर्थिक बोझ को कम करते हैं और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।
महिला उत्थान मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे समाजोपयोगी कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि जरूरतमंद परिवारों को सम्मान के साथ नई शुरुआत का अवसर मिलता रहे।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब समाज एकजुट होकर आगे बढ़ता है, तो खुशियां केवल एक दिन की नहीं, बल्कि जीवनभर की बन जाती हैं।