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किसानों के साथ यीडा का सौतेला व्यवहार — 64% और 7% भूखंड योजना में घोर अनदेखी



किसान नेता अजीत चौहान ने उठाई मूल अधिकारों की पुरज़ोर मांग

Vision Live / Yeida City

— यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) द्वारा किसानों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसान नेता अजीत चौहान ने प्राधिकरण पर आरोप लगाया कि जिन किसानों ने क्षेत्र के विकास के लिए अपनी जमीन दी, आज उन्हीं किसानों को उनके 64% मुआवजा भूखंड और 7% पुनर्वास प्लॉट का हक नहीं मिल रहा है।

किसानों के हिस्से में अन्याय क्यों?

किसान नेता ने कहा कि यीडा के पास परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये की निधि है, लेकिन किसानों को उनका वाजिब हिस्सा देने में टालमटोल की जा रही है।
“यह कैसा न्याय है कि जिन्हें ज़मीन देने के बदले भूखंड मिलने थे, वे आज तक फाइलों में अटके हैं, और जिन किसानों ने सपने देखे थे अपनी अगली पीढ़ियों को बेहतर जीवन देने के, वे अब इस उम्मीद में दुनिया छोड़ गए,” — अजीत चौहान ने कहा।

किसानों की तीन मूलभूत मांगें:

  1. 64% मुआवज़ा भूखंडों का शीघ्र वितरण।
  2. 7% पुनर्वास भूखंडों को लेकर स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए।
  3. किसानों और उनके परिवारों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी जाए।

अजीत चौहान ने ज़ोर देते हुए कहा कि अब यह केवल प्लॉट की मांग नहीं है, बल्कि सम्मान, अधिकार और न्याय की लड़ाई है।

प्राधिकरण क्यों है चुप?

उन्होंने जिला प्रशासन और यीडा के सीईओ से सार्वजनिक तौर पर यह सवाल पूछा:

“जब सब कुछ है — बजट, योजनाएं, संसाधन — तो फिर किसानों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?”
“क्या गरीब, सीधे-सादे किसान अपने ही हक़ के लिए ज़िंदगी भर इंतज़ार करते रहेंगे?”

अल्टीमेटम और अपील

किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि किसानों को न्याय नहीं मिला तो वह जन आंदोलन के लिए विवश होंगे। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर और यीडा सीईओ से तत्काल हस्तक्षेप और समाधान की मांग की।


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