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श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिवस पर सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन

✍️ Vision Live | Greater Noida

ग्रेटर नोएडा स्थित रामलाल वृद्ध आश्रम के गौशाला परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिवस का आयोजन बड़े श्रद्धा और सद्भाव के साथ संपन्न हुआ। कथा व्यास गोपालाचार्य जी महाराज ने दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक अपने मुखारविंद से भगवान की दिव्य शक्तियों एवं जीवन की अमूल्य लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन किया।

इस अवसर पर आज के परीक्षित के रूप में शिव प्रसाद शर्मा, ज्योति शर्मा, नंदकिशोर शर्मा, राजा रानी, विवेक लाल, सलोनी, भगवती प्रसाद, दिनेश शर्मा, राजेश्वरी, हेमंत, राज गर्ग, धर्मेंद्र बालियान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं रामलाल वृद्ध आश्रम के वृद्ध माता-पिता उपस्थित रहे। भगवान की लीलाओं के भावपूर्ण वर्णन से उपस्थित जनों की आंखें नम हो उठीं और वातावरण भक्ति रस से सरोबार हो गया।

सातवें दिवस का मुख्य प्रसंग

कथा व्यास ने आज विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अटूट मित्रता का मार्मिक वर्णन किया। सुदामा चरित्र के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्ची मित्रता जाति, धर्म और धन-दौलत की सीमाओं से परे होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन मित्र सुदामा के प्रति जिस प्रेम, सम्मान और करुणा का परिचय दिया, वह संसार के लिए आदर्श है। इसके साथ ही कथा में सुभद्रा हरण प्रसंग एवं कृष्ण की विविध लीलाओं का भी विस्तार से वर्णन हुआ। महाराज जी ने भक्तों को संदेश दिया कि मित्रता में स्वार्थ नहीं, बल्कि निस्वार्थ भाव और समर्पण होना चाहिए।

भावुक हुआ श्रद्धालुओं का मन

कथा के दौरान कई बार ऐसा भावुक वातावरण बना जब उपस्थित वृद्धजन और भक्त कथा के प्रसंगों से गहराई से जुड़ गए। भक्ति रस में डूबे श्रोताओं ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा न केवल आध्यात्मिक आनंद प्रदान करती है, बल्कि जीवन मूल्यों को भी आत्मसात करने की प्रेरणा देती है।