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ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर की मौत: हादसा नहीं, सिस्टम की नाकामी?

  
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत अब एक साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी लापरवाही और प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बनती जा रही है। जिस गड्ढे में पानी भरने से उनकी कार गिर गई, वह बेसमेंट निर्माण के दौरान खुला छोड़ा गया था — न बैरिकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड और न ही सुरक्षा मानक।
तीन घंटे की देरी और एक जान की कीमत
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद करीब तीन घंटे तक रेस्क्यू के नाम पर केवल अफरातफरी रही। हाईटेक शहर कहलाने वाले नोएडा में आधुनिक संसाधन होने के बावजूद समय पर रेस्क्यू न हो पाना प्रशासन की गंभीर विफलता को उजागर करता है। सवाल यह है कि यदि समय रहते जल निकासी और क्रेन की व्यवस्था होती तो क्या युवराज की जान बच सकती थी?
बिल्डर और प्राधिकरण की भूमिका सवालों के घेरे में
सबसे बड़ा एंगल यह है कि बेसमेंट निर्माण स्थल पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसके आदेश पर हुई? क्या ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने साइट का निरीक्षण किया था? और यदि किया था, तो गड्ढा खुला कैसे छोड़ा गया? यह मामला सीधे तौर पर बिल्डर–प्राधिकरण की सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
बहादुर गवाह पर दबाव का आरोप
घटना के बाद बहादुरी दिखाने वाले डिलीवरी बॉय मुनेंद्र को कथित रूप से चार घंटे तक थाने में बैठाकर बयान बदलने का दबाव बनाना एक नया और गंभीर मोड़ ले चुका है। यदि यह आरोप सही है तो यह साबित करता है कि पुलिस हादसे की असल वजह से ध्यान हटाने के लिए गवाहों को डराने का प्रयास कर रही है।
सपा का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार के साथ
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मिलकर न सिर्फ संवेदना जताई, बल्कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। पार्टी नेताओं का आरोप है कि पुलिस और प्राधिकरण दोनों अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए सच दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
अब सवाल सिर्फ न्याय का है
यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है —
क्या ग्रेटर नोएडा में बिल्डिंग निर्माण सुरक्षित है?
क्या आम नागरिक की जान की कीमत इतनी सस्ती है?
क्या इस मामले में सिर्फ छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जाएगा?
इंजीनियर युवराज मेहता की मौत अब एक परिवार की त्रासदी नहीं रही, यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। यदि इस मामले में निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो यह हादसा आने वाले समय में और भी जिंदगियां निगल सकता है।